
संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। इस बेहद जोखिम भरे क्षेत्र से भारतीय जहाज लगातार गुजर रहे हैं और देश की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि इस दौरान जहाजों और उनके चालक दल को गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई जहाजों को सैन्य निगरानी और विशेष सुरक्षा इंतजामों के बीच अपनी यात्रा पूरी करनी पड़ रही है।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य ऊर्जा संसाधनों का इसी रास्ते से दुनिया भर में पहुंचता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए आयात करता है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा भाग इस संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का संकट पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
युद्ध और तनाव ने बढ़ाई समुद्री खतरे की आशंका
इस वर्ष पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य संघर्ष के बाद होर्मुज क्षेत्र में हालात काफी अस्थिर हो गए हैं। कई रिपोर्टों में जहाजों पर हमले, गोलीबारी, समुद्री बारूदी सुरंगों और सैन्य गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग पर अपने जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है। बीमा कंपनियों ने भी जोखिम बढ़ने के कारण प्रीमियम में भारी वृद्धि की है।
भारतीय जहाजों के सामने बड़ी चुनौती
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना है। देश बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और एलपीजी खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में जहाजों का संचालन रोकना आसान विकल्प नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक कई भारतीय जहाजों को अत्यधिक सावधानी के साथ इस क्षेत्र से गुजरना पड़ा है। कुछ मौकों पर भारतीय जहाजों के आसपास गोलीबारी जैसी घटनाओं की भी सूचना सामने आई थी, जिसके बाद सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई।
भारतीय नौसेना भी निभा रही अहम भूमिका
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत की है। ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार भारतीय युद्धपोत और नौसैनिक संसाधन खाड़ी क्षेत्र के आसपास तैनात हैं ताकि जरूरत पड़ने पर सहायता प्रदान की जा सके। इससे भारतीय जहाजों को कुछ हद तक सुरक्षा का भरोसा मिला है।
कम हुआ जहाजों का आवागमन
युद्ध और सुरक्षा संकट के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में टैंकर और मालवाहक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब कई कंपनियां जोखिम के कारण वैकल्पिक विकल्प तलाश रही हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में समुद्री यातायात में बड़ी कमी आई है।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। एलपीजी, कच्चे तेल और अन्य ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने पर कीमतों में तेजी और आपूर्ति संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। यही कारण है कि भारत लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्थाओं पर भी काम कर रहा है।
वैश्विक बाजार भी रखे हुए हैं नजर
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और अंतरराष्ट्रीय निवेशक इस क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। यदि तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी वजह से दुनिया के कई देश समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर लगातार सक्रिय बने हुए हैं।
जोखिम के बावजूद जारी है भारत का मिशन
मौजूदा हालात में भारतीय जहाजों का इस खतरनाक समुद्री मार्ग से गुजरना केवल व्यापारिक गतिविधि नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। जोखिम और अनिश्चितताओं के बावजूद भारत अपने आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी।






