
संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े अपीलों के ढेर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने कड़ा संज्ञान लिया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने स्पष्ट किया है कि अपीलीय ट्रिब्यूनलों को अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लानी होगी और मामलों का पारदर्शी व त्वरित तरीके से निपटारा करना होगा। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग (Election Commission of India) से ट्रिब्यूनलों में लंबित और अब तक निपटाए गए अपीलों के आंकड़े भी तलब किए हैं।
34 लाख से अधिक आवेदनों का मामला और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मतदाता सूची से नाम काटे जाने के बाद लाखों लोगों ने अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। हालांकि, ट्रिब्यूनल द्वारा प्रक्रिया में ढिलाई बरतने के कारण बड़ी संख्या में लोगों के आवेदन अधर में लटके हुए हैं, जिससे उन्हें कई बुनियादी प्रशासनिक सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि अदालत सीधे तौर पर ट्रिब्यूनल के काम के लिए कोई समय-सीमा (Timeline) तय नहीं कर सकती, लेकिन वह इनके कामकाज की निगरानी जरूर करेगी। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनलों का गठन अदालती आदेशों के तहत ही हुआ है और यदि मामलों के निपटारे की गति असंतोषजनक पाई जाती है, तो पूरी संरचना (Architecture) में सुधार पर विचार किया जाएगा।
चुनाव आयोग से मांगा पूरा ब्यौरा
सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग के वकील को यह निर्देश दिया है कि वे अपीलीय ट्रिब्यूनलों द्वारा अब तक तय किए गए मुकदमों की सटीक संख्या और लंबित आवेदनों का विस्तृत ब्यौरा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। अदालत ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था अपनाकर प्रक्रिया को गति दी जा सकती है।
अगली सुनवाई अगस्त में तय
पीठ ने इस याचिका को इसी मुद्दे से जुड़ी अन्य समान याचिकाओं के साथ टैग करते हुए अगली सुनवाई 25 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की है। सर्वोच्च न्यायालय के इस रुख से उन लाखों आवेदकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है, जिनके नाम तकनीकी या अन्य कारणों से मतदाता सूची से हटा दिए गए थे और वे न्याय के लिए ट्रिब्यूनल के चक्कर काट रहे थे।






