कमाने गए थे रोटी, मिली मौत! इंदौर पटाखा फैक्ट्री हादसे में अररिया के एक और मजदूर की गई जान

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संवाद 24 मध्य प्रदेश। देवास जिले में स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी ने बिहार के अररिया जिले में मातम फैला दिया है। इलाज के दौरान अररिया निवासी एक और मजदूर की मौत हो जाने से इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है, जबकि गांवों में सन्नाटा पसरा है। हादसे में घायल कई मजदूर अब भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

इलाज के दौरान टूटी सांसें
अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड निवासी अभिषेक कुमार पासवान गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें पहले देवास और बाद में इंदौर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक अभिषेक का शरीर बुरी तरह जल चुका था और हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। उनके निधन की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का कहना है कि अभिषेक रोजी-रोटी कमाने के लिए मध्य प्रदेश गए थे ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि मेहनत की तलाश उन्हें मौत के मुंह तक पहुंचा देगी। गांव के लोगों ने बताया कि अभिषेक काफी मेहनती और शांत स्वभाव के युवक थे। उनकी मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।

धमाके से दहल उठा था पूरा इलाका
बताया जा रहा है कि देवास जिले के टोंक कलां इलाके में स्थित पटाखा फैक्ट्री में अचानक तेज धमाका हुआ था। धमाके के बाद फैक्ट्री में भीषण आग लग गई और देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के इलाकों में कंपन महसूस किया गया। कई मजदूर आग और धुएं के बीच फंस गए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, धमाके के बाद फैक्ट्री के टीन शेड और सामान हवा में उड़ते दिखाई दिए। कुछ मजदूरों के शरीर बुरी तरह झुलस गए जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।

बिहार और यूपी के मजदूर थे फैक्ट्री में कामगार
जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में बड़ी संख्या में बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूर काम कर रहे थे। इनमें अररिया जिले के कई युवक भी शामिल थे। गांव वालों के मुताबिक आर्थिक तंगी के कारण बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं और जोखिम भरे कारखानों में कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर हो जाते हैं। हादसे के बाद अररिया के कई परिवारों का अपने परिजनों से संपर्क टूट गया था, जिसके बाद गांवों में बेचैनी फैल गई। कई परिवार लगातार अस्पतालों और प्रशासन से जानकारी जुटाने में लगे रहे। कुछ घायल मजदूर अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में जरूरत से ज्यादा विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज गर्मी और रसायनों के गलत मिश्रण के कारण धमाका हुआ हो सकता है। प्रशासन ने फैक्ट्री मालिक और प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। फैक्ट्री मालिक पर गैर इरादतन हत्या समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए हैं।

प्रशासन की कार्रवाई तेज
हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की कई पटाखा फैक्ट्रियों की जांच शुरू कर दी है। इंदौर और देवास क्षेत्र में कई फैक्ट्रियों को सील किया गया है और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, जबकि घायलों के मुफ्त इलाज का भरोसा दिया गया है। हालांकि पीड़ित परिवारों का कहना है कि सिर्फ मुआवजा काफी नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।

गांव में पसरा मातम
अररिया के भवानीपुर और आसपास के गांवों में इस हादसे के बाद गहरा शोक है। मृतकों के घरों पर लोगों का तांता लगा हुआ है। परिवार के सदस्य बेसुध हालत में हैं और गांव के लोग लगातार उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिर गरीब मजदूरों की जिंदगी इतनी सस्ती क्यों हो गई है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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