
संवाद 24 नई दिल्ली। विदेश की सरजमीं पर बैठकर भारत में खौफ और उगाही का सिंडिकेट चलाने वाले गैंगस्टरों पर भारतीय जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में देश की सुरक्षा व जांच एजेंसियों को एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुका कुख्यात मोस्ट-वांटेड गैंगस्टर हिमांशु भाऊ आखिरकार कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सका। अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए उसे अमेरिका से गिरफ्तार कर लिया है। हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी को संगठित अपराध जगत, विशेष रूप से लॉरेंस बिश्नोई विरोधी गठजोड़ के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
फर्जी पासपोर्ट के सहारे देश से हुआ था फरार
जांच एजेंसियों से मिले ब्योरे के मुताबिक, हिमांशु भाऊ काफी समय से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और हरियाणा पुलिस की मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में शीर्ष पर चल रहा था। भारत में उसके खिलाफ कत्ल, जानलेवा हमले, रंगदारी, किडनैपिंग और अवैध हथियारों की तस्करी के दर्जनों संगीन मामले दर्ज हैं। जब भारतीय पुलिस ने उसकी घेराबंदी कड़ी कर दी थी, तब वह जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान के आधार पर तैयार पासपोर्ट के जरिए भारत की सीमा से बाहर भागने में कामयाब हो गया था। शुरुआती दौर में उसके पुर्तगाल और यूरोप के कई अन्य ठिकानों में छिपकर नेटवर्क संचालित करने के इनपुट मिले थे। भारत की सिफारिश पर अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन ‘इंटरपोल’ ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा था। इंटरपोल और भारतीय खुफिया तंत्र लगातार उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स और वित्तीय लेन-देन पर नजर रखे हुए थे। जैसे ही उसके अमेरिका में होने की पुख्ता पुष्टि हुई, भारतीय एजेंसियों ने अमेरिकी अधिकारियों और एफबीआई के साथ गोपनीय डॉजियर साझा किया, जिसके बाद एफबीआई ने उसे दबोच लिया।
यूट्यूबर एल्विश यादव के घर फायरिंग से लेकर व्यापारियों में दहशत तक
हिमांशु भाऊ और उसके गुर्गों का खौफ उत्तर भारत के कई शहरों में लगातार चर्चा का विषय बना रहा है। हाल के दिनों में वह उस वक्त जबरदस्त सुर्खियों में आया था जब लोकप्रिय यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी विजेता एल्विश यादव के घर पर दिनदहाड़े अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस सनसनीखेज गोलीबारी की जिम्मेदारी हिमांशु भाऊ गिरोह ने सार्वजनिक रूप से ली थी। इसके अलावा, भाऊ सिंडिकेट ने दिल्ली-एनसीआर, रोहतक, सोनीपत और झज्जर के नामी कारोबारियों, बिल्डरों और शोरूम मालिकों को विदेशी नंबरों से इंटरनेट कॉल कर करोड़ों रुपये की प्रोटेक्शन मनी (रंगदारी) मांगकर दहशत का माहौल बना रखा था। जो व्यापारी उसकी मांग ठुकराते थे, उनके प्रतिष्ठानों पर आधुनिक हथियारों से लैस उसके शूटरों द्वारा ताबड़तोड़ गोलियां चलवा दी जाती थीं।
लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का सबसे कट्टर प्रतिद्वंद्वी
अपराध की दुनिया में हिमांशु भाऊ को तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के सिंडिकेट का सबसे बड़ा और आक्रामक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। लॉरेंस गिरोह के बढ़ते प्रभाव को सीधी चुनौती देने के लिए भाऊ ने दिल्ली के कुख्यात नीरज बवानिया, नवीन बाली और बंबीहा गैंग के साथ मजबूत आपराधिक गठजोड़ बना रखा था। जेल से बाहर और विदेश में बैठकर वह इस संयुक्त सिंडिकेट के लिए शूटरों की भर्ती, उन्हें हथियार और पनाह मुहैया कराने का काम देख रहा था। उसकी इस गिरफ्तारी से जेल में बंद और बाहर सक्रिय दोनों गुटों के बीच चलने वाली वर्चस्व की खूनी जंग पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।
भारत प्रत्यर्पण की तैयारी में जुटीं केंद्रीय एजेंसियां
अमेरिकी धरती पर हिमांशु भाऊ के पकड़े जाने के बाद अब भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) उसके त्वरित प्रत्यर्पण (Extradition) या निर्वासन (Deportation) की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई हैं। चूंकि उसने भारत से फरार होने के लिए फर्जी पहचान और जाली यात्रा दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था, इसलिए भारतीय एजेंसियां अमेरिकी न्याय विभाग के समक्ष मजबूत दस्तावेज पेश कर रही हैं ताकि उसे जल्द से जल्द भारत लाकर सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हिमांशु भाऊ को भारत लाने में सफलता मिलती है, तो उत्तर भारत में सक्रिय कई शूटरों, अवैध विदेशी फंडिंग और सिंडिकेट के मददगारों के बड़े राज बेपर्दा होंगे, जिससे कई अनसुलझे मामलों की कड़ियां जुड़ सकेंगी।






