बर्फबारी से पहले पहुंचेगी टीम: जानिए पहाड़ी राज्यों के लिए क्यों बदला गया जनगणना 2027 का पूरा प्लान!

संवाद 24 नई दिल्ली। देश की जनसांख्यिकी, आर्थिक स्थिति और सामाजिक संरचना का सटीक खाका तैयार करने वाली भारत की महत्वाकांक्षी ‘जनगणना 2027’ को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने इस डिजिटल जनगणना के दूसरे चरण यानी ‘जनसंख्या गणना’ (Population Enumeration) का विस्तृत शेड्यूल और औपचारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार का विशेष ध्यान देश के उन क्षेत्रों पर है, जहाँ कठोर प्राकृतिक परिस्थितियाँ और विषम मौसम सामान्य जीवन में चुनौतियाँ खड़ी करते हैं। इसी कड़ी में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी से प्रभावित दुर्गम इलाकों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए समय-सारणी का विशेष खाका तैयार किया गया है। गृह मंत्रालय के अधीन संचालित ‘भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त कार्यालय’ (ORGI) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इन बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में मौसम के मिजाज को देखते हुए जनगणना प्रक्रिया को समय से पहले पूरा करने की रणनीति बनाई गई है।

17 अगस्त से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का मौका
पहाड़ी और बर्फबारी वाले संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिक घर-घर सर्वेक्षण शुरू होने से पहले ही अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करा सकेंगे। सरकार ने इसके लिए 17 अगस्त 2026 से 31 अगस्त 2026 तक ‘सेल्फ एन्युमेरेशन’ (Self-Enumeration) यानी ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प दिया है।
इस प्रक्रिया के तहत नागरिक जनगणना विभाग के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन कर सकेंगे। पोर्टल पर नक्शे में अपनी लोकेशन चिह्नित करने के बाद वे अपने और अपने परिवार के सदस्यों का व्यक्तिगत और सामाजिक ब्योरा खुद भर सकेंगे। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होते ही एक ‘यूनिक सेल्फ एन्युमेरेशन आईडी’ (SE ID) जेनरेट होगी, जिसे बाद में सत्यापन के लिए आने वाले जनगणना कर्मी को दिखाना होगा।

1 सितंबर से घर-घर पहुंचेंगे गणनाकर्मी
डिजिटल स्व-पंजीकरण की अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद 1 सितंबर 2026 से मैदानी स्तर पर काम शुरू होगा। 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच जनगणना कार्यकर्ता (Enumerators) घर-घर जाकर डेटा एकत्र और सत्यापित करेंगे। इसके बाद, एकत्रित किए गए आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करने और छूटे हुए परिवारों को शामिल करने के लिए 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक पांच दिवसीय ‘रिवीजन राउंड’ (संशोधन चक्र) चलाया जाएगा। सरकार ने अधिसूचित पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जनगणना की आधिकारिक संदर्भ तिथि (Reference Date) 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि तय की है।

जनगणना 2027: दो चरणों में देश का नक्शा
भारत की यह 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना पूरी तरह से हाई-टेक और डिजिटल माध्यम से संपन्न कराई जा रही है। पूरी प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो चरणों में विभाजित किया गया है:

  1. पहला चरण – मकान सूचीकरण और मकान गणना (HLO):** इसमें देश भर के मकानों की स्थिति, निर्मित सामग्री, पीने के पानी का स्रोत, बिजली, शौचालय, रसोई गैस और परिवार के पास मौजूद संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जाता है।
  2. दूसरा चरण – जनसंख्या गणना (PE):** यह जनगणना का सबसे मुख्य और संवेदनशील चरण है। इसमें प्रत्येक नागरिक का नाम, उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, मातृभाषा, शिक्षा का स्तर, रोजगार की स्थिति और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से जुड़ी सामाजिक-आर्थिक जानकारियां दर्ज की जाती हैं।
    डिजिटल क्रांति: मोबाइल ऐप और 16 भाषाओं का सहारा
    कागज-कलम के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए इस बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो रही है। गणनाकर्मी अपने एंड्रॉइड मोबाइल ऐप में सीधे डेटा दर्ज और सिंक करेंगे।
    डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, जिसके लिए एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। आम जनता के लिए स्व-गणना पोर्टल और गणनाकर्मियों के लिए ऐप को हिंदी, अंग्रेजी सहित 16 प्रमुख भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, ताकि भाषा संबंधी कोई बाधा उत्पन्न न हो। सामरिक और प्राकृतिक दृष्टि से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में समय से पहले प्रक्रिया पूरी करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारी बर्फबारी और सड़क मार्ग बंद होने से पहले देश के हर अंतिम नागरिक का डेटा राष्ट्रीय डेटाबेस का हिस्सा बन सके।
Madhvi Singh
Madhvi Singh

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