NEET को 100% एरर-फ्री बनाने पर जोर, मातृभाषा में शिक्षा को NEP की सबसे बड़ी ताकत बता रहे प्रधान

संवाद 24 नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि देश की परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद, पारदर्शी और पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना सरकार की प्राथमिकता है। NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में सुधारों पर तेजी से काम हो रहा है और लक्ष्य है कि आने वाले समय में परीक्षाएं तनावमुक्त और 100 प्रतिशत एरर-फ्री हों।

छात्रों के भविष्य से जुड़ा है परीक्षा सुधार
प्रधान ने कहा कि परीक्षाओं की विश्वसनीयता छात्रों के भविष्य से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं हो सकती। हाल के विवादों के बाद NTA की व्यवस्था, तकनीकी निगरानी, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रिया को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

NEET में बदलाव की तैयारी तेज
NEET-UG विवाद के बाद सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की बात कही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, री-एग्जाम 21 जून को कराया जाएगा और अगले वर्ष से NEET को कंप्यूटर आधारित परीक्षा मोड में ले जाने की तैयारी है, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।

मातृभाषा में पढ़ाई को बताया जरूरी
शिक्षा मंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए मातृभाषा में पढ़ाई को बच्चों की समझ और आत्मविश्वास के लिए बेहद जरूरी बताया। उनका कहना है कि शुरुआती शिक्षा यदि बच्चे की अपनी भाषा में हो, तो वह विषय को रटने के बजाय बेहतर तरीके से समझ पाता है। NEP में इसी सोच के तहत मातृभाषा और भारतीय भाषाओं को विशेष महत्व दिया गया है।

स्थानीय भाषा से मजबूत होगी सीखने की क्षमता
प्रधान ने यह भी कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को स्थानीय जड़ों से जोड़ना जरूरी है। मातृभाषा में शिक्षा केवल भाषा का मुद्दा नहीं, बल्कि सीखने की गुणवत्ता, सांस्कृतिक जुड़ाव और बच्चों की रचनात्मकता से जुड़ा विषय है। सरकार का प्रयास है कि भारतीय भाषाओं में पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराकर अधिक से अधिक छात्रों को इसका लाभ दिया जाए।

स्कूल से उच्च शिक्षा तक भारतीय भाषाओं पर फोकस
NEP के तहत स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कई पहल की जा रही हैं। शुरुआती कक्षाओं में मातृभाषा आधारित शिक्षा से बच्चों की बुनियादी समझ मजबूत करने पर जोर है, जबकि उच्च शिक्षा में भी भारतीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

विपक्ष ने परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
NEET विवाद के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर जवाबदेही की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को घेरा था। ऐसे में सरकार के लिए परीक्षा सुधारों को जमीन पर लागू करना अब बड़ी चुनौती बन गया है।

छात्रों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती
कुल मिलाकर, शिक्षा मंत्रालय अब दो मोर्चों पर काम कर रहा है। एक तरफ NEET और अन्य प्रवेश परीक्षाओं को सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ नई शिक्षा नीति के जरिए मातृभाषा आधारित शिक्षा को मजबूत करने का लक्ष्य है। आने वाले समय में इन सुधारों की सफलता इस बात से तय होगी कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर कितना मजबूत हो पाता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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