
संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला हादसा सामने आया है। साउथ कैंपस थाना क्षेत्र के व्यस्त बाजार और छात्र बाहुल्य इलाके में स्थित एक बहुमंजिला पुरानी इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमींदोज हो गई। पलक झपकते ही एक हंसता-खेलता आशियाना और छात्रों का पेइंग गेस्ट (पीजी) कंक्रीट और सरियों के मलबे के विशाल ढेर में तब्दील हो गया। इस भीषण हादसे में अब तक 6 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एनडीआरएफ, दमकल विभाग और स्थानीय लोगों की मुस्तैदी से 10 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया है। मलबे के नीचे अभी भी अन्य लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
भूकंप जैसा खौफनाक मंजर: मलबे से गूंजीं ‘बचाओ-बचाओ’ की चीखें
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के समय अचानक एक ऐसा जोरदार धमाका हुआ जिससे आसपास की जमीन हिल गई। लोगों को पहली नजर में लगा कि कोई तेज तीव्रता का भूकंप आ गया है। घबराए लोग अपने-अपने घरों और दुकानों से बाहर दौड़े, लेकिन बाहर आते ही जो नजारा दिखा, उसने सभी के पैरों तले जमीन खिसका दी। हर तरफ सिर्फ धूल और धुएं का गहरा गुबार था और चीख-पुकार मची हुई थी। इमारत का नामोनिशान मिट चुका था और मलबे से “बचाओ-बचाओ” की दबती हुई आवाजें आ रही थीं। पास ही स्थित दुकानदारों और छात्रों ने बचाव एजेंसियों के पहुंचने से पहले ही अपने हाथों से पत्थर हटाकर दबे हुए लोगों की सांसें बचाने की कोशिश शुरू कर दी।
सपनों की चिता: मलबे में दबीं छात्र जीवन की उम्मीदें
इस दर्दनाक हादसे की चपेट में आने वालों में कई ऐसे मेधावी युवा शामिल थे जो दूर-दराज के शहरों और गांवों से अपने सपनों को पंख देने दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस पढ़ने आए थे। हादसे के समय कई छात्र अपने कमरों में आराम कर रहे थे या पढ़ाई में व्यस्त थे। प्रत्यक्षदर्शियों और दोस्तों के मुताबिक, कई छात्र कुछ दिन पहले ही अपने परिवारों से मिलकर वापस दिल्ली लौटे थे। अपने जिगर के टुकड़ों को उच्च शिक्षा के लिए राजधानी भेजने वाले परिजनों के लिए यह त्रासदी कभी न भरने वाला गहरा जख्म बन गई है। अस्पताल पहुंचे परिजन और दोस्त गहरे सदमे में हैं और प्रशासनिक लापरवाही पर कड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
लालच की भेंट चढ़ी सुरक्षा: पिलर से छेड़छाड़ बना काल
हादसे की मुख्य वजह इमारत में चल रहा अवैध और गैर-जिम्मेदाराना निर्माण कार्य बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों और छात्रों का आरोप है कि इमारत के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में रिनोवेशन का काम कराया जा रहा था। ज्यादा किराया वसूलने और अतिरिक्त जगह बनाने के चक्कर में कमजोर पिलरों से छेड़छाड़ की गई, जिससे पूरी संरचना का संतुलन बिगड़ गया और वह अचानक ढह गई। छात्रों ने यह भी बताया कि इमारत की जर्जर स्थिति को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन मोटी रकम वसूलने वाले प्रबंधन ने इन चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
कानून का शिकंजा: मालिक पर गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज
घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सख्त कानूनी कदम उठाए हैं। साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की विशेष टीमें बनाकर फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
प्रशासन की कार्रवाई: मजिस्ट्रेट जांच के आदेश और मुफ्त इलाज का निर्देश
प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़े कदम उठाए गए हैं। दिल्ली सरकार ने पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि छात्रों और निर्दोष नागरिकों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती सभी घायलों को त्वरित, निःशुल्क और बेहतर चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
सुलगता सवाल: क्या मासूमों की बलि के बाद जागेगा तंत्र
यह हादसा राजधानी के विभिन्न इलाकों में बिना सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण और नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हॉस्टल-पीजी के खिलाफ एक कड़ा सबक है। सवाल अब भी वही खड़ा है – क्या मासूम जिंदगियों के जाने के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी?






