दिल्ली नगर निगम में महासंग्राम: वार्ड समिति चुनावों के लिए भाजपा ने बिछाई ’10 जोन’ की बिसात, क्या आम आदमी पार्टी बचा पाएगी अपना किला

संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की सियासत में एक बार फिर जबरदस्त सरगर्मी बढ़ गई है। दिल्ली नगर निगम (MCD) के भीतर होने जा रहे वार्ड समिति (Ward Committee) के चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। एमसीडी के सभी 12 जोनों में होने वाले यह चुनाव तय करेंगे कि निगम की सबसे शक्तिशाली संस्था यानी स्थायी समिति (Standing Committee) पर किसका कब्जा होगा। इस बार भाजपा ने बेहद आक्रामक रणनीति अपनाते हुए कम से कम 10 जोनों में जीत दर्ज करने का बड़ा लक्ष्य रखा है, जबकि आम आदमी पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट रखकर अपने इस सबसे मजबूत राजनीतिक किले को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

वार्ड समिति और जोन चुनाव क्यों हैं इतने खास?
दिल्ली नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में वार्ड समितियों और जोनों का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दरअसल, निगम के सभी विकासात्मक कार्यों और वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी देने वाली मुख्य शक्ति ‘स्थायी समिति’ (Standing Committee) के पास होती है। इस स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव अलग-अलग जोनों से चुनकर आने वाले अध्यक्ष और प्रतिनिधि करते हैं। यदि भाजपा 10 जोनों पर कब्जा करने में कामयाब हो जाती है, तो नगर निगम में आम आदमी पार्टी के महापौर (Mayor) होने के बावजूद भी व्यावहारिक रूप से निगम की तिजोरी की चाबी और बड़े फैसलों का अधिकार भाजपा के नियंत्रण में चला जाएगा। यही वजह है कि दोनों ही दल इन चुनावों को बिल्कुल हल्के में नहीं ले रहे हैं और इसे दिल्ली विधानसभा चुनावों के ‘सेमीफाइनल’ की तरह देखा जा रहा है।

भाजपा का ‘मिशन 10’: पार्षदों के गणित पर नजर
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि दलबदल और पार्षदों के आंतरिक असंतोष के कारण इस बार समीकरण उनके पक्ष में झुके हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ पार्षदों ने पाला बदलकर भाजपा का दामन थामा है, जिससे कई जोनों में संख्या बल का खेल पूरी तरह बदल गया है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी न केवल अपने मजबूत गढ़ माने जाने वाले जोनों जैसे शाहदरा साउथ, शाहदरा नॉर्थ, नजफगढ़ और केशवपुरम में अपनी जीत पक्की मानकर चल रही है, बल्कि सिविल लाइंस, नरेला और करोल बाग जैसे जोनों में भी कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों के सहयोग व क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) के सहारे सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर चुकी है। भाजपा का स्पष्ट लक्ष्य है कि वह संख्या बल का ऐसा जाल बुने जिससे आम आदमी पार्टी केवल 2 जोनों तक ही सिमट कर रह जाए।

आम आदमी पार्टी का ‘डिफेंस मोड’: सेंधमारी रोकने की चुनौती
दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए यह चुनाव साख की लड़ाई बन चुका है। निगम में बहुमत होने के बाद भी लगातार पार्षदों का टूटकर जाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने अपने सभी बचे हुए पार्षदों को एकजुट रखने के लिए पर्यवेक्षकों (Observers) की नियुक्ति कर दी है और लगातार उनके साथ बैठकें की जा रही हैं। आम आदमी पार्टी इस चुनाव में भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के डर और प्रलोभन के दम पर पार्षदों को डराने-धमकाने का आरोप लगा रही है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि दिल्ली की जनता ने एमसीडी में ‘आप’ को स्पष्ट बहुमत दिया था और वे भाजपा की ‘अलोकतांत्रिक’ कोशिशों को सफल नहीं होने देंगे। ‘आप’ का मुख्य ध्यान साउथ जोन, वेस्ट जोन और सेंट्रल जोन जैसे क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत रखने पर है, जहाँ उनके पास पार्षदों की संख्या फिलहाल सुरक्षित है।

क्रॉस वोटिंग का डर और कड़ा मुकाबला
चूंकि वार्ड समिति के इन चुनावों में ‘व्हिप’ (पार्टी आदेश) लागू नहीं होता और मतदान गुप्त मतपत्र (Secret Ballot) के जरिए होता है, इसलिए दोनों ही दलों को भीतरघात और क्रॉस वोटिंग का सबसे ज्यादा डर सता रहा है। मतदान के दिन कोई भी पार्षद बिना किसी कानूनी अयोग्यता के डर के अपनी अंतरात्मा या निजी हित के आधार पर किसी भी उम्मीदवार को वोट दे सकता है। यही कारण है कि सिविक सेंटर (MCD मुख्यालय) के भीतर और बाहर दोनों पार्टियों के नेता हर एक वोट को सहेजने के लिए गुणा-भाग में जुटे हुए हैं। आने वाले कुछ दिन दिल्ली की इस स्थानीय राजनीति के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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