
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत की सैन्य क्षमता को और अधिक आधुनिक तथा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आज एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कई महत्वपूर्ण रक्षा खरीद प्रस्तावों पर विचार होने की संभावना है। इनमें हैमर प्रहारक अस्त्र, वेरबा वायु रक्षा प्रणाली, स्वदेशी मानव पोर्टेबल टैंक रोधी प्रक्षेपास्त्र, लंबी अवधि तक निगरानी करने वाले मानवरहित हवाई मंच तथा नौसेना के लिए नई प्रणालियां शामिल हैं।
वायु और थल सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
बैठक में जिन प्रस्तावों पर विचार होना है, उनका उद्देश्य भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की परिचालन क्षमता को कई गुना बढ़ाना है। वायुसेना के लिए हैमर प्रहारक अस्त्रों की खरीद से अत्यधिक सटीकता के साथ दूर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता मजबूत होगी। वहीं वेरबा वायु रक्षा प्रणाली कम ऊंचाई पर उड़ने वाले शत्रु के विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी। इन प्रणालियों के शामिल होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी होने की उम्मीद है।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देना माना जा रहा है। प्रस्तावित मानव पोर्टेबल टैंक रोधी प्रक्षेपास्त्र पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसके उत्पादन की जिम्मेदारी भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी को दिए जाने की योजना है। इससे न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि देश के रक्षा उद्योग और निजी क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।
आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुसार तैयार होगी सेना
बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, सटीक प्रहार करने वाले अस्त्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियां आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए परिषद लंबी अवधि तक निगरानी करने वाले मानवरहित हवाई मंचों और नौसेना के लिए नई हवाई प्रणालियों पर भी विचार कर सकती है। इनसे समुद्री और सीमाई क्षेत्रों की निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
तीनों सेनाओं की संयुक्त क्षमता होगी मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सभी प्रस्ताव स्वीकृत हो जाते हैं तो भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध क्षमता पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी होगी। थल, जल और वायु—तीनों मोर्चों पर आधुनिक उपकरणों के शामिल होने से किसी भी चुनौती का जवाब अधिक तेजी और सटीकता के साथ दिया जा सकेगा। साथ ही यह निर्णय देश की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति को भी नई दिशा देगा।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा नया बल
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में देश में अनेक रक्षा प्रणालियों का विकास और निर्माण शुरू हुआ है। प्रस्तावित खरीद में भी स्वदेशी उपकरणों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। इससे रक्षा उद्योग में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
फैसले पर पूरे रक्षा क्षेत्र की नजर
रक्षा विशेषज्ञों, उद्योग जगत और सशस्त्र बलों की नजर आज होने वाली बैठक पर टिकी हुई है। यदि परिषद इन प्रस्तावों को मंजूरी देती है तो यह भारतीय रक्षा आधुनिकीकरण के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक साबित हो सकता है। इससे सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय रक्षा तैयारियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।






