अब सड़कों नहीं, नदियों पर दौड़ेगी मेट्रो! अयोध्या-वाराणसी समेत 18 शहरों के लिए केंद्र का बड़ा प्लान
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संवाद 24 नई दिल्ली। देश में यातायात व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार अब देश के 18 शहरों में वॉटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नदियों और जलमार्गों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों कम करने में मदद मिलेगी।
पहले चरण में अयोध्या और वाराणसी को प्राथमिकता
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि पहले चरण में श्रीनगर, पटना, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में वॉटर मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना बनाई गई है। इसके बाद दूसरे चरण में असम के तेजपुर और डिब्रूगढ़ जैसे शहरों को जोड़ा जाएगा।
कोच्चि मॉडल की सफलता से मिली प्रेरणा
सरकार इस परियोजना को Kochi Water Metro की सफलता के आधार पर आगे बढ़ा रही है। कोच्चि में शुरू हुई वॉटर मेट्रो सेवा ने कम समय में लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल की है। इसी मॉडल को अब देश के अन्य शहरों में लागू करने की तैयारी की जा रही है।
ड्राफ्ट नेशनल वॉटर मेट्रो पॉलिसी तैयार
केंद्र सरकार ने ‘ड्राफ्ट नेशनल वॉटर मेट्रो पॉलिसी 2026’ को अंतर-मंत्रालयी सलाह के लिए जारी कर दिया है। इस नीति के जरिए पूरे देश में जल-आधारित शहरी परिवहन के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य जलमार्गों को सुरक्षित, आधुनिक और नियमित सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में बदलना है।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड फेरी होंगी इस्तेमाल
इस परियोजना की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड फेरी का उपयोग किया जाएगा। इससे ईंधन की खपत कम होगी और पर्यावरण को नुकसान भी कम पहुंचेगा। सरकार का दावा है कि वॉटर मेट्रो पारंपरिक मेट्रो परियोजनाओं की तुलना में काफी कम खर्चीली होगी क्योंकि इसमें पहले से मौजूद जलमार्गों का उपयोग किया जाएगा।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक शहरों में वॉटर मेट्रो शुरू होने से पर्यटन को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालु अब सड़क जाम से बचते हुए नदी मार्ग से प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थलों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे स्थानीय कारोबार और पर्यटन उद्योग को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
18 शहरों में हो चुका है सर्वे
सरकार की ओर से बताया गया है कि 18 शहरों में प्रारंभिक सर्वे और फीजिबिलिटी स्टडी का काम लगभग पूरा हो चुका है। अधिकांश शहरों की ड्राफ्ट रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। इस अध्ययन में यात्रियों की संख्या, लागत, जलमार्गों की स्थिति और दूसरे परिवहन नेटवर्क से कनेक्टिविटी जैसे पहलुओं का आकलन किया गया है।
ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना सफल होती है तो बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। खासकर नदी किनारे बसे शहरों में यह सार्वजनिक परिवहन का नया और तेज विकल्प बन सकता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में जल परिवहन को शहरी जीवन का अहम हिस्सा बनाना है।






