
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत की विदेश नीति को नई गति देने के उद्देश्य से विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से छह देशों की महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियां, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका जैसे विषय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उभर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह यात्रा 5 से 15 जुलाई तक चलेगी और इसमें कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, अमेरिका तथा बेल्जियम शामिल हैं।
खाड़ी देशों से होगी दौरे की शुरुआत
यात्रा के पहले चरण में विदेश मंत्री कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान का दौरा करेंगे। इन देशों के शीर्ष नेतृत्व और विदेश मंत्रियों के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकें प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श होगा।
संयुक्त राष्ट्र अभियान को मिलेगा नया मंच
खाड़ी देशों की यात्रा पूरी करने के बाद विदेश मंत्री न्यूयॉर्क पहुंचेंगे, जहां भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 2028-29 की अस्थायी सदस्यता के लिए अपने अभियान की औपचारिक शुरुआत करेगा। भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और सुधार की मांग करता रहा है। इस अभियान के माध्यम से भारत विभिन्न देशों का समर्थन जुटाने की दिशा में सक्रिय प्रयास करेगा।
ब्रुसेल्स में व्यापार और प्रौद्योगिकी पर होगी चर्चा
दौरे के अंतिम चरण में विदेश मंत्री बेल्जियम के ब्रुसेल्स जाएंगे, जहां भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की तीसरी बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
बदलते वैश्विक माहौल में बढ़ा दौरे का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है। भारत ऊर्जा आयात, समुद्री व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से इस क्षेत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है। ऐसे में यह दौरा क्षेत्रीय स्थिरता और भारत के दीर्घकालिक हितों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आर्थिक और रणनीतिक संबंधों पर रहेगा फोकस
भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। ऊर्जा आपूर्ति के अलावा निवेश, आधारभूत ढांचा, खाद्य सुरक्षा और नई तकनीकों में सहयोग भी दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का मानना है कि उच्चस्तरीय वार्ताओं से इन क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी और रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।
भारत की वैश्विक भूमिका को मिलेगा नया आयाम
विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह छह देशों का दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों के साथ गहरे सहयोग के जरिए भारत बहुपक्षीय मंचों पर अपनी सक्रिय भागीदारी और प्रभाव को और बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।






