
तिर्वा, कन्नौज। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर शुक्रवार को तिर्वा नगर भक्तिमय माहौल में नजर आया। श्रीकृष्ण सेवा समिति की ओर से भगवान श्रीकृष्ण की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। पालकी में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए नगर की सड़कों और गलियों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रिमझिम बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरे यात्रा मार्ग में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजते रहे।
रामेश्वरम धाम से शुरू हुई यात्रा
पालकी यात्रा की शुरुआत शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे तिर्वा के सिद्धपीठ रामेश्वरम धाम मंदिर से हुई। यात्रा को लेकर पहले से ही तैयारियां की गई थीं। एक दिन पूर्व प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट में भी आयोजक आलोक यादव के हवाले से रामेश्वरम धाम से दौलेश्वर धाम तक पालकी यात्रा निकाले जाने की जानकारी दी गई थी।पालकी के नगर में प्रवेश करते ही श्रद्धालु दर्शन के लिए सड़कों पर पहुंचने लगे। भगवान श्रीकृष्ण की पालकी को अपने कंधों पर उठाने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। जगह-जगह लोगों ने आरती और पूजा-अर्चना कर भगवान का स्वागत किया।
बारिश के बीच भी नहीं थमा भक्ति का उत्साह
यात्रा के दौरान रिमझिम बारिश होती रही, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। बैंड और भक्ति गीतों की धुन के बीच श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते हुए यात्रा में आगे बढ़ते रहे। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों पर आधारित सजीव झांकियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
छतों से बरसे फूल, जगह-जगह हुआ कान्हा का स्वागत
पालकी यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारकर स्वागत किया। कई स्थानों पर महिलाओं ने घरों की छतों से पालकी पर पुष्पवर्षा की। फूलों की वर्षा और जयकारों से तिर्वा का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।स्थानीय रिपोर्टों में भी इस यात्रा के रामेश्वरम मंदिर से शुरू होकर दौलेश्वर धाम पहुंचने की पुष्टि हुई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई थी।
इन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी पालकी
भगवान श्रीकृष्ण की पालकी यात्रा रामेश्वरम धाम मंदिर से प्रारंभ होकर धर्मशाला मार्ग, सर्राफा बाजार, गांधी चौक, कन्नौज-औरैया रोड तथा ठठिया रोड होते हुए सिद्धपीठ बाबा दौलेश्वर धाम मंदिर पहुंची। देर शाम मंदिर परिसर में यात्रा का समापन हुआ।यात्रा के दौरान मार्ग में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और जगह-जगह हुए स्वागत ने पूरे नगर को उत्सव के माहौल में बदल दिया। पालकी के साथ चल रहे भक्त लगातार भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते रहे।
श्रद्धालुओं के लिए जलपान और सुरक्षा के इंतजाम
आयोजन समिति की ओर से यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई। वहीं, यात्रा के दौरान भीड़ और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती रही।तिर्वा में धार्मिक आयोजनों के दौरान सिद्धपीठ बाबा दौलेश्वर धाम की विशेष भूमिका भी सामने आती रही है। हाल में सावन के अवसर पर भी यहां से पालकी यात्रा निकाली गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे।
आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता की दिखी तस्वीर
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर निकली यह पालकी यात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि नगर की सामूहिक आस्था और सामाजिक सहभागिता की भी तस्वीर पेश करती नजर आई। बारिश के बीच श्रद्धालुओं की मौजूदगी, घरों की छतों से होती पुष्पवर्षा और लगातार गूंजते जयकारों ने जन्माष्टमी के उत्सव को यादगार बना दिया।भगवान श्रीकृष्ण की पालकी के दौलेश्वर धाम पहुंचने के साथ यात्रा का समापन हुआ, लेकिन पूरे आयोजन के दौरान बना भक्तिमय वातावरण देर तक नगरवासियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।






