
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – एकादशी दोपहर 02:49 PM तक, तत्पश्चात् द्वादशी
वार – गुरुवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – शतभिषा रात्रि 09:19 PM तक, तत्पश्चात् पूर्वाभाद्रपद
योग – वृद्धि रात्रि 11:39 PM तक, तत्पश्चात् ध्रुव
करण – विष्टि (भद्रा) दोपहर 02:49 PM तक, तत्पश्चात् बव अगले दिन (23 अक्टूबर) प्रातः 02:49 AM तक, तत्पश्चात् बालव
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:15 AM
सूर्यास्त – 05:36 PM
चन्द्रोदय – 03:09 PM
चन्द्रास्त – अगले दिन (23 अक्टूबर) 03:10 AM
चन्द्र राशि – कुम्भ
अभिजित मुहूर्त – 11:33 AM से 12:18 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:49 PM से 02:35 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 01:21 PM से 02:46 PM तक
यमगण्ड – 06:15 AM से 07:40 AM तक
गुलिक काल – 09:05 AM से 10:30 AM तक
दुर्मुहूर्त – 10:02 AM से 10:47 AM तक एवं 02:35 PM से 03:20 PM तक
कंटक – 02:35 PM से 03:20 PM तक
शुभ चौघड़िया
शुभ – 06:15 AM से 07:40 AM तक
चर – 10:30 AM से 11:55 AM तक
लाभ – 11:55 AM से 01:21 PM तक
अमृत – 01:21 PM से 02:46 PM तक
शुभ – 04:11 PM से 05:36 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – दक्षिण
यात्रा उपाय – गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दही या जीरा खाकर अथवा भगवान श्रीहरि विष्णु का ध्यान करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
पापांकुशा एकादशी व्रत एवं पद्मनाभ द्वादशी विचार
आश्विन शुक्ल पक्ष की उदयाकालीन एकादशी तिथि दोपहर 02:49 तक प्रभावी रहेगी। शास्त्रों के अनुसार आज ‘पापांकुशा एकादशी’ का मुख्य व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु के ‘पद्मनाभ’ स्वरूप की आराधना करने से मनुष्य के समस्त संचित पापों का शमन होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गुरुवार का पावन संयोग इस एकादशी के पुण्य फल को कई गुना बढ़ा देता है।
शतभिषा नक्षत्र एवं पंचक विचार
रात्रि 09:19 तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा, जिसके स्वामी राहु देव और अधिपति वरुण देव हैं। शतभिषा एक चर व सौम्य नक्षत्र है, जो चिकित्सा, अनुसंधान, गूढ़ ज्ञान और आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। चन्द्रमा के कुम्भ राशि में होने से पंचक प्रभावी रहेगा।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज दोपहर 02:49 तक भद्रा (विष्टि करण) का प्रभाव रहेगा, अतः नए भौतिक कार्यों का आरंभ भद्रा समाप्ति के उपरांत ही करें। रात्रि 11:39 तक ‘वृद्धि योग’ विद्यमान रहेगा, जो किए गए शुभ कर्मों, दान-पुण्य और ज्ञानार्जन के प्रभाव को निरंतर बढ़ाता है। गुरुवार के दिन कुम्भ राशि के चन्द्रमा का गोचर गंभीर चिंतन और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि कराएगा।

आज का राशिफल – 22 अक्टूबर 2026 गुरुवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। मित्रों और वरिष्ठ सहयोगियों से पूरा समर्थन मिलेगा। अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। अधिकारियों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए प्रोजेक्ट्स और विस्तार के योग हैं।
उपाय – केले के वृक्ष में जल अर्पित करें और चने की दाल का दान करें।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धर्म-कर्म और सामाजिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से दूरी बनाए रखें। वित्तीय मामलों में जोखिम न लें।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और आपसी तालमेल बढ़ाएगा। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – मस्तक पर केसर या पीले चंदन का तिलक लगाएं।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने रोगों और कर्जों से राहत मिलेगी।
उपाय – गाय को भीगी हुई चने की दाल और गुड़ खिलाएं।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी।
उपाय – श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या श्रवण करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक मामलों में व्यस्त रखेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा। माताजी का आशीर्वाद फलेगा और गृह शांति बनी रहेगी।
उपाय – भगवान विष्णु के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन अत्यंत लाभकारी यात्राओं के योग बन रहे हैं।
उपाय – किसी ब्राह्मण या वृद्धजन का आशीर्वाद लें और पीले फल भेंट करें।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की संभावना बनेगी। परिवार में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहेगा।
उपाय – पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें और जल अर्पित करें।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक व सामाजिक कार्यों में धन व्यय होगा। दूरस्थ संपर्कों और विदेश से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। सेहत का ध्यान रखें।
उपाय – एकादशी के दिन अन्न दान करें या भूखे को भोजन कराएं।
॥ शुभम भवतु ॥

