
संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर के गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम ने न केवल दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक बड़े संघर्ष की आशंका भी पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अपाचे हेलीकॉप्टर गिरने से बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना का एक एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास नियमित गश्त पर था। इसी दौरान वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि हेलीकॉप्टर को ईरानी कार्रवाई के कारण नुकसान पहुंचा, जबकि शुरुआती रिपोर्टों में यह भी संकेत मिले कि किसी ड्रोन की भूमिका हो सकती है। घटना के बाद दोनों अमेरिकी पायलटों को सुरक्षित निकाल लिया गया और वे पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं।
ट्रंप ने दिया कड़ा संदेश
घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इस हमले का जवाब देना ही होगा। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वाशिंगटन पूर्ण युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा और सैनिकों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ईरानी ठिकानों पर अमेरिकी कार्रवाई
हेलीकॉप्टर घटना के कुछ समय बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य प्रतिष्ठानों और रक्षा ढांचों को निशाना बनाते हुए हमले शुरू किए। रिपोर्टों के अनुसार, रडार सिस्टम और वायु रक्षा से जुड़े ठिकाने इन हमलों के प्रमुख लक्ष्य रहे। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इन हमलों को “आत्मरक्षा की कार्रवाई” बताया और कहा कि इसका उद्देश्य आगे होने वाले संभावित खतरों को रोकना है।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो वह इसका उचित जवाब देगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी बाहरी दबाव के सामने देश झुकेगा नहीं और अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। इस बयान ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र
यह पूरा घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हुआ है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े तो इसका असर वैश्विक तेल बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
शांति प्रयासों पर भी मंडराया संकट
हाल के दिनों में अमेरिका, ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयास किए जा रहे थे। कई रिपोर्टों में संभावित समझौते और युद्धविराम को लेकर सकारात्मक संकेत भी सामने आए थे। लेकिन हेलीकॉप्टर घटना और उसके बाद हुई सैन्य कार्रवाई ने इन प्रयासों को झटका पहुंचाया है। अब यह आशंका बढ़ गई है कि शांति प्रक्रिया एक बार फिर पटरी से उतर सकती है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते हैं तो मध्य पूर्व में एक नया सैन्य संकट खड़ा हो सकता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज होने की संभावना है। फिलहाल दुनिया की निगाहें वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं, जहां लिए जाने वाले अगले फैसले पूरे क्षेत्र के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।






