
संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात अचानक बेहद विस्फोटक मोड़ पर पहुँच गए हैं। सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत स्थित दम्माम के प्रतिष्ठित ‘किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ को निशाना बनाकर किए गए एक बड़े हमले ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में खलबली मचा दी है। इस भीषण वारदात में एक व्यक्ति की जान चली गई है, जबकि आठ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हमले के तुरंत बाद मची अफरा-तफरी के बीच सऊदी प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया, लेकिन इस घटना की गूंज वैश्विक कूटनीति के गलियारों में भी सुनाई दे रही है। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए अमेरिका ने अपने राजनयिकों और नागरिकों के लिए आपातकालीन निकासी का निर्देश जारी कर दिया है, जिससे क्षेत्र में एक बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है।
हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी और जानमाल का नुकसान
सऊदी सिविल एविएशन अथॉरिटी द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हमला बुधवार शाम के समय उस वक्त हुआ जब हवाई अड्डे पर सामान्य परिचालन जारी था। अचानक हुए इस प्रहार से टर्मिनल परिसर और आसपास के हिस्सों में भारी अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि घायलों में से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है, जिनका इलाज नजदीकी सैन्य और नागरिक अस्पतालों में किया जा रहा है। हमले से एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे को भी काफी भौतिक क्षति पहुँची है, जिसका तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा आकलन किया जा रहा है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों – चाहे वे ड्रोन हों या लंबी दूरी के प्रोजेक्टाइल – की तकनीकी जांच में जुटी हैं, मगर घटना के तौर-तरीके सीधे तौर पर यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की हालिया रणनीति की ओर इशारा कर रहे हैं।
अमेरिका का कड़ा कदम: राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश
इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वॉशिंगटन ने बिना किसी देरी के सऊदी अरब में मौजूद अपने मिशन के लिए कड़ा सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने रियाद स्थित दूतावास और अन्य वाणिज्य दूतावासों में तैनात गैर-जरूरी राजनयिक कर्मचारियों तथा उनके परिजनों को तुरंत देश छोड़ने का फरमान सुनाया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका का यह कदम दर्शाता है कि खुफिया एजेंसियों को आने वाले दिनों में सऊदी अरब के नागरिक व सामरिक ठिकानों पर और अधिक घातक हमलों का अंदेशा है। अमेरिका ने इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र और उसके आसपास रहने वाले अपने नागरिकों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
ऊर्जा के ठिकानों पर भी खतरा, भारतीय कामगार घायल
चिंता की बात केवल हवाई अड्डों तक सीमित नहीं है, बल्कि सऊदी अरब की जीवनरेखा माने जाने वाले ऊर्जा संयंत्र भी इन हमलों के निशाने पर आ रहे हैं। दम्माम की घटना के साथ ही सऊदी अरब के प्रमुख तेल उत्पादन केंद्र ‘शैबा ऑयलफील्ड’ पर भी हमला किए जाने की खबर सामने आई है। इस हमले की चपेट में आने से वहां कार्यरत एक भारतीय नागरिक घायल हो गया है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि वह स्थानीय प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन के लगातार संपर्क में है। भारतीय मिशन ने भरोसा दिलाया है कि घायल नागरिक की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है और उसे हर संभव चिकित्सा एवं राजनयिक मदद मुहैया कराई जा रही है। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं, ऐसे में तेल क्षेत्रों और नागरिक हवाई अड्डों पर हमले भारत के लिए भी गहरी चिंता का विषय बन गए हैं।
बार-बार क्यों सुलग रहा है खाड़ी का आकाश?
बीते कुछ समय से यमन सीमा से सऊदी अरब के विभिन्न शहरों, विशेषकर सीमावर्ती इलाकों और प्रमुख हवाई अड्डों को लगातार ड्रोन व मिसाइल हमलों का शिकार बनाया जा रहा है। नाजरान से लेकर दम्माम तक फैली यह असुरक्षा अब सामान्य उड़ानों पर भी असर डालने लगी है। कई अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों ने सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अपनी उड़ानें अस्थायी तौर पर रद्द या पुनर्निर्धारित करनी शुरू कर दी हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि नागरिक ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाना रणनीतिक दबाव बनाने की एक खतरनाक कोशिश है। यदि सऊदी वायु रक्षा प्रणाली और विरोधी गुटों के बीच यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र एक ऐसे बहुपक्षीय संकट में घिर सकता है जिसका असर वैश्विक कच्चे तेल के बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार आपूर्ति पर पड़ना तय है। फिलहाल, दम्माम एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया गया है और पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित है।






