
संवाद 24 नई दिल्ली। देश भर में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘राष्ट्रीय परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। सरकार अब इस विधेयक को संसद के वर्तमान सत्र के दौरान ही लोक सभा में पेश करने की पूरी तैयारी में है, ताकि परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाले भू-माफियाओं और नकल गिरोहों पर नकेल कसी जा सके।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान: 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना
प्रस्तावित नए विधेयक के तहत पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली को गैर-जमानती और संगीन अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
कड़ी सजा का प्रावधान: पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले संगठित गिरोहों, कोचिंग संस्थानों और परीक्षा माफियाओं के लिए 10 वर्ष तक की कठोर कारावास और 1 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है।
संपत्ति जब्ती और त्वरित कार्रवाई: परीक्षा में गड़बड़ी से अर्जित संपत्ति को जब्त करने का अधिकार भी जांच एजेंसियों को दिया जाएगा।
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट: मामलों की सुनवाई में देरी न हो, इसके लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का खाका खींचा गया है, जिससे दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके।
पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में सरकार का संकल्प
कैबिनेट के इस फैसले के बाद सरकारी प्रवक्ता और प्रशासनिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार युवाओं की कड़ी मेहनत को व्यर्थ नहीं जाने देगी। हाल ही में नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्पन्न हुई समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए यह महसूस किया गया कि पुराने कानूनों में मौजूद कमियों को दूर करना बेहद आवश्यक था। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस कानून का मुख्य उद्देश्य केवल सजा देना ही नहीं, बल्कि एक ऐसा डर कायम करना है जिससे कोई भी संगठित गिरोह भविष्य में परीक्षाओं में गड़बड़ी करने का दुस्साहस न कर सके। इसके साथ ही, कंप्यूटर-आधारित परीक्षण (CBT) केंद्रों की सुरक्षा जांच और तकनीकी मापदंडों को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।
विरोध प्रदर्शनों के बीच विधायी समाधान की पहल
एक तरफ जहाँ जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास विभिन्न छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार का मानना है कि सड़क पर आंदोलनों के बजाय ठोस विधायी और प्रशासनिक सुधार ही इस समस्या का स्थाई समाधान हैं। हालाँकि, विपक्षी दलों और कुछ छात्र संगठनों का कहना है कि कानून बनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वर्तमान में प्रभावित हुए छात्रों को तुरंत न्याय मिले। उनका मानना है कि क्रियान्वयन के स्तर पर पारदर्शिता सबसे ज्यादा मायने रखती है। कड़े कानून को कैबिनेट से मिली मंजूरी यह साबित करती है कि सरकार युवाओं के आक्रोश और परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को लेकर सजग है। पेपर लीक जैसी विकराल होती समस्या को खत्म करने के लिए सख्त कानूनी ढांचा समय की मांग था। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह रहेगा कि यह विधेयक लोक सभा और राज्य सभा से पारित होने के बाद धरातल पर कितनी तेजी से लागू होता है। यदि फास्ट ट्रैक अदालतों और कठोर प्रावधानों का सही ढंग से पालन किया गया, तो निश्चित तौर पर यह कदम देश के करोड़ों मेहनती परीक्षार्थियों के मन में विश्वास बहाल करने में सफल होगा।






