लाखों के सौदे, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़! NEET पेपर लीक जांच में अब अभिभावकों पर CBI का शिकंजा
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संवाद 24 नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच अब और गहराती जा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने महाराष्ट्र के नांदेड़ और लातूर समेत कई शहरों में छापेमारी और पूछताछ तेज कर दी है। इस बार जांच का दायरा सिर्फ छात्रों या कोचिंग संचालकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिभावकों तक भी पहुंच गया है। जांच एजेंसियों को शक है कि कुछ परिवारों ने मोटी रकम देकर लीक प्रश्नपत्र हासिल किए थे ताकि उनके बच्चे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पा सकें।
नांदेड़ में परिवारों से घंटों पूछताछ
सीबीआई की टीम ने हाल ही में नांदेड़ में एक कारोबारी परिवार से लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसी को संदेह है कि परिवार ने अपनी बेटी को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया था। अधिकारियों के अनुसार, छात्रा के मॉक टेस्ट अंकों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा। इसके बाद परिवार के मोबाइल रिकॉर्ड, चैट और आर्थिक लेनदेन की पड़ताल शुरू की गई।
लातूर के कोचिंग नेटवर्क पर बढ़ा शक
महाराष्ट्र का लातूर शहर लंबे समय से मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग का बड़ा केंद्र माना जाता है। अब इसी शहर का नाम NEET पेपर लीक मामले में प्रमुखता से सामने आ रहा है। सीबीआई ने यहां कई कोचिंग संस्थानों के दस्तावेज, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या परीक्षा से पहले कुछ “गेस पेपर” के नाम पर असली प्रश्न छात्रों तक पहुंचाए गए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ कोचिंग संस्थानों द्वारा दिए गए मॉडल पेपर और वास्तविक NEET प्रश्नपत्र में काफी समानताएं थीं। इसके बाद एजेंसियों ने कई शिक्षकों और कोचिंग संचालकों से पूछताछ शुरू की है।
सोशल मीडिया और टेलीग्राम बना बड़ा माध्यम
सीबीआई को शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि लीक प्रश्नपत्रों को फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम चैनलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियां अब डिलीट किए गए चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल खंगाल रही हैं। कई संदिग्धों के मोबाइल फोन और लैपटॉप फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग विषयों के लिए अलग नेटवर्क काम कर रहे थे। कुछ आरोपी केमिस्ट्री प्रश्नों के लीक से जुड़े बताए जा रहे हैं, जबकि अन्य बायोलॉजी पेपर तक पहुंच बनाने में सक्रिय थे। इस पूरे नेटवर्क में बिचौलियों, शिक्षकों और कुछ तकनीकी जानकार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
लाखों रुपये में बिके प्रश्नपत्र
जांच एजेंसियों के मुताबिक, NEET पेपर लीक का यह रैकेट करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार में बदल चुका था। कुछ मामलों में छात्रों और उनके परिवारों से 5 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक वसूले जाने की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि कई अभिभावक अपने बच्चों का मेडिकल कॉलेज में चयन सुनिश्चित करने के लिए इस नेटवर्क के संपर्क में आए। सीबीआई को शक है कि कुछ परिवारों ने परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र हासिल कर लिए थे और छात्रों को संभावित सवाल याद करवाए गए। इसी आधार पर अब कई छात्रों के प्रदर्शन, उनके पुराने रिकॉर्ड और परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों की भी जांच हो रही है।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
अब तक की जांच में महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और बिहार समेत कई राज्यों के कनेक्शन सामने आ चुके हैं। सीबीआई ने अलग-अलग राज्यों से कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कुछ शिक्षक, कोचिंग से जुड़े लोग और कथित बिचौलिए शामिल हैं। एजेंसी को शक है कि यह संगठित नेटवर्क लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं को निशाना बना रहा था।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
देशभर में इस मामले ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। मेहनत से परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। कई छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
डिजिटल निगरानी और सख्त सुरक्षा की तैयारी
पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों की चर्चा भी तेज हो गई है। केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसियां अब डिजिटल सुरक्षा, एन्क्रिप्टेड पेपर सिस्टम और कंप्यूटर आधारित परीक्षा व्यवस्था पर विचार कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में NEET समेत कई बड़ी परीक्षाओं के प्रारूप में बदलाव किए जा सकते हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।






