
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सह-विकास समझौते सहित कई अहम करारों पर हस्ताक्षर किए। नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का गर्मजोशी से स्वागत किया। वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा, आर्थिक सुरक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई।
रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती
शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में अपने पहले सह-विकास समझौते की घोषणा की। इस समझौते का उद्देश्य अत्याधुनिक रक्षा तकनीक, अनुसंधान और निर्माण में साझा भागीदारी बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक क्षमता और सुरक्षा सहयोग को नई गति मिलेगी।
आर्थिक सुरक्षा और नई तकनीक पर विशेष जोर
बैठक के दौरान आर्थिक सुरक्षा को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताया गया। दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, धातु उद्योग, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा रोडमैप तैयार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जापान की उच्च तकनीकी क्षमता और भारत की डिजिटल दक्षता मिलकर वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।
संबंधों में दिखी आत्मीयता
वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का विशेष स्वागत करते हुए उन्हें अपनी “छोटी बहन” बताया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि विश्वास, सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा मूल्यों पर आधारित हैं। इस आत्मीय माहौल ने दोनों देशों की मित्रता को और मजबूत करने का संदेश दिया।
निवेश और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
दोनों नेताओं ने भारत में जापानी निवेश बढ़ाने, औद्योगिक सहयोग मजबूत करने और व्यापारिक संबंधों का विस्तार करने पर भी सहमति व्यक्त की। भारत में आधुनिक विनिर्माण, हरित ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और परिवहन परियोजनाओं में जापानी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। इससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण
बैठक में दोनों देशों ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और जापान ने क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने पर जोर दिया। दोनों देशों ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति अपनाने की आवश्यकता भी व्यक्त की।
हरित ऊर्जा और नवाचार पर भी बनी सहमति
शिखर सम्मेलन के दौरान स्वच्छ ऊर्जा, जैव-ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। दोनों देशों ने भारत में जैव-ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार और सतत विकास के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास को भी भविष्य के सहयोग का प्रमुख आधार बताया गया।
भविष्य की साझेदारी का मजबूत संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन केवल नए समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और जापान के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक विश्वास का प्रतीक भी है। रक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक सशक्त बना सकता है। भारत और जापान की यह साझेदारी बदलते वैश्विक परिदृश्य में एशिया की स्थिरता और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।






