
संवाद 24 नई दिल्ली। आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त नीति को आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान में सक्रिय 23 आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित कर दिया है। ये सभी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकी नेटवर्क शामिल हैं, से जुड़े बताए गए हैं। यह निर्णय राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से जारी किया गया।
सीमा पार आतंकवाद पर सख्त संदेश
गृह मंत्रालय के इस फैसले को सीमा पार से संचालित आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि जिन लोगों को आतंकवादी घोषित किया गया है, वे लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों, आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, घुसपैठ, वित्तीय सहायता और आतंकी साजिशों में शामिल रहे हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क की गतिविधियों पर कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर प्रभावी रोक लगाना है।
यूएपीए के तहत बढ़ेगा कानूनी शिकंजा
सरकार द्वारा किसी व्यक्ति को यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकती है। उसके वित्तीय स्रोतों, संपत्तियों और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर कार्रवाई का रास्ता भी मजबूत होता है। इसके साथ ही विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों को जांच और कानूनी प्रक्रिया में अतिरिक्त अधिकार प्राप्त होते हैं।
कई प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हैं आरोपी
अधिसूचना में शामिल अधिकांश नाम पाकिस्तान में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े बताए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ये लोग आतंकवादी ढांचे को मजबूत करने, नए आतंकियों की भर्ती, हथियार उपलब्ध कराने और भारत के खिलाफ साजिश रचने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाते रहे हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि इन व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने से उनके नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ेगा।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की ‘आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता’ नीति को और मजबूत करता है। हाल के वर्षों में भारत लगातार उन व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है जो सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने में शामिल रहे हैं। सरकार का उद्देश्य आतंक के पूरे तंत्र को कानूनी, आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर कमजोर करना है।






