
संवाद 24 नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शनिवार से नई दरें लागू हो गई हैं, जिसके बाद वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
मई में तीसरी बार बढ़ोतरी
मई महीने में यह तीसरी बढ़ोतरी है और कुल मिलाकर ईंधन करीब 5 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ते दामों ने आम आदमी के मासिक बजट पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।
महंगाई पर पड़ सकता है असर
लगातार बढ़ते दामों का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई, खेती-किसानी, सब्जी, फल और रोजमर्रा की चीजों की लागत पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी आगे चलकर महंगाई को और हवा दे सकती है। अगर डीजल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में कई वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव
तेल कंपनियों पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का दबाव बताया जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर घरेलू कीमतों पर भी असर पड़ता है।
तेल कंपनियां तय करती हैं कीमतें
सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम देश के ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर कीमतें तय करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार, टैक्स और अन्य खर्चों को देखते हुए रोजाना कीमतों में बदलाव किया जाता है।
चार साल बाद दिखी बड़ी तेजी
इससे पहले 15 मई को चार साल बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। उसके बाद 19 मई को फिर करीब 90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए और अब शनिवार को तीसरी बार कीमतें बढ़ीं।
कई शहरों में 100 रुपये के करीब पेट्रोल
दिल्ली के अलावा कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर पहुंचने लगा है। अलग-अलग राज्यों में वैट और स्थानीय करों के कारण कीमतों में अंतर रहता है।
किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की चिंता
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए खास चिंता का विषय है। ट्रैक्टर, सिंचाई पंप, ट्रक और मालवाहक वाहनों में डीजल का बड़ा इस्तेमाल होता है।
बाजार में बढ़ सकती है लागत
अगर डीजल महंगा होता है, तो माल ढुलाई की लागत बढ़ती है। इसका असर सब्जियों, फलों, अनाज, दूध और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
कंपनियों पर नुकसान का दबाव
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और नुकसान की भरपाई के लिए कीमतों में चरणबद्ध बदलाव किए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आने वाले दिनों पर सबकी नजर
फिलहाल आम लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें स्थिर होती हैं या फिर और बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो पेट्रोल-डीजल के दामों पर दबाव जारी रह सकता है।






