21 अक्टूबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 21 अक्टूबर 2026, बुधवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – दशमी दोपहर 02:13 PM तक, तत्पश्चात् एकादशी
वार – बुधवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – धनिष्ठा सायं 07:46 PM तक, तत्पश्चात् शतभिषा
योग – गण्ड अगले दिन (22 अक्टूबर) प्रातः 00:32 AM तक, तत्पश्चात् वृद्धि
करण – गर दोपहर 02:13 PM तक, तत्पश्चात् वणिज अगले दिन (22 अक्टूबर) प्रातः 02:37 AM तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा)

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:14 AM
सूर्यास्त – 05:37 PM
चन्द्रोदय – 02:39 PM
चन्द्रास्त – अगले दिन (22 अक्टूबर) 02:12 AM
चन्द्र राशि – मकर प्रातः 07:00 AM तक, तत्पश्चात् कुम्भ
अभिजित मुहूर्त – कोई नहीं
विजय मुहूर्त – 01:50 PM से 02:35 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 11:56 AM से 01:21 PM तक
यमगण्ड – 07:40 AM से 09:05 AM तक
गुलिक काल – 10:30 AM से 11:56 AM तक
दुर्मुहूर्त – 11:33 AM से 12:19 PM तक
कंटक – 04:06 PM से 04:52 PM तक

शुभ चौघड़िया
लाभ – 06:14 AM से 07:40 AM तक
अमृत – 07:40 AM से 09:05 AM तक
शुभ – 10:30 AM से 11:56 AM तक
चर – 02:47 PM से 04:12 PM तक
लाभ – 04:12 PM से 05:37 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – उत्तर
यात्रा उपाय – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो तिल या धनिया खाकर अथवा भगवान श्रीगणेश का ध्यान करके प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
पापांकुशा एकादशी व्रत प्रारंभ एवं दुर्गा विसर्जन
दोपहर 02:13 के बाद आश्विन शुक्ल एकादशी तिथि लग रही है। इस पावन तिथि को ‘पापांकुशा एकादशी’ कहा जाता है। आज के दिन प्रातः काल देवी दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न किया जाता है। दोपहर बाद एकादशी तिथि का स्पर्श होने से नियम-संयम और एकादशी व्रत का संकल्प लिया जाएगा, जो समस्त संचित पापों पर अंकुश लगाकर अंतःकरण की शुद्धि और भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा दिलाता है।

धनिष्ठा एवं शतभिषा नक्षत्र (पंचक विचार)
सायं 07:46 तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा, तत्पश्चात् शतभिषा नक्षत्र प्रारंभ होगा। प्रातः 07:00 बजे चन्द्रमा के कुम्भ राशि में प्रवेश करने से पंचक प्रारंभ हो जाएगा। धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल और अधिपति ‘अष्ट वसु’ हैं। यह नक्षत्र धन, संपदा, कला, संगीत और पराक्रम से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज दिन में अभिजित मुहूर्त नहीं रहेगा। चन्द्रमा प्रातः 07:00 बजे के बाद शनिदेव की मूलत्रिकोण राशि कुम्भ में गोचर करेंगे। बुधवार और कुम्भ राशि के चन्द्रमा का यह संयोग बौद्धिक चिंतन, संचार माध्यमों, सामाजिक कार्यों और व्यापारिक सौदों में विवेकशीलता प्रदान करेगा। मध्यरात्रि 00:32 तक गण्ड योग रहेगा, अतः नए महत्वपूर्ण अनुबंध सोच-समझकर करें।

आज का राशिफल – 21 अक्टूबर 2026 बुधवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
प्रातः काल के बाद एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। मित्रों और वरिष्ठ सहयोगियों से पूरा समर्थन मिलेगा। अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। अधिकारियों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए प्रोजेक्ट्स और विस्तार के योग हैं।
उपाय – छोटी कन्याओं को हरी फल या मिष्ठान भेंट करें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धर्म-कर्म और सामाजिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और आपसी तालमेल बढ़ाएगा। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने रोगों और कर्जों से राहत मिलेगी।
उपाय – गाय को हरी घास या पालक खिलाएं।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी।
उपाय – भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक मामलों में व्यस्त रखेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा। माताजी का आशीर्वाद फलेगा और गृह शांति बनी रहेगी।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन अत्यंत लाभकारी यात्राओं के योग बन रहे हैं।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की संभावना बनेगी। परिवार में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहेगा।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
प्रातः 07:00 बजे चन्द्रमा आपकी ही राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – पक्षियों को दाना डालें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक व सामाजिक कार्यों में धन व्यय होगा। दूरस्थ संपर्कों और विदेश से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। सेहत का ध्यान रखें।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
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