
संवाद 24 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एलपीजी गैस की किल्लत ने अब आम लोगों के साथ-साथ घरेलू कामगारों की जिंदगी पर भी गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई घरों में काम करने वाली महिलाएं और मजदूर अब मजबूर होकर पारंपरिक चूल्हों पर खाना बनाने लगे हैं। इससे उनका समय और मेहनत बढ़ रही है दरअसल, शहर के कई इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने और समय पर रिफिल न मिलने की समस्या सामने आ रही है। इसके चलते घरेलू कामगारों और दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोज़ाना खाना बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई लोग घंटों गैस एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
महंगे विकल्प और बढ़ती मुश्किलें
गैस की कमी के कारण लोग अब महंगे छोटे सिलेंडर या ब्लैक मार्केट का सहारा लेने को मजबूर हैं। लेकिन इन विकल्पों की कीमत इतनी ज्यादा है कि कम आय वाले लोगों के लिए इन्हें खरीद पाना संभव नहीं है। यही वजह है कि कई परिवार लकड़ी, कोयला और गोबर के उपले जैसे पारंपरिक ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बदलाव ने घरेलू कामगारों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां गैस पर जल्दी खाना बन जाता था, वहीं अब चूल्हे पर खाना पकाने में ज्यादा समय और मेहनत लग रही है। इससे उनके काम के घंटे प्रभावित हो रहे हैं और कमाई पर भी असर पड़ रहा है।
गैस की कीमत और सप्लाई बना संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल सप्लाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कीमतों में बढ़ोतरी और अनियमित वितरण भी इसकी बड़ी वजह है। कई जगहों पर ब्लैक मार्केट में गैस की कीमतें कई गुना तक बढ़ गई हैं, जिससे गरीब वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में संघर्ष, ने भी ईंधन सप्लाई चेन पर असर डाला है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जहां बड़ी आबादी एलपीजी पर निर्भर है।
पलायन की बढ़ती चिंता
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ दिहाड़ी मजदूर और घरेलू कामगार अब दिल्ली छोड़कर अपने गांव लौटने का फैसला कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब शहर में खाना बनाना ही मुश्किल हो गया है, तो यहां रहना और गुजारा करना संभव नहीं है।
सरकार के दावे बनाम जमीनी हकीकत
हालांकि सरकार की ओर से बार-बार यह कहा जा रहा है कि राजधानी में गैस की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। लोगों का कहना है कि अगर सप्लाई सामान्य है, तो उन्हें सिलेंडर के लिए इतनी परेशानी क्यों झेलनी पड़ रही है। यही सवाल अब इस संकट को और गंभीर बना रहा है।






