
तालग्राम, कन्नौज। आपातकाल के दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले तालग्राम क्षेत्र के लोकतंत्र सेनानी एवं सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक सुखवासी लाल का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार रात करीब नौ बजे निधन हो गया। 84 वर्षीय सुखवासी लाल के निधन की सूचना मिलते ही गोविंदपुर कुकापुर गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।1975 का वह दौर, जब लोकतंत्र की आवाज के लिए गए जेल सुखवासी लाल ने वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के विरोध में चले लोकतांत्रिक आंदोलन में हिस्सा लिया था। आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में उन्हें लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ।आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित किए जाने की व्यवस्था रही है। राज्य सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में ऐसे सेनानियों के लिए सम्मान राशि, चिकित्सा एवं अन्य सुविधाओं के साथ मृत्यु के बाद राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है।
शिक्षक के रूप में भी छोड़ी अपनी अलग पहचान
लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष के साथ सुखवासी लाल ने शिक्षा के क्षेत्र में भी लंबी सेवा दी। वह प्राथमिक विद्यालय रसूलाबाद में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत रहे और वर्ष 2000 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका जुड़ाव शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से बना रहा।परिजनों के अनुसार वह बच्चों और ग्रामीणों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करते थे। अपने अनुभवों के माध्यम से देश की आजादी, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ी बातें भी लोगों के साथ साझा करते रहे।
एक जुलाई से चल रहा था उपचार, तीन सितंबर की रात निधन
परिजनों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 को उनकी तबीयत खराब हुई थी। इसके बाद उनका कानपुर के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। लंबी बीमारी से संघर्ष करने के बाद 3 सितंबर की रात करीब नौ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।उनके निधन से परिवार ने अपने बुजुर्ग और मार्गदर्शक को खो दिया। पत्नी रामवेटी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार और ग्रामीणों के बीच सुखवासी लाल की सादगी, सामाजिक सरोकारों और शिक्षा के प्रति उनके योगदान को याद किया जा रहा है।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, अधिकारियों ने भी दी श्रद्धांजलि
शुक्रवार को भावुक माहौल में सुखवासी लाल की अंतिम यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और शुभचिंतक अंतिम विदाई देने पहुंचे। छिबरामऊ तहसीलदार भी अंतिम संस्कार की सूचना पर मौके पर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की।वहीं थाना प्रभारी निरीक्षक रंजना पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने लोकतंत्र सेनानी सुखवासी लाल को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
क्षेत्र ने खोया लोकतंत्र और शिक्षा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व
ग्रामीणों ने सुखवासी लाल के निधन को क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति बताया। लोगों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन के दो महत्वपूर्ण अध्याय—लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और शिक्षा के प्रसार—के प्रति समर्पण के साथ निभाए। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र के महत्व और शिक्षा की शक्ति का संदेश देता रहेगा।






