
संवाद 24 बिहार। कृषि क्षेत्र और युवाओं के रोजगार को लेकर एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। नीतीश सरकार अब राज्य के कृषि क्षेत्र में पढ़ाई कर रहे युवाओं की किस्मत बदलने के लिए एक बिल्कुल अनूठा और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। बिहार सरकार ने फैसला किया है कि एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को अब सरकारी या निजी नौकरियों के भरोसे भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार उन्हें सीधे तौर पर आधुनिक एग्रीटेक (कृषि-तकनीक) स्टार्टअप्स के साथ जोड़ने जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र के डिग्री धारकों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि खुद का बिजनेस शुरू करके दूसरों को नौकरी देने वाले ‘एंटरप्रेन्योर’ (उद्यमी) बन सकें।
क्या है बिहार सरकार का यह नया मास्टरप्लान?
बिहार के कृषि विभाग की ओर से तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले अंतिम वर्ष के छात्रों और पास आउट युवाओं को देश के बड़े और सफल स्टार्टअप्स के साथ जोड़ा जाएगा। इसके लिए सरकार बाकायदा ‘इंटर्नशिप’ और ‘इनक्यूबेशन प्रोग्राम’ शुरू करने जा रही है। इस व्यवस्था के तहत छात्रों को केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें यह सिखाया जाएगा कि कैसे खेती-किसानी में नई तकनीकों, जैसे कि ड्रोन टेक्नोलॉजी, सॉइल टेस्टिंग ऐप्स (मिट्टी जांच ऐप), ऑर्गेनिक फार्मिंग और स्मार्ट सिंचाई प्रणालियों का इस्तेमाल करके मुनाफा कमाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि जब देश के युवा आधुनिक तकनीकों से लैस होकर ग्रामीण इलाकों में जाएंगे, तो बिहार के पारंपरिक कृषि ढांचे में एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलेगा।
स्वरोजगार के लिए मिलेगी बड़ी आर्थिक मदद
अक्सर देखा जाता है कि युवाओं के पास शानदार बिजनेस आइडिया तो होते हैं, लेकिन पैसों की कमी या सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते। इस समस्या को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने वित्तीय मदद का भी पूरा खाका तैयार किया है। स्टार्टअप्स के साथ ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जो छात्र अपना खुद का स्टार्टअप या एग्री-क्लीनिक शुरू करना चाहेंगे, उन्हें राज्य सरकार की विभिन्न रोजगार योजनाओं और कृषि उद्यमी योजनाओं के तहत आसान किस्तों पर लोन और भारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, सरकार इन युवा उद्यमियों को बाजार से सीधे जोड़ने (Market Linkage) में भी मदद करेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि वे जो भी उत्पाद या सेवाएं तैयार करेंगे, उन्हें बेचने के लिए बिचौलियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और वे सीधे किसानों या बड़े खरीदारों तक अपनी पहुंच बना सकेंगे।
बिहार की खेती को मिलेगा ‘स्मार्ट टच’
इस योजना का दोहरा लाभ होने वाला है। एक तरफ जहाँ युवाओं को स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी तरफ बिहार के आम किसानों को भी इसका जबरदस्त फायदा पहुंचेगा। जब कृषि के एक्सपर्ट छात्र खुद गांवों में जाकर स्टार्टअप मॉडल पर काम करेंगे, तो स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह बहुत आसानी से और कम लागत में मिल सकेगी। चाहे वह फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव हो, या कम पानी में ज्यादा पैदावार देने वाली फसलें उगाना हो—यह युवा उद्यमी किसानों के लिए ‘गाइड’ की भूमिका निभाएंगे। इससे बिहार में फसलों की बर्बादी कम होगी और किसानों की आमदनी में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
पलायन रोकने में मिलेगी बड़ी कामयाबी
बिहार में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह योजना राज्य के भीतर ही प्रतिभाओं को रोकने में गेमचेंजर साबित होगी। जब युवाओं को अपने ही गृह राज्य, अपने ही जिले या गांव में रहकर लाखों रुपये कमाने और एक प्रतिष्ठित बिजनेस खड़ा करने का मौका मिलेगा, तो वे बाहर जाने की बजाय बिहार के विकास में अपना योगदान देना पसंद करेंगे। सरकार बहुत जल्द इस योजना के क्रियान्वयन के लिए गाइडलाइंस जारी करने जा रही है और आगामी सत्र से ही छात्रों को इसके तहत पंजीकृत करना शुरू कर दिया जाएगा।






