रूस-अमेरिका के बीच संतुलन साध रहा चीन! ट्रंप के बाद अब पुतिन की बीजिंग यात्रा से बढ़ी वैश्विक हलचल
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संवाद 24 नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाई-प्रोफाइल चीन यात्रा के कुछ ही दिनों बाद अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बीजिंग पहुंचने वाले हैं। इस लगातार हो रही कूटनीतिक गतिविधियों ने दुनिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। माना जा रहा है कि चीन अब एक साथ अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कारण पुतिन की यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले समय की वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाली बड़ी घटना मानी जा रही है।
रूस-चीन की दोस्ती और मजबूत होने के संकेत
रूस और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तब चीन ने रूस के साथ व्यापार और ऊर्जा सहयोग बढ़ाकर मॉस्को को बड़ी राहत दी। अब दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को लेकर नए समझौतों की संभावना जताई जा रही है। खासतौर पर ‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ गैस पाइपलाइन परियोजना को लेकर दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई हैं।
क्रेमलिन ने बताया ऐतिहासिक दौरा
क्रेमलिन की ओर से साफ कहा गया है कि यह दौरा दोनों देशों की “विशेष रणनीतिक साझेदारी” को और मजबूत करेगा। पुतिन ने यात्रा से पहले जारी अपने संदेश में कहा कि रूस और चीन राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसे का स्तर अब “अभूतपूर्व” हो चुका है।
ट्रंप के बाद पुतिन की यात्रा क्यों खास?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के तुरंत बाद पुतिन का बीजिंग पहुंचना एक बड़ा कूटनीतिक संकेत है। चीन यह दिखाना चाहता है कि वह केवल अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस के साथ भी उसकी दोस्ती उतनी ही मजबूत बनी हुई है। ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में व्यापार, ताइवान और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर चर्चा हुई थी, लेकिन उसके बाद पुतिन का दौरा यह संकेत देता है कि बीजिंग वैश्विक शक्ति संतुलन में खुद को सबसे प्रभावशाली केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है।
यूक्रेन युद्ध और सुरक्षा मुद्दों पर होगी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, शी जिनपिंग और पुतिन की बातचीत में यूक्रेन युद्ध, वैश्विक सुरक्षा, परमाणु हथियार नियंत्रण और एशिया की बदलती रणनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेन-देन को डॉलर से हटाकर अपनी-अपनी मुद्रा में बढ़ाने पर भी फोकस रहेगा। चीन पहले ही रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है।
चीनी जहाज पर हमले से बढ़ी चिंता
इस बीच, पुतिन की यात्रा से ठीक पहले यूक्रेन में एक चीनी मालवाहक जहाज पर रूसी ड्रोन हमले की खबर ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इससे रूस और चीन के रिश्तों को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं। यूक्रेन ने दावा किया कि रूस को जहाज की पहचान पता होनी चाहिए थी।
दुनिया की नजर बीजिंग बैठक पर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन इस समय बेहद संतुलित रणनीति अपना रहा है। एक तरफ वह अमेरिका के साथ तनाव कम करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ रूस के साथ अपनी साझेदारी को भी कमजोर नहीं होने देना चाहता। यही कारण है कि बीजिंग में हो रही ये लगातार बड़ी मुलाकातें पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
क्या बदलेगी दुनिया की राजनीति?
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की यह मुलाकात केवल दोस्ती का प्रदर्शन बनकर रह जाएगी या फिर इससे वैश्विक राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देश इस बैठक के नतीजों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।






