
संवाद 24 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जारी प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस और प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था व जन-सुरक्षा बनाए रखने के लिए मुस्तैदी से काम कर रहा है। जंतर-मंतर पर विभिन्न समूहों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित किए जा रहे प्रदर्शनों के कारण मध्य दिल्ली के कुछ संवेदनशील हिस्सों में आम लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए पुलिस द्वारा अग्रिम सुरक्षा इंतजाम और यातायात डायवर्जन लागू किए गए हैं। सरकार एवं सुरक्षा एजेंसियों की पहली प्राथमिकता नागरिकों, विशेषकर स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी प्रशासनिक सतर्कता और सुचारू समन्वय के परिणामस्वरूप मध्य दिल्ली के प्रमुख स्कूलों ने पठन-पाठन को निरंतर और सुरक्षित बनाए रखने के लिए हाइब्रिड लर्निंग मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
छात्रों की सुरक्षा और सहूलियत के लिए उठाए गए कदम
प्रशासन और दिल्ली पुलिस द्वारा समय-समय पर जारी की जा रही ट्रैफिक और सुरक्षा एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए मध्य दिल्ली के कई प्रतिष्ठित स्कूलों ने दूरदर्शिता का परिचय दिया है। हुमायूं रोड स्थित आरएस जूनियर मॉडर्न स्कूल ने नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए 24 जुलाई से हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में कक्षाएं संचालित करने का संतुलित निर्णय लिया है। स्कूल प्रशासन द्वारा जारी परिपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार द्वारा सुरक्षा के दृष्टिकोण से उठाए जा रहे एहतियाती कदमों और मध्य दिल्ली के संवेदनशील माहौल को देखते हुए बच्चों की सुविधा के लिए यह कदम उठाया गया है। ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान भी छात्रों में स्कूल के प्रति अनुशासन बना रहे, इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट टीम्स (Microsoft Teams) पर नियमित समय-सारिणी के तहत स्कूल यूनिफार्म में कक्षाएं ली जा रही हैं। इसके साथ ही, लोधी एस्टेट स्थित सरदार पटेल विद्यालय जैसे अन्य प्रमुख संस्थानों ने भी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्पों को अपनाकर यह सुनिश्चित किया है कि प्रदर्शनों के कारण बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क प्रशासन
नीट-यूजी मामले को लेकर सड़कों पर उतर रहे प्रदर्शनकारियों और आंदोलनकारियों के बीच शांति व सुरक्षा बनाए रखना प्रशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण चुनौती है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करना और चुनिंदा संवेदनशील मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश व निकास द्वारों पर अस्थायी पाबंदियां लगाना पूरी तरह से एहतियाती कदम हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना, अफवाह या उपद्रव से आम नागरिकों और यात्रियों को बचाया जा सके। जंतर-मंतर, संसद मार्ग, जनपथ और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि मुख्य सड़कों पर आवाजाही नियंत्रित रहे और किसी भी प्रकार की अराजकता न फैले। यातायात पुलिस द्वारा भी वैकल्पिक मार्गों की लगातार जानकारी दी जा रही है ताकि एम्बुलेंस, स्कूली वाहनों और आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता मिल सके।
शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने की प्रशासनिक दूरदर्शिता
सरकार और संबंधित शैक्षणिक बोर्ड्स का स्पष्ट मानना है कि छात्रों का स्वास्थ्य, सुरक्षा और निर्बाध शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण हैं। प्रदर्शनों से उत्पन्न स्थिति का सही आकलन करते हुए स्कूलों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे अपनी सुविधानुसार हाइब्रिड या ऑनलाइन मॉडल का उपयोग करें। अभिभावकों ने भी सरकार की सुरक्षा व्यवस्था और स्कूलों के इस व्यावहारिक दृष्टिकोण का स्वागत किया है, जिससे बच्चों को सुरक्षा जोखिम से बचाते हुए उनकी पढ़ाई को जारी रखा जा सका है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार 24 घंटे नजर रखी जा रही है। जैसे ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में स्थितियां पूरी तरह सामान्य होंगी, यातायात और मेट्रो सेवाओं के सभी प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे और स्कूल पुनः अपनी सामान्य कार्यप्रणाली पर लौट आएंगे। तब तक के लिए सुरक्षा बल और नागरिक प्रशासन मिलकर राजधानी में शांति, व्यवस्था और जन-सुविधाएं बनाए रखने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं।






