
संवाद 24 नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान पर प्रस्तावित बमबारी को दो सप्ताह के लिए स्थगित करने की घोषणा की है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन चुकी थी और दुनिया तीसरे बड़े वैश्विक संघर्ष की आशंका से चिंतित थी। इस फैसले के पीछे कूटनीतिक प्रयासों की अहम भूमिका बताई जा रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद यह सहमति बनी, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की थी। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने यह फैसला पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत के बाद लिया।
शर्तों के साथ रुका हमला
हालांकि यह कोई पूर्ण युद्धविराम नहीं है। अमेरिका ने साफ किया है कि यह “दोतरफा संघर्ष विराम” है, जिसकी सबसे बड़ी शर्त ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलना है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। अगर ईरान इस शर्त को मानता है, तो दोनों देशों के बीच वार्ता आगे बढ़ सकती है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान की ओर से एक 10 बिंदुओं का प्रस्ताव भी सामने आया है, जिसे बातचीत के लिए आधार माना जा रहा है।
आखिरी मिनट में टला बड़ा हमला
जानकारी के मुताबिक, यह फैसला उस समय लिया गया जब अमेरिका कुछ ही घंटों में ईरान पर बड़ा सैन्य हमला करने वाला था। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले से महज 90 मिनट पहले यह घोषणा की गई, जिससे संभावित बड़े विनाश को टाल दिया गया। इससे पहले ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानीं तो “पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।” ऐसे बयान से हालात बेहद गंभीर हो गए थे।
युद्ध की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह संघर्ष फरवरी 2026 में तब शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया और पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव फैल गया। इस युद्ध के कारण हजारों लोगों की जान जा चुकी है और वैश्विक बाजार, खासकर तेल की कीमतों पर भारी असर पड़ा है।
क्या खत्म होगा संकट?
हालांकि इस 14 दिन के विराम को एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है। ईरान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बातचीत का मतलब युद्ध का अंत नहीं है और वह अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा। इस बीच, दोनों देशों के बीच जल्द ही बातचीत शुरू होने की संभावना है, जिसमें दीर्घकालिक शांति समझौते पर चर्चा हो सकती है।






