फर्जीवाड़े से हथियाई सरकारी नौकरी: हिमाचल में EWS सर्टिफिकेट का महाघोटाला उजागर, विजिलेंस के रडार पर 4 आरोपी!

संवाद 24 हिमाचल प्रदेश। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित कोटे का दुरुपयोग कर ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT Medical) की प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी हथियाने के इस बड़े फर्जीवाड़े ने पूरे शिक्षा विभाग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है. राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की गहन जांच रिपोर्ट के बाद इस महाघोटाले की परतें खुली हैं, जिसके आधार पर बिलासपुर के भराड़ी पुलिस थाने में आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है. इस पूरे खेल में विजिलेंस ने चार आरोपियों को अपने रडार पर ले लिया है.

गलत आय दिखाकर कैसे हुआ खेल? ऐसे खुली पोल
यह पूरा मामला बिलासपुर जिले के भराड़ी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. विजिलेंस ब्यूरो को गुप्त सूचना मिली थी कि सरकारी पदों पर भर्ती के लिए जारी नियमों को ताक पर रखकर कुछ रसूखदार लोग गलत तरीकों से आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं. जांच एजेंसी ने जब टीजीटी मेडिकल पद पर चयनित एक शिक्षक के दस्तावेजों को खंगालना शुरू किया, तो चौंकाने वाले सच सामने आए. जांच के अनुसार, आरोपी ने ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय अपने परिवार की वास्तविक आय को छुपाया और बहुत कम आय का झूठा हलफनामा पेश किया. नियमों के मुताबिक, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए परिवार के सभी स्रोतों (कृषि, व्यवसाय, नौकरी आदि) को मिलाकर सालाना आय की एक तय सीमा निर्धारित है. लेकिन आरोपी ने आय से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर कर सक्षम प्राधिकारी को गुमराह किया और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र हासिल कर लिया. इसी फर्जी प्रमाण पत्र के बूते उसने हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित श्रेणी के तहत टीजीटी मेडिकल की सरकारी नौकरी भी पा ली.

विजिलेंस की रिपोर्ट पर FIR दर्ज, रडार पर 4 बड़े नाम
बिलासपुर विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपी के राजस्व रिकॉर्ड, पारिवारिक रजिस्टर और बैंक खातों की गहनता से पड़ताल की. जांच में यह साफ हो गया कि आवेदन के समय घोषित की गई आय और वास्तविक आय में जमीन-आसमान का अंतर था. विजिलेंस ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक (SP) बिलासपुर को सौंपी, जिन्होंने आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए इसे भराड़ी पुलिस थाने को प्रेषित किया. घुमारवीं के पुलिस उपअधीक्षक (DSP) विशाल वर्मा ने मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ कानून की सुसंगत धाराओं के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में केवल नौकरी पाने वाला शिक्षक ही दोषी नहीं है, बल्कि गलत रिपोर्ट लगाने वाले और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में मदद करने वाले तीन अन्य लोग भी विजिलेंस के निशाने पर हैं. जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि क्या राजस्व विभाग के स्थानीय कर्मचारियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया.

आरोपी का दावा: “पिता से अलग था, गलती पता चलने पर खुद दिया इस्तीफा”
मामला दर्ज होने और चारों तरफ बदनामी होने के बाद आरोपी शिक्षक ने अपना पक्ष रखते हुए एक अलग ही कहानी बयां की है. आरोपी का दावा है कि जब उसने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, तब वह अपने पिता से अलग रह रहा था और उसका राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर और अन्य आधिकारिक दस्तावेज पूरी तरह अलग थे. उसका कहना है कि करीब दो साल पहले उसने टीजीटी पद पर ज्वाइन किया था. इसके बाद जब प्रदेश सरकार ने चयनित अभ्यर्थियों के ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों का राज्यव्यापी पुनर्सत्यापन (Verification) शुरू किया, तो जांच टीम ने उसके पिता की आय को भी उसकी आय के साथ जोड़ दिया. संयुक्त आय तय सीमा से अधिक होने के कारण उसका प्रमाण पत्र अमान्य श्रेणी में आ गया. आरोपी ने दावा किया कि जब उसे इस तकनीकी विसंगति का पता चला, तो उसने स्वेच्छा से ज्वाइनिंग के १५ दिनों के भीतर ही अपने शिक्षक पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, विजिलेंस इस दावे को महज कानूनी कार्रवाई से बचने का पैंतरा मान रही है, क्योंकि झूठा हलफनामा देना अपने आप में एक गंभीर अपराध है.

योग्य युवाओं के हक पर डाका: स्थानीय जनता में भारी आक्रोश
इस मामले के उजागर होने के बाद हिमाचल के बेरोजगार युवाओं और आम जनता में गहरा रोष है. लोगों का कहना है कि ऐसे फर्जीवाड़े के कारण उन गरीब और वास्तव में जरूरतमंद परिवारों के बच्चों का हक मारा जाता है, जो दिन-रात ईमानदारी से परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि प्रमाण पत्र जारी करने के शुरुआती स्तर पर ही पटवारियों और तहसीलदारों द्वारा कड़ा भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए, ताकि संपन्न लोग गरीबों के कोटे पर डाका न डाल सकें. पुलिस अब इस मामले में आगे की कड़ियों को जोड़ रही है और जल्द ही इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है.

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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