
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद के कंपिल क्षेत्र में शनिवार सुबह गंगा स्नान के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। बदायूं जनपद स्थित अटैना घाट पर गहरे पानी में डूबने से 15 वर्षीय किशोरी शिवा की मौत हो गई। हादसे के बाद घाट पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। परिवार के लोग किशोरी को बचाने के लिए गुहार लगाते रहे, जबकि स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
गर्मी की छुट्टियां बिताने आई थी शिवा
जानकारी के अनुसार, कंपिल स्थित दिगंबर जैन मंदिर के मैनेजर अनुराग त्रिपाठी की बहन रुचि अपने परिवार के साथ भाई के घर गर्मी की छुट्टियां बिताने आई थीं। रुचि के पति योगेश त्रिपाठी इटावा के एक महाविद्यालय में प्राचार्य बताए जा रहे हैं। शनिवार सुबह करीब 10 बजे परिवार के कई सदस्य गंगा स्नान के लिए अटैना घाट पहुंचे थे। स्नान के दौरान अचानक परिवार के पांच सदस्य गहरे पानी की ओर चले गए और डूबने लगे।
स्थानीय लोगों ने दिखाई बहादुरी, चार की बची जान
घाट पर मौजूद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने तुरंत नदी में छलांग लगाकर बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद परिवार के चार सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन किशोरी शिवा तेज धारा और गहरे पानी में लापता हो गई। सूचना मिलते ही स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे और खोजबीन शुरू की। काफी देर बाद शिवा को नदी से बाहर निकाला गया।
अस्पताल पहुंचते ही टूटा परिवार पर दुखों का पहाड़
परिजन बेहोशी की हालत में शिवा को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद किशोरी को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की घोषणा के साथ ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों के अनुसार, शिवा चार बहनों में दूसरे नंबर पर थी और उसका कोई भाई नहीं था। मासूम बेटी की मौत से परिवार गहरे सदमे में है।
पोस्टमार्टम से इनकार, इटावा ले जाया गया शव
घटना के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। पुलिस की औपचारिक प्रक्रिया पूरी किए बिना ही परिवार किशोरी के शव को पैतृक निवास इटावा लेकर रवाना हो गया, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया जाएगा। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
अटैना घाट पर पहले भी हो चुके हैं हादसे
स्थानीय लोगों का कहना है कि अटैना घाट पर गहरे पानी और तेज धारा के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। हाल के महीनों में यहां डूबने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।






