काला सागर में बारूदी बवंडर: रूसी तट पर यूक्रेनी ड्रोन हमले की चपेट में आया कच्चा तेल भरा टैंकर, 23 भारतीय क्रू मेंबर्स की जान सांसत में

संवाद 24 नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष का दायरा अब एक बार फिर गहरे समंदर तक पहुंच गया है। काला सागर (Black Sea) के जलक्षेत्र में रूसी तट के पास उस वक्त भीषण अफरा-तफरी मच गई, जब लाइबेरियाई ध्वज वाले एक बड़े कच्चे तेल के टैंकर पर यूक्रेनी नौसैनिक ड्रोन से जोरदार हमला बोला गया। धमाके के तुरंत बाद जहाज में भयंकर आग भड़क उठी और देखते ही देखते समुद्र में काले धुएं का विशाल गुबार उठने लगा। इस पूरे वाकये ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी, क्योंकि संकटग्रस्त पोत पर सवार सभी 23 क्रू मेंबर्स भारतीय नागरिक थे। हालांकि, समय रहते चलाए गए बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की बदौलत सभी भारतीय नाविकों को सकुशल बचा लिया गया है।

​ड्रोन स्ट्राइक से दहला ‘अफ्रामैक्स रियो’ टैंकर
​रूसी परिवहन मंत्रालय की ओर से साझा की गई प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सोची शहर के तटीय समुद्री इलाके के पास हुआ। निशाना बना पोत ‘अफ्रामैक्स रियो’ (Aframax Rio) कच्चे तेल से भरा हुआ था और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। अचानक समुद्र की सतह से तेजी से आए मानवरहित नौसैनिक ड्रोन (Sea Drone) ने पोत को सीधे टक्कर मार दी। ​टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जहाज के एक हिस्से में तुरंत आग लग गई और कुछ ही पलों में कच्चा तेल समुद्र में रिसाव के साथ जलने लगा। खुले समंदर में धधकती लपटें और उठता घना काला धुआं कई किलोमीटर दूर तटीय इलाकों से भी साफ देखा जा सकता था। शुरुआती घंटों में आग की तीव्रता और लपटों के भयंकर विस्तार के चलते राहत एवं बचाव दल को नजदीक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

​सभी 23 भारतीय सुरक्षित, त्वरित रेस्क्यू ने टाला बड़ा हादसा
​हमले की सूचना मिलते ही रूसी मैरीटाइम रेस्क्यू सर्विस और नौसैनिक सुरक्षा एजेंसियों ने आपातकालीन मोर्चा संभाला। कई दमकल नौकाओं और आधुनिक उपकरणों से लैस जहाजों को मौके पर भेजा गया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि जहाज पर तैनात सभी 23 चालक दल के सदस्य – जो कि भारतीय मूल के थे – पूरी तरह सुरक्षित निकाल लिए गए। ​अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि समय रहते लाइफबोट्स और रेस्क्यू वेसल्स की मदद से चालक दल को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया और किसी भी भारतीय नाविक को गंभीर चोट नहीं आई है। हालांकि, घटना के वक्त समुद्र के बीच फंसे क्रू मेंबर्स के लिए वे चंद मिनट किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं थे।

​तटीय इलाकों में अलर्ट, पर्यावरण निगरानी तेज
​हमले के बाद सोची और उसके पास स्थित सिरियस फेडरल टेरिटरी के तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा के लिहाज से आम नागरिकों के लिए समुद्र तटों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। समंदर में तेल रिसाव और जलने से उठने वाले धुएं को देखते हुए पर्यावरण विशेषज्ञों की टीम को हवा और पानी की गुणवत्ता जांचने के काम पर लगाया गया। ​सिरियस प्रशासन के प्रमुख दिमित्री प्लिश्किन ने हालात पर बयान जारी करते हुए बताया कि विशेषज्ञों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि तटीय इलाकों में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से काफी नीचे है और स्थानीय नागरिकों अथवा पर्यटकों के स्वास्थ्य पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। इसके साथ ही समुद्र में फैले तेल को नियंत्रित करने के लिए बैरियर लगाए जा रहे हैं।

​व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमले और भारत की गहरी चिंता
​काला सागर का यह जलक्षेत्र पिछले दो वर्षों से सैन्य टकराव का बड़ा केंद्र बना हुआ है। हाल के दिनों में दोनों ओर से एक-दूसरे के रणनीतिक और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं में तेजी आई है। इस हमले से कुछ ही घंटे पहले एक अन्य व्यापारिक जहाज पर भी हमला हुआ था, जिसमें चालक दल के एक सदस्य की जान चली गई थी। इसके अतिरिक्त बुल्गारियाई तट के करीब भी अज्ञात ड्रोनों की गतिविधियों ने समुद्री व्यापारिक गलियारों में खौफ पैदा कर दिया है। ​भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक और व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का खुला उल्लंघन हैं। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि वैश्विक व्यापार में लगे नाविकों और जहाजों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, क्योंकि भारतीय मर्चेंट नेवी के हजारों युवा इन संवेदनशील समुद्री मार्गों पर सेवाएं दे रहे हैं। मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास भी रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि बचाए गए भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी या आगे की औपचारिकताएं बिना किसी रुकावट के पूरी की जा सकें।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *