
कांग्रेस सांसद बोले— विदेश नीति दल की नहीं, राष्ट्र की होती है; पाकिस्तान की बदलती सैन्य रणनीति को हल्के में न लें
संवाद 24 नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेश नीति को लेकर राजनीति से ऊपर राष्ट्रहित को रखने की जोरदार पैरवी की है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे भारत की होती है। अगर कोई प्रधानमंत्री की हार में खुशी महसूस करता है, तो वह अनजाने में भारत की हार पर खुशी मना रहा होता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को याद करते हुए थरूर ने कहा, “अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा?”
इंडिया टुडे से शुक्रवार को बातचीत में थरूर ने स्पष्ट किया कि विदेश नीति में सरकार की आलोचना हो सकती है, लेकिन देश के नेतृत्व को कमजोर दिखाने वाली मानसिकता अंततः भारत के हितों को नुकसान पहुंचाती है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री की स्थिति देश की स्थिति से जुड़ी होती है।
पाकिस्तान की बदलती सैन्य सोच पर चेतावनी
शशि थरूर ने पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा खतरों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव कर रहा है और हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक तथा छिपकर हमला करने (स्टेल्थ स्ट्रैटेजी) जैसी क्षमताओं पर काम कर रहा है।
थरूर के मुताबिक, पाकिस्तान पहले भी ड्रोन, रॉकेट और मिसाइल हमलों का सहारा ले चुका है और अब और अधिक खतरनाक तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में भारत को किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।
सेना के हाथ में असली सत्ता
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने उसे एक बेहद समस्याग्रस्त देश बताया। उन्होंने कहा कि वहां नाम मात्र की नागरिक सरकार है, जबकि वास्तविक सत्ता सेना के हाथों में केंद्रित है। नीति निर्धारण से लेकर रणनीतिक फैसलों तक, हर जगह सेना का दबदबा है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बना हुआ है।
आर्थिक कमजोरी भी खतरे की वजह
थरूर ने पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था की ओर भी इशारा किया। उन्होंने बताया कि जहां पाकिस्तान की GDP ग्रोथ करीब 2.7 फीसदी है, वहीं भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसदी से अधिक बनी हुई है।
उनके अनुसार, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मदद से अस्थायी राहत तो मिलती है, लेकिन यही आर्थिक कमजोरी भविष्य में उसे सैन्य रोमांच और जोखिम भरे कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
क्षेत्रीय और वैश्विक परिदृश्य पर नजर
थरूर ने कहा कि पाकिस्तान अब उन क्षेत्रों में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है, जहां भारत पहले से मजबूत है—जैसे टेक्सटाइल और कृषि। इससे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान अमेरिका को खनिज संसाधनों तक पहुंच देने और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े सौदों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
बांग्लादेश और पूर्वोत्तर को लेकर चिंता
कांग्रेस सांसद ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वहां ऊर्जा संकट, महंगाई और निवेशकों के भरोसे में कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
थरूर के मुताबिक, बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग की चर्चा भारत के लिए सतर्क रहने का संकेत है। भारत के लिए एक शांत और स्थिर बांग्लादेश जरूरी है, क्योंकि अस्थिरता उसे भारत की ‘सॉफ्ट अंडरबेली’ बना सकती है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कुछ ताकतें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग करने की धमकी दे रही हैं और अलगाववादी तत्वों को संरक्षण दे रही हैं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं।






