तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा खेल! विजय ने AIADMK में कैसे लगाई सेंध, कौन हैं 25 विधायकों को साथ लाने वाले एसपी वेलुमणि

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संवाद 24 तमिलनाडु। राजनीति में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री C Joseph Vijay ने सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर ऐसा राजनीतिक दांव चला दिया, जिसने राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी AIADMK को संकट में डाल दिया है। विधानसभा में हुए शक्ति परीक्षण के दौरान AIADMK के कई विधायक सरकार के समर्थन में दिखाई दिए, जिसके बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया। सबसे ज्यादा चर्चा उस चेहरे की हो रही है जिसने कथित तौर पर 25 से अधिक विधायकों को पार्टी लाइन से अलग कर विजय के समर्थन में खड़ा कर दिया। यह नेता हैं AIADMK के वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि।

विश्वास मत में विजय ने दिखाई ताकत
तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय को विश्वास मत हासिल करने के लिए बहुमत साबित करना था। इस दौरान उनकी सरकार को 144 विधायकों का समर्थन मिला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह संख्या केवल गठबंधन के भरोसे संभव नहीं थी, बल्कि विपक्षी दलों के भीतर टूट और असंतोष ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई। AIADMK के कुछ विधायकों का सरकार के पक्ष में जाना सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।

कौन हैं एसपी वेलुमणि?
एसपी वेलुमणि तमिलनाडु की राजनीति का बड़ा नाम माने जाते हैं। वे AIADMK के प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं और पार्टी संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ बताई जाती है। पश्चिम तमिलनाडु में उनका खास राजनीतिक प्रभाव है। पार्टी के अंदर लंबे समय से चल रही खींचतान और नेतृत्व को लेकर असंतोष के बीच वेलुमणि का रुख अचानक बदलना AIADMK के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने ही असंतुष्ट विधायकों को एकजुट कर विजय सरकार के समर्थन में खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई।

AIADMK में क्यों बढ़ा असंतोष?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जयललिता के निधन के बाद से AIADMK लगातार अंदरूनी संघर्ष से जूझ रही है। पार्टी के भीतर कई गुट बन चुके हैं और नेतृत्व को लेकर मतभेद लगातार सामने आते रहे हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे असंतोष और गहरा गया। ऐसे माहौल में विजय की नई राजनीतिक शैली और उनकी बढ़ती लोकप्रियता ने कई नेताओं को अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती दिखाई।

विजय की रणनीति ने बदला खेल
मुख्यमंत्री विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को पारंपरिक राजनीति से अलग दिखाने की कोशिश की थी। सत्ता में आने के बाद भी उन्होंने सहयोगी दलों और विपक्षी नेताओं के साथ संवाद बनाए रखा। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत उन्होंने AIADMK के नाराज नेताओं से संपर्क साधा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार के समर्थन के बदले कुछ नेताओं को भविष्य में सत्ता और संगठन में अहम भूमिका मिलने के संकेत दिए गए हैं। हालांकि इसको लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय तक DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन अभिनेता विजय की पार्टी TVK के सत्ता में आने के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे राज्य की राजनीति में नए युग की शुरुआत मान रहे हैं। पहली बार ऐसा लग रहा है कि पारंपरिक दलों की पकड़ कमजोर हो रही है और नई राजनीतिक ताकतें तेजी से उभर रही हैं।

AIADMK के सामने अस्तित्व का संकट
विधानसभा में हुए घटनाक्रम के बाद AIADMK नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के भीतर बगावत खुलकर सामने आने लगी है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पार्टी के कई विधायक अब खुलकर अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं। यदि ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में AIADMK की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक भी इस राजनीतिक संकट से प्रभावित हो सकता है।

क्या आगे और बढ़ेगा सियासी संकट?
तमिलनाडु की राजनीति में अभी और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। विजय सरकार फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, लेकिन विपक्ष के भीतर जारी संघर्ष आने वाले दिनों में नई राजनीतिक चालों को जन्म दे सकता है। वहीं AIADMK के लिए यह समय अपनी पार्टी को टूटने से बचाने की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एसपी वेलुमणि और उनके समर्थक विधायक आगे भी विजय सरकार के साथ बने रहेंगे या राजनीति में फिर कोई बड़ा मोड़ आएगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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