
संवाद 24 नई दिल्ली। थोड़ी सी थकान, सिरदर्द या हल्का बुखार होते ही खुद डॉक्टर बनकर पेनकिलर खा लेना या मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीदकर निगल लेना अब जानलेवा साबित हो सकता है। देश की सर्वोच्च औषधि नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने पेनकिलर और एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध तथा अनियंत्रित उपयोग को लेकर देशव्यापी गंभीर चेतावनी जारी की है। नियामक ने साफ किया है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के इन दवाओं का लगातार सेवन सीधे तौर पर क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD), किडनी फेलियर और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसे जानलेवा संकट को दावत दे रहा है।
किडनी पर पड़ता है सीधा प्रहार, शरीर में बेअसर हो रही हैं जीवनरक्षक दवाएं
भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी द्वारा हस्ताक्षरित सर्कुलर में रेखांकित किया गया है कि नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) यानी आम दर्द निवारक दवाएं शरीर में रक्त प्रवाह को प्रभावित करती हैं। लंबे समय तक या बार-बार इनका मनमाना सेवन करने से किडनी की रक्त और अपशिष्ट छानने की क्षमता गंभीर रूप से घट जाती है। विशेष रूप से ऐसे लोग जो पहले से निर्जलीकरण (Dehydration), हृदय रोग या गुर्दे से जुड़ी किसी हल्की समस्या से ग्रसित हैं, उनके लिए यह आदत अंग विफलता (Organ Failure) का मुख्य कारण बन रही है।
दूसरी ओर, एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग वैश्विक स्वास्थ्य के लिए “सुपरबग्स” का सबसे बड़ा जनक बन चुका है। आम मौसमी वायरल बुखार, सर्दी या जुकाम जैसी बीमारियों में जहां एंटीबायोटिक्स की कोई भूमिका नहीं होती, लोग धड़ल्ले से इन्हें खा लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप शरीर के भीतर मौजूद बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (AMR) विकसित कर लेते हैं, जिससे भविष्य में सामान्य संक्रमण होने पर भी शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स पूरी तरह बेअसर साबित होने लगती हैं।
कानूनन बिना पर्चे के बिक्री पर पाबंदी, नियमों के उल्लंघन पर नकेल
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत इन दवाओं की बिक्री पूरी तरह नियंत्रित है। नियामक ने याद दिलाया है कि अधिकांश एनएसएआईडी दवाएं ‘शेड्यूल एच’ (Schedule H) की श्रेणी में आती हैं, जबकि अधिकतर एंटीबायोटिक्स ‘शेड्यूल एच1’ (Schedule H1) के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं। कानूनी रूप से इन दोनों श्रेणियों की किसी भी दवा को पंजीकृत डॉक्टर (RMP) के मूल पर्चे (Prescription) के बिना काउंटर पर बेचना गैरकानूनी है। शेड्यूल एच1 दवाओं के रैपर पर साफ चेतावनी अंकित होती है कि बिना डॉक्टर की देखरेख के इनका सेवन बेहद जोखिम भरा हो सकता है। इसके बावजूद बाजारों में ‘ओवर द काउंटर’ (OTC) बिक्री की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए केंद्र ने सभी दवा दुकानों और थोक विक्रेताओं को सख्त अनुपालन का आदेश दिया है।
डॉक्टरों, अस्पतालों और दवा विक्रेताओं के लिए कड़े दिशानिर्देश
सीडीएससीओ ने चिकित्सा व्यवस्था के सभी हितधारकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं:
चिकित्सकों के लिए: डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे पेनकिलर और एंटीबायोटिक केवल अनिवार्य चिकित्सीय आवश्यकता (Clinical Indication) होने पर ही लिखें। प्रिस्क्रिप्शन लिखते समय मरीज की उम्र, पुरानी बीमारियों, साथ में चल रही अन्य दवाओं और किडनी जोखिम का पूरा मूल्यांकन किया जाना चाहिए। खासकर पेनकिलर को न्यूनतम प्रभावी खुराक (Lowest Dose) और न्यूनतम अवधि के लिए ही लिखा जाए।
फार्मासिस्ट और रिटेलर्स के लिए: केमिस्ट किसी भी हाल में खुद से दवाएं सुझाने (Self-Medication) को बढ़ावा न दें। बिना वैध पर्चे के शेड्यूल एच और एच1 की दवाओं की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए और रिकॉर्ड रजिस्टर सुरक्षित रखे जाएं।
अस्पतालों और राज्यों के लिए: सभी स्वास्थ्य संस्थानों को एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप प्रोग्राम और ऑडिट व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी गई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को निर्देश मिला है कि वे स्थानीय स्तर पर निरीक्षण बढ़ाएं और जनता में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं।
आम नागरिकों को सीधी सलाह: बची हुई दवाएं दोबारा न लें
नियामक ने आम जनता से अपील की है कि शरीर में दर्द या बुखार के दोबारा उभरने पर बार-बार पेनकिलर लेने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करवाएं। किसी पूर्व बीमारी के इलाज से बची हुई पुरानी गोलियों का दोबारा इस्तेमाल न करें और न ही अपनी दवाएं परिवार के अन्य सदस्यों के साथ साझा करें। समय रहते सतर्कता न बरती गई, तो पल भर का आराम भविष्य में जिंदगी भर डायलिसिस या स्थायी विकलांगता का कारण बन सकता है।






