
संवाद 24
दिल्ली ब्लास्ट जांच के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान पर बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि मदनी वर्षों से मुस्लिम समाज को भटकाकर केवल अपने राजनीतिक और निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं।
मदनी ने क्या कहा था?
अरशद मदनी ने शनिवार को दावा किया कि
“मुसलमान लंदन और न्यूयॉर्क में मेयर बन सकता है, लेकिन भारत में किसी यूनिवर्सिटी का चांसलर नहीं बन सकता। अगर ऐसा करने की कोशिश की जाए, तो सपा नेता आज़म खान की तरह बेटे के साथ जेल जाना पड़ता है।”
उन्होंने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी का उदाहरण भी दिया, जो फिलहाल ईडी की कस्टडी में हैं।
बीजेपी का पलटवार
मोहसिन रज़ा (भाजपा नेता)
- “मदनी और उनका परिवार सालों से मुसलमानों को गुमराह करके भेदभाव की राजनीति करता रहा है।”
- “मुस्लिम समाज के नाम पर फायदा लिया, लेकिन उनके विकास के लिए कुछ नहीं किया।”
यासिर जिलानी (बीजेपी प्रवक्ता)
- “दुनिया में मुसलमानों के लिए भारत सबसे सुरक्षित जगह है। यहां हिंदू उनके बड़े भाई की तरह खड़े हैं।”
विपक्ष का समर्थन और सवाल
- कांग्रेस नेता उदित राज ने मदनी के बयान का समर्थन किया और कहा कि “अगर किसी व्यक्ति ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी यूनिवर्सिटी को निशाना बनाने का क्या मतलब?”
- उन्होंने सवाल उठाया कि “मुसलमानों के घरों पर बुलडोज़र क्यों चलाए जा रहे हैं? अमेरिका में किसी धर्म पर भेदभाव नहीं होता, इसलिए उसे महान कहा जाता है।”
- सपा नेता घनश्याम तिवारी ने मांग की कि प्रधानमंत्री को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए।
क्या है अल-फलाह यूनिवर्सिटी केस?
- 18 नवंबर को ईडी ने यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया।
- यह मामला 10 नवंबर को दिल्ली में हुए ब्लास्ट की जांच से जुड़ा माना जा रहा है।
- यूनिवर्सिटी पर कई डॉक्टरों और शिक्षकों के आतंकी मॉड्यूल से जुड़े होने के आरोप हैं, जिनमें
- डॉ. शाहीन सईद (फार्माकोलॉजिस्ट)
- डॉ. मुजम्मिल शकील (सर्जन)
- डॉ. उमर नबी (असिस्टेंट प्रोफेसर, सुसाइड बॉम्बर)
शामिल हैं।






