50 फीट गहरे कुएं में गिरी पांच साल की बच्ची, चौथी कोशिश में सिपाही ने बचाई जान

कायमगंज क्षेत्र के जहानपुर गांव में गुरुवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब पांच वर्षीय बच्ची खेलते समय करीब 50 फीट गहरे कुएं में जा गिरी। कुआं संकरा होने और अंदर जहरीली गैस की आशंका के कारण बच्ची को बाहर निकालना आसान नहीं था। ग्रामीणों से लेकर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार कोतवाली में तैनात सिपाही मनोज कुमार ने चौथी कोशिश में ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ कुएं में उतरकर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

झूले से लौटते समय कुएं की पटिया पर पहुंची बच्चियां

जहानपुर निवासी पवन कुमार की पांच वर्षीय बेटी सौम्या अपनी बड़ी बहन अनन्या के साथ स्कूल से घर लौट रही थी। बताया गया कि रास्ते में दोनों बहनें गांव में दिनेश के घर के पास बने चबूतरे पर कुछ देर झूला झूलने लगीं। इसके बाद सौम्या कुएं के ऊपर पड़ी पटिया पर कूद गई। अचानक पटिया टूट गई और बच्ची सीधे करीब 50 फीट गहरे कुएं में जा गिरी।

बहन की चीख सुनकर जुटे ग्रामीण

सौम्या के कुएं में गिरते ही उसकी बड़ी बहन अनन्या चीखने लगी। आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ऊपर से झांकने पर बच्ची दिखाई दे रही थी, जिससे उसके जीवित होने की पुष्टि हुई। ग्रामीणों ने तत्काल उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन कुएं का मुंह संकरा होने और अंदर दम घुटने की आशंका के चलते कोई ज्यादा देर तक नीचे नहीं रह सका।

कुएं में उतरने की कोशिश में कई बार आई मुश्किल

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। एसडीएम अभिषेक वर्मा, तहसीलदार हर्षित सिंह, सीओ राजेश कुमार द्विवेदी और इंस्पेक्टर क्राइम बी. यादव पुलिस टीम के साथ पहुंचे। फायर ब्रिगेड और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी बुलाया गया। बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। फायर ब्रिगेड टीम के प्रभारी प्रांशु ने भी संकरे कुएं में उतरने का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल न होने के कारण सफलता नहीं मिली।

कुएं के अंदर से बच्ची ने मांगा पानी

रेस्क्यू के दौरान ऊपर से बच्ची को आवाज लगाई गई तो उसने पानी मांगा। बच्ची के जवाब देने से परिजनों और ग्रामीणों में उम्मीद जगी कि वह सुरक्षित है। पुलिसकर्मियों ने रस्सी के सहारे कमंडल से पानी नीचे पहुंचाया। बच्ची ने पानी पिया और उसके बाद बचाव दल ने उसे सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशें तेज कर दीं।

तीन बार लौटे सिपाही मनोज, चौथी बार लेकर पहुंचे ऑक्सीजन

कुएं की स्थिति बेहद जोखिम भरी थी। कोतवाली में तैनात सिपाही मनोज कुमार ने बच्ची को बचाने के लिए नीचे उतरने का प्रयास किया। वह तीन बार कुछ दूरी तक नीचे गए, लेकिन दम घुटने जैसी स्थिति के कारण वापस आना पड़ा। इसके बाद सुरक्षा के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की गई। सिपाही मनोज ने ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ चौथी बार कुएं में उतरने का साहस किया और बच्ची तक पहुंच गए। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने सौम्या को सुरक्षित पकड़ लिया और उसे लेकर ऊपर आए।

तीन घंटे बाद बाहर आई मासूम, परिजनों ने ली राहत की सांस

करीब तीन घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सौम्या को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाल लिया गया। बच्ची के बाहर आते ही मौके पर मौजूद परिजनों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सिपाही मनोज कुमार के साहस और लगातार प्रयास की ग्रामीणों ने जमकर सराहना की।

CHC में जांच के बाद लोहिया अस्पताल रेफर

बच्ची को तत्काल एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। चिकित्साधीक्षक डॉ. विपिन कुमार और डॉ. अमरेश कुमार ने उसकी जांच की। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची की हालत फिलहाल ठीक थी और उसे ऑक्सीजन भी दी गई। बेहतर उपचार एवं निगरानी के लिए उसे लोहिया अस्पताल रेफर किया गया।

रेस्क्यू के दौरान पुलिसकर्मी से भिड़ा ग्रामीण

बच्ची को बचाने के लिए चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान गांव का एक फौजी पुलिसकर्मी से उलझ गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर किसी तरह मामला शांत कराया। इस बीच बचाव अभियान को प्रभावित नहीं होने दिया गया और टीम का पूरा ध्यान बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने पर रहा।

सिपाही मनोज के साहस की हो रही सराहना

इस पूरे घटनाक्रम में सिपाही मनोज कुमार की भूमिका सबसे अहम रही। जहरीली गैस की आशंका और संकरे कुएं में उतरना बेहद जोखिम भरा था, लेकिन उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखा। तीन असफल कोशिशों के बाद ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ चौथी बार कुएं में उतरकर बच्ची को बाहर निकालना पुलिसकर्मी के साहस और तत्परता का उदाहरण बन गया। घटना ने गांवों में खुले और पुराने कुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कुओं के आसपास मजबूत सुरक्षा घेरा या ढक्कन होना जरूरी है, ताकि बच्चों और अन्य लोगों के साथ इस तरह के हादसे दोबारा न हों।

Anuj Singh
Anuj Singh

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