26 अक्टूबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 26 अक्टूबर 2026, सोमवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – हेमंत

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन पूर्णिमांत (प्रातः 09:42 के बाद कार्तिक मास प्रारंभ), आश्विन अमांत
पक्ष – शुक्ल (प्रातः 09:42 के बाद कृष्ण पक्ष)
तिथि – पूर्णिमा प्रातः 09:42 AM तक, तत्पश्चात् प्रतिपदा
वार – सोमवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – अश्विनी सायं 05:41 PM तक, तत्पश्चात् भरणी
योग – वज्र दोपहर 02:16 PM तक, तत्पश्चात् सिद्धि
करण – बव प्रातः 09:42 AM तक, तत्पश्चात् बालव रात्रि 08:25 PM तक, तत्पश्चात् कौलव

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:17 AM
सूर्यास्त – 05:33 PM
चन्द्रोदय – 05:26 PM
चन्द्रास्त – चन्द्रास्त नहीं
चन्द्र राशि – मेष
अभिजित मुहूर्त – 11:33 AM से 12:18 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:48 PM से 02:33 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 07:42 AM से 09:05 AM तक
यमगण्ड – 10:31 AM से 11:55 AM तक
गुलिक काल – 01:20 PM से 02:44 PM तक
दुर्मुहूर्त – 12:18 PM से 01:03 PM तक एवं 02:33 PM से 03:18 PM तक
कंटक – 08:32 AM से 09:17 AM तक

शुभ चौघड़िया
अमृत – 06:17 AM से 07:42 AM तक
शुभ – 09:05 AM से 10:31 AM तक
चर – 01:20 PM से 02:44 PM तक
लाभ – 02:44 PM से 04:08 PM तक
अमृत – 04:08 PM से 05:33 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पूर्व
यात्रा उपाय – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दर्पण देखकर अथवा दूध या मिश्री का सेवन करके प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
कार्तिक मास (कार्तिक स्नान व यम नियम) प्रारंभ एवं आश्विन पूर्णिमा स्नान-दान
प्रातः 09:42 तक आश्विन पूर्णिमा तिथि रहने से प्रातःकालीन पवित्र नदियों में स्नान, सत्यनारायण पूजन और दान का विशेष महत्व रहेगा। इसके उपरांत कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होने के साथ ही सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र ‘कार्तिक मास’ का स्नान-नियम, दीपदान और तुलसी पूजन का अनुष्ठान आरंभ हो जाएगा।

अश्विनी व भरणी नक्षत्र प्रभाव
सायं 05:41 तक अश्विनी नक्षत्र रहेगा, जिसके स्वामी केतु देव और अधिपति ‘अश्विनीकुमार’ (देवताओं के वैद्य) हैं। यह एक क्षिप्र (तेज) नक्षत्र है, जो नवीन चिकित्सा, व्यापारिक सौदों और त्वरित निर्णयों के लिए शुभ है। सायं के बाद शुक्र का उग्र नक्षत्र भरणी प्रारंभ होगा।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन-रात मंगल की राशि मेष में संचरण करेंगे। सोमवार के दिन मेष राशि के चन्द्रमा का गोचर साहस, स्फूर्ति और मानसिक दृढ़ता प्रदान करेगा। दोपहर 02:16 के बाद सिद्धि योग प्रारंभ होगा, जो संकल्पित कार्यों में सफलता और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में विशेष सिद्धि दिलाएगा।

आज का राशिफल – 26 अक्टूबर 2026 सोमवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं। आत्मविश्वास और ऊर्जा का संचार रहेगा। सोचे हुए कार्य समय पर पूरे होंगे और मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध व गंगाजल अर्पित करें।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक और सामाजिक कार्यों में धन व्यय होगा। दूर की यात्राएं संभव हैं। मानसिक शांति के लिए ध्यान करें और खर्चों पर नियंत्रण रखें।
उपाय – भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। पुराने मित्रों और वरिष्ठ सहयोगियों से पूरा समर्थन मिलेगा। व्यावसायिक लाभ में वृद्धि होगी।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। उच्चाधिकारियों का समर्थन मिलेगा।
उपाय – ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धर्म-कर्म और परोपकार में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से सेहत और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और बिना सोचे-समझे वित्तीय जोखिम न लें। धैर्य रखें।
उपाय – शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और आपसी सौहार्द बढ़ाएगा। व्यापारिक साझेदारों से उत्तम सहयोग मिलेगा। सामाजिक जीवन में प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – माता लक्ष्मी को सफेद पुष्प या मखाना अर्पित करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने कर्जों और रोगों से राहत मिलेगी।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक सुख-साधनों पर ध्यान केंद्रित रखेगा। भूमि, भवन या वाहन से जुड़ा काम आगे बढ़ सकता है। माताजी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे जल अर्पित करें।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन लाभकारी यात्राओं के योग हैं।
उपाय – पक्षियों को दाना डालें और भगवान शिव का जलाभिषेक करें।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की संभावना बनेगी। परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहेगा और वाणी से लाभ होगा।
उपाय – भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले पुष्प अर्पित करें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
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