
संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में संसद मार्च के नाम पर उपद्रव और हिंसा के मामले में एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि जंतर-मंतर पर हुआ बवाल कोई अचानक भड़का छात्रों का गुस्सा नहीं था, बल्कि इसे एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश के तहत अंजाम दिया गया था।
मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर इसके राजनीतिक एंगल को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त ने इस पूरे केस की जांच दिल्ली पुलिस की आतंकवाद रोधी इकाई यानी ‘स्पेशल सेल’ (Special Cell) को सौंप दी है।
एफआईआर में आप, सपा और भीम आर्मी के नाम
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) में आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी (SP) और भीम आर्मी के नेताओं व कार्यकर्ताओं का नाम खुलकर सामने आया है। पुलिस के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, संसद मार्ग पर उपद्रव मचाने और भीड़ को भड़काने के लिए इन राजनीतिक संगठनों और उनके कुछ वरिष्ठ कैडरों की सक्रिय भूमिका पाई गई है। जांच अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शन की आड़ में उपद्रवियों को लाठी-डंडों के साथ आगे किया गया और पुलिस बल पर जानबूझकर हमला कराया गया। शुरुआत में इसे छात्रों के अधिकारों की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश की गई थी, लेकिन जब सबूतों की कड़ियां जोड़ी गईं, तो पर्दे के पीछे से राजनीतिक दल माहौल बिगाड़ने का खेल खेलते नजर आए।
स्पेशल सेल खंगालेगी फंडिंग और वॉट्सऐप चैट
अब जब जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के पास है, तो इस मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी और खुफिया ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।
डिजिटल सबूत: स्पेशल सेल संदिग्ध नेताओं और संगठनों के वॉट्सऐप ग्रुप्स, कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड्स (CDR) और सोशल मीडिया पोस्ट्स की गहनता से पड़ताल कर रही है।
फंडिंग एंगल: यह भी जांचा जा रहा है कि क्या इस हिंसा को अंजाम देने के लिए देश या विदेश से कोई संदिग्ध फंडिंग तो नहीं की गई थी।
चेहरों की पहचान: जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर लगे सैकड़ों सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज के आधार पर उन चेहरे की शिनाख्त की जा रही है, जो भीड़ को उकसा रहे थे।
राजनीतिक गरमाहट तय, उठ रहे गंभीर सवाल
जंतर-मंतर हिंसा में राजनीतिक दलों के नामजद होने के बाद दिल्ली की राजनीति में जबर्दस्त भूचाल आ गया है। इस एफआईआर के सामने आने के बाद विपक्षी दलों में खलबली मच गई है। जहाँ एक तरफ पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, वहीं दूसरी तरफ नामजद राजनीतिक दलों द्वारा इस कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताए जाने की आशंका है। फिलहाल, स्पेशल सेल की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक साजिश के मास्टरमाइंड्स पर बड़ा शिकंजा कसा जाना तय माना जा रहा है। जंतर-मंतर की यह खूनी पटकथा आखिर किसने लिखी थी, स्पेशल सेल की जांच के बाद इसका पूरा सच जल्द देश के सामने होगा।






