
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ अपने साझा रुख को और मजबूत करते हुए पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद की कड़ी और स्पष्ट शब्दों में निंदा की है। दोनों देशों ने कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए। वार्षिक भारत-जापान शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया।
आतंकवाद के खिलाफ साझा और सख्त रुख
संयुक्त बयान में भारत और जापान ने स्पष्ट किया कि सीमा पार आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। दोनों देशों ने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क, उनके सुरक्षित ठिकानों और वित्तीय सहायता के स्रोतों को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समन्वित और प्रभावी कदम उठाने की अपील की। साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनके सहयोगी नेटवर्क के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
आतंकवादी संगठनों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
भारत और जापान ने संयुक्त बयान में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दोषियों, साजिशकर्ताओं और आतंकवाद को आर्थिक सहायता देने वालों को शीघ्र न्याय के दायरे में लाना आवश्यक है। दोनों देशों ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद के लिए सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करना और उसकी वित्तीय आपूर्ति रोकना वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए।
रणनीतिक साझेदारी को मिला नया विस्तार
भारत और जापान के बीच हुई वार्ता केवल आतंकवाद तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को लेकर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प दोहराया।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति पर भी जोर
बैठक के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को मिला समर्थन
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के साथ खुलकर खड़ा होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। इससे आतंकवाद के खिलाफ भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति को और मजबूती मिलेगी तथा वैश्विक मंचों पर इस विषय पर भारत की आवाज और प्रभावशाली हो सकता है।
वैश्विक सुरक्षा के लिए मजबूत संदेश
भारत और जापान का यह संयुक्त रुख केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए यह संदेश है कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट और निर्णायक कार्रवाई समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।






