
संवाद 24 उत्तराखंड। मौसम विभाग की चेतावनियों ने राज्य सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून द्वारा जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, राज्य के 13 में से 12 जिलों के लिए फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) का हाई अलर्ट जारी किया गया है। अगले 24 से 48 घंटे उत्तराखंड के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं, क्योंकि इस दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
इन जिलों पर मंडरा रहा खतरा
मौसम विभाग ने जिन जिलों के लिए फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी किया है, उनमें उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल और उधम सिंह नगर शामिल हैं। केवल हरिद्वार जिले को इस विशिष्ट फ्लैश फ्लड अलर्ट से बाहर रखा गया है, हालांकि वहां भी बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
प्रशासन अलर्ट पर, एसओपी जारी
इस गंभीर चेतावनी के बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत संज्ञान लेते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और सभी जिलाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। शासन द्वारा एक विशेष एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की गई है, जिसके तहत:
1- सभी नदी तटवर्ती और संवेदनशील इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जाए।
2- जरूरत पड़ने पर नदी किनारे बसी बस्तियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।
3-एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमों को हर जिले में रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया जाए।
4- बिजली, पानी और संचार व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए आपातकालीन प्लान तैयार रखे जाएं।
मानसून का रौद्र रूप और केदारनाथ पुनर्निर्माण पर असर
उत्तराखंड में मानसून पहले से ही सक्रिय है और कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। इस साल मानसून की बारिश ने पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया है। भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे कई राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कें बंद हैं। सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच लगातार हो रहे भूस्खलन और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण केदारनाथ यात्रा को भी कई बार रोकना पड़ा है। इस नए फ्लैश फ्लड अलर्ट ने केदारनाथ पैदल मार्ग के पुनर्निर्माण कार्यों को भी ठप कर दिया है, जिससे यात्रा के सुचारू संचालन पर फिर से सवालिया निशान लग गया है।
भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने का डर
भारी बारिश की चेतावनी के साथ सबसे बड़ा खतरा भूस्खलन और सड़कों के टूटने का है। मानसून सीजन में उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति इसे इन आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील बना देती है। फ्लैश फ्लड के अलर्ट के कारण पहाड़ों से मलबा आने और नदी-नालों के उफान पर रहने की पूरी संभावना है। इससे न केवल यातायात बाधित होगा, बल्कि दूरदराज के गांवों का संपर्क मुख्यधारा से कटने का खतरा भी बढ़ गया है।






