
संवाद 24 नई दिल्ली। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की विस्तारवादी नीतियों और अप्रत्याशित हिमाकतों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने अपनी सीमा सुरक्षा रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव कर दिया है। 3,488 किलोमीटर लंबी दुर्गम भारत-चीन सीमा की निगहबानी करने वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने पारंपरिक युद्ध तौर-तरीकों को पीछे छोड़ते हुए हाई-टेक युद्धनीति अपना ली है। ITBP ने अपनी सभी सीमावर्ती बटालियनों में समर्पित ‘ड्रोन प्लाटून’ का गठन कर दिया है। इसके साथ ही सीमा पर शून्य से 40 डिग्री नीचे तापमान और बमबारी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर अत्याधुनिक भूमिगत बंकरों (Underground Bunkers) का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
पारंपरिक युद्ध के दिन लदे, ड्रोन और तकनीक ही नया हथियार
राजस्थान के अलवर स्थित बल के बेस पर आयोजित एक अलंकरण समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए ITBP के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत सिंह कपूर ने स्पष्ट किया कि चीन भारत का सबसे बड़ा रणनीतिक विरोधी है। उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी सेना (PLA) को अत्यधिक आधुनिक बनाने में भारी निवेश किया है, इसलिए पुराने ढर्रे पर चलकर उसका मुकाबला नहीं किया जा सकता। डीजी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में जारी हालिया युद्धों का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि आधुनिक रणक्षेत्र में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक ने शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल दिया है। आज तकनीक के बल पर एक छोटा देश भी किसी वैश्विक महाशक्ति के दांत खट्टे कर सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आईटीबीपी अब न सिर्फ ड्रोन ऑपरेटर्स को उच्चस्तरीय ट्रेनिंग दे रही है, बल्कि खुद भी स्वदेशी ड्रोन तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
4,000 करोड़ का मेगा प्लान: हवा से जमीन तक फुलप्रूफ घेराबंदी
सुरक्षा तंत्र को भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल ढालने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी के 4,000 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस महापरियोजना में से लगभग 1,000 करोड़ रुपये विशेष रूप से ड्रोन सर्विलांस और ड्रोन-रोधी हथियारों पर खर्च किए जाएंगे। शुरुआती चरण में मिले 400 करोड़ रुपये में से 70 फीसदी फंड को पूरी तरह ड्रोन युद्ध क्षमताओं को धार देने के लिए झोंक दिया गया है। सीमा की हर चौकी अब 24 घंटे रियल-टाइम एरियल सर्विलांस के दायरे में होगी, जिससे दुश्मन की किसी भी छोटी से छोटी हरकत को तुरंत पकड़ा जा सके।
‘स्ट्राइक कोर्स’ और ‘शौर्य कमांडो’: गलवान जैसी झड़प का मुकम्मल इलाज
जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों द्वारा किए गए धोखेबाज हमले से सबक लेते हुए आईटीबीपी ने अपनी लड़ाकू क्षमता को कई गुना मजबूत किया है। बल ने जवानों के लिए ‘स्ट्राइक’ (Strike) नाम से एक नया और कठोर क्लोज-कॉम्बैट युद्ध कोर्स तैयार किया है। इसका उद्देश्य बर्फीली चोटियों पर आमने-सामने की खूनी झड़पों में दुश्मन को पलक झपकते धूल चटाना है। वर्ष 2027 के अंत तक बल के सभी 95,000 जवानों को इस विशेष कमांडो ट्रेनिंग से लैस करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा, आईटीबीपी ने घातक ‘शौर्य कमांडो’ की टुकड़ियां भी मैदान में उतार दी हैं। इन कमांडोज ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में चीनी सैनिकों के साथ हुए फेस-ऑफ के दौरान अपने अद्भुत शौर्य का लोहा मनवाया था। अब प्रत्येक बॉर्डर बटालियन में शौर्य कमांडोज की नियमित तैनाती की जा रही है।
ज़मीन के नीचे महफूज ठिकाने: पायलट प्रोजेक्ट शुरू
आधुनिक युद्धकला में सतह पर बनी इमारतें मिसाइल, रॉकेट और ड्रोन्स का सबसे आसान लक्ष्य होती हैं। इसे देखते हुए आईटीबीपी ने एलएसी के अग्रिम मोर्चों पर जमीन के नीचे विशाल बंकरों और अंडरग्राउंड शेल्टर्स का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे ये बंकर अत्यधिक सुरक्षित होने के साथ-साथ सभी आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त हैं। आने वाले समय में पूरी सीमा पर जवानों के रहने, हथियारों के भंडारण, कमांड कंट्रोल सेंटर और अस्पताल तक जमीन के नीचे सुरक्षित शिफ्ट किए जाएंगे।
शून्य से नीचे तापमान में जवानों को राहत
कड़ाके की हाड़ कंपाने वाली ठंड में तैनात हिमवीरों के जीवन को सुगम बनाने के लिए भी युद्धस्तर पर काम हुआ है। शून्य से नीचे तापमान वाली 383 बैरकों में से 342 को पूरी तरह इंसुलेटेड कर दिया गया है। वाहनों को भीषण बर्फबारी में तुरंत चालू करने के लिए विशेष ‘कोल्ड स्टार्ट किट’ और दुर्गम चौकियों पर बिजली के लिए 141 आधुनिक जनरेटर और सोलर वॉटर हीटर लगाए गए हैं। साथ ही रफ टेरेन पर तेजी से दौड़ने वाले ऑल-टेरेन व्हीकल्स (ATV) भी सीमाओं पर भेजे जा रहे हैं। इन तमाम कदमों से आईटीबीपी दुनिया की सबसे सक्षम उच्च-पर्वतीय युद्धक शक्ति बनकर उभर रही है।






