
संवाद 24 नई दिल्ली। देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के विस्तार के साथ ही वाहन चालकों के बीच माइलेज में गिरावट को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है। कई वाहन मालिकों का दावा है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों की ईंधन दक्षता घट गई है। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट और स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार का दो टूक कहना है कि वाहन का माइलेज केवल ईंधन संरचना पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग की आदतें, वाहन का समय पर रखरखाव और सड़क की स्थिति जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण पहलू इसके लिए सीधे जिम्मेदार होते हैं।
सिर्फ E20 जिम्मेदार नहीं: सरकार की तकनीकी दलील
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल में ऊर्जा घनत्व (Energy Density) सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ा कम होता है, लेकिन आधुनिक इंजनों में इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन (EFI) और इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) इसे काफी हद तक संतुलित कर देते हैं। तकनीकी परीक्षणों से यह सिद्ध हुआ है कि E20 ईंधन से माइलेज में होने वाला वास्तविक अंतर नगण्य (लगभग 1 से 2 प्रतिशत) होता है। यदि किसी वाहन के माइलेज में 10 से 20 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखी जा रही है, तो उसका मुख्य कारण ईंधन नहीं बल्कि वाहन की स्थिति और चलाने का तरीका है।
माइलेज को प्रभावित करने वाले 5 मुख्य कारक
केंद्र सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी सीधे तौर पर इन बिंदुओं से तय होती है:
1- ड्राइविंग स्टाइल और अचानक एक्सेलेरेशन: तेज गति से गाड़ी भगाना, बार-बार अचानक ब्रेक लगाना और अनावश्यक गियर बदलना इंजन पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे 15 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा ईंधन जलता है।
2- टायर प्रेशर की अनदेखी: टायरों में अनुशंसित हवा के दबाव (PSI) से कम हवा होने पर रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिससे माइलेज में सीधी गिरावट आती है।
3- नियमित सर्विसिंग और एयर फिल्टर की सफाई: चोक हो चुका एयर फिल्टर इंजन को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने देता, जिसके कारण ईंधन का सही दहन नहीं हो पाता और माइलेज गिर जाता है।
4- ट्रैफिक जाम और आइडलिंग: लंबे ट्रैफिक सिग्नलों पर इंजन चालू रखने से बिना चले ही भारी मात्रा में ईंधन बर्बाद होता है।
5- एसी का अत्यधिक उपयोग व ओवरलोडिंग: भीषण गर्मी में फुल ब्लोअर पर एसी चलाने और गाड़ी में अनावश्यक वजन ढोने से माइलेज पर सीधा असर पड़ता है।
देश के लिए क्यों जरूरी है E20 मिशन?
सरकार ने दोहराया है कि इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम केवल पर्यावरण के अनुकूल विकल्प नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक संप्रभुता के लिए भी आवश्यक है:
विदेशी मुद्रा की बचत: कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होने से देश के हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचती है।
किसानों को सीधा लाभ: गन्ना, मक्का और अधिशेष खाद्यान्न से इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत मिला है।
प्रदूषण में भारी कमी: इथेनॉल के दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन काफी कम होता है, जिससे शहरों की वायु गुणवत्ता सुधरती है।
सरकार ने वाहन चालकों को सलाह दी है कि वे नियमित रखरखाव पर ध्यान दें, सही गियर अनुपात में गाड़ी चलाएं और ईंधन की खपत को लेकर बिना वैज्ञानिक प्रमाण वाली अफवाहों से बचें।






