जल परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर डीएम सख्त, जीवीपीआर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति के निर्देश
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154 में 151 ओवरहेड टैंक पूरे करने वाली वीटीएल गजा की तुलना में जीवीपीआर ने 227 में सिर्फ 69 टैंक बनाए, IGRS शिकायतों पर 23% असंतोषजनक फीडबैक मिलने पर एक्सईएन को नोटिस
फर्रुखाबाद में पेयजल और सीवर परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट सभागार फतेहगढ़ में आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम ने जल निगम शहरी और ग्रामीण की योजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन की बिंदुवार समीक्षा की। बैठक में आवास विकास क्षेत्र की 24×7 वाटर सप्लाई पायलट परियोजना, कैंट एरिया वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट, शमसाबाद जलापूर्ति योजना और स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्माणाधीन सीवर व एसटीपी प्रोजेक्ट की स्थिति पर अधिकारियों से जानकारी ली गई। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार बैठक सोमवार को हुई और इसमें संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अधूरे कामों पर पेनाल्टी के निर्देश
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जल निगम शहरी के अधिशासी अभियंता को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन कार्यदायी संस्थाओं ने निर्धारित समय-सीमा में परियोजनाएं पूरी नहीं की हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार पेनाल्टी की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन डालने के लिए खोदे गए गड्ढों और सड़कों को कार्य पूरा होते ही तत्काल ठीक कराया जाए, ताकि आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो। डीएम ने परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयबद्धता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
हर घर जल योजना में सामने आई बड़ी लापरवाही
बैठक में जल निगम ग्रामीण के अंतर्गत संचालित “हर घर जल” परियोजना की भी समीक्षा की गई। इस दौरान जनपद में कार्य कर रहीं वीटीएल गजा और जीवीपीआर कंपनी के कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण ने बताया कि वीटीएल गजा कंपनी ने 154 ओवरहेड टैंकों में से 151 का निर्माण पूरा कर लिया है। वहीं, जीवीपीआर कंपनी 227 ओवरहेड टैंकों के सापेक्ष केवल 69 टैंकों का निर्माण ही पूरा कर सकी है। इस अंतर को डीएम ने गंभीर लापरवाही माना।
जीवीपीआर कंपनी पर ब्लैकलिस्टिंग की तलवार
जीवीपीआर कंपनी की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के लिए शासन को संस्तुति पत्र भेजा जाए। डीएम ने यह भी कहा कि जिन परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है, उनमें नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति शुरू कराई जाए, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे आमजन तक पहुंच सके।
IGRS शिकायतों पर भी सख्ती
बैठक में आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की भी समीक्षा की गई। जल निगम ग्रामीण से संबंधित शिकायतों में 23 प्रतिशत असंतोषजनक फीडबैक मिलने पर जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और शिकायतों का समाधान धरातल पर दिखना चाहिए।
अधिकारियों को जवाबदेही का संदेश
डॉ. अंकुर लाठर ने बैठक में साफ किया कि विकास योजनाओं में देरी, गुणवत्ता से समझौता और जनशिकायतों की अनदेखी पर कार्रवाई तय है। इससे पहले भी जिलाधिकारी ने लापरवाही पर सख्त रुख दिखाते हुए जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता का वेतन रोकने जैसे निर्देश दिए थे, जिससे प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही का संदेश गया है।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए सहित जल निगम शहरी और ग्रामीण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित कार्यों की नियमित निगरानी करें और समय-सीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा कराएं।






