ज़हरीले पानी में सांपों से सामना, फिर भी नहीं थमे कदम: क्या सोशल मीडिया के ‘बिट्टू तबाही’ ने अकेले बदल दी अजनार नदी की तकदीर?

संवाद 24 मध्य प्रदेश। अक्सर लोग समाज, तंत्र और प्रशासन की कमियों का रोना रोते रह जाते हैं, लेकिन कुछ जुनूनी युवा ऐसे भी होते हैं जो बदलाव का इंतज़ार करने के बजाय खुद बदलाव की इबारत लिख देते हैं। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित ब्यावरा कस्बे से एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली और प्रेरणादायक दास्तान सामने आई है। यहाँ बीएससी के एक 21 वर्षीय छात्र ने वह करिश्मा कर दिखाया, जिसे करने में बड़े-बड़े प्रशासनिक तंत्र भी वर्षों लगा देते हैं। सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस नौजवान ने दम तोड़ती, कचरे के ढ़ेर में तब्दील हो चुकी पवित्र अजनार नदी के पुनर्जीवन की ऐसी अलख जगाई कि आज पूरा प्रदेश उनकी लगन का कायल हो चुका है। खुद सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस युवा कर्मयोगी से मुलाकात कर उनकी पीठ थपथपाई है।

एक अकेला कदम और 26 जनवरी का वह ऐतिहासिक संकल्प
इस प्रेरणादायी कहानी के नायक हैं सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें डिजिटल दुनिया में लोग ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जानते हैं। ब्यावरा के बीच से गुजरने वाली अजनार नदी दशकों से शहर भर के कचरे, प्लास्टिक, मलबे और दूषित नालों के कारण एक बदबूदार गंदे नाले में तब्दील हो चुकी थी। लोग नाक पर रुमाल रखकर वहां से गुजरते थे, लेकिन सुरेंद्र के मन में अपनी इस जीवनदायिनी नदी को बचाने की एक गहरी टीस थी। सुरेंद्र ने 26 जनवरी के पावन दिन किसी सरकारी मदद या भीड़ के जुटने की प्रतीक्षा किए बिना अकेले ही नदी के गंदे पानी में उतरने का फैसला किया। हाथ में फावड़ा, तगाड़ी और दिल में अटूट हौसला लेकर उन्होंने नदी के किनारों से वर्षों पुराना जमा कचरा निकालना शुरू किया। शुरुआत में लोगों ने उन्हें पागल समझा, किसी ने ताने कसे तो किसी ने इसे महज़ कुछ दिनों का दिखावा करार दिया, लेकिन सुरेंद्र का इरादा चट्टान की तरह मजबूत था।

ज़हरीला पानी, सांपों का खौफ और जानलेवा इन्फेक्शन
यह सफर फूलों की सेज नहीं, बल्कि कांटों भरा था। जब सुरेंद्र दलदल और सड़ते कचरे के बीच उतरते थे, तो कई बार उनका सामना ज़हरीले सांपों और बिच्छुओं से हुआ। अजनार नदी के किनारे स्थानीय मंदिर के पास सफाई करते समय अत्यधिक दूषित पानी और केमिकल युक्त कचरे के संपर्क में आने से सुरेंद्र के अंगों में गंभीर त्वचा संक्रमण (स्किन इन्फेक्शन) फैल गया। दर्द और स्वास्थ्य जोखिम इतने बढ़ गए थे कि कोई भी सामान्य इंसान पीछे हट जाता, लेकिन सुरेंद्र का जज़्बा डिगा नहीं। उन्होंने इलाज कराया और ठीक होते ही दोबारा उसी नदी के पानी में उतर गए। उनका यह त्याग केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं था, बल्कि यह प्रकृति के प्रति एक युवा का अगाध समर्पण था।

‘पहले और बाद’ की तस्वीरों ने इंटरनेट पर मचाया तहलका
महीनों की अनथक मेहनत के बाद जब अजनार नदी का स्वरूप बदलने लगा, तो सुरेंद्र ने सोशल मीडिया पर नदी की ‘पहले और बाद’ (Before & After) की तस्वीरें और वीडियो साझा किए। तस्वीरों में दिख रहा था कि जिस जगह कभी बदबूदार मलबे और प्लास्टिक का साम्राज्य था, वहां अब साफ पानी बह रहा था और घाट चमक रहे थे। ये तस्वीरें देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। लाखों लोगों ने इस प्रयास की सराहना की। इस डिजिटल गूंज का नतीजा यह निकला कि जो स्थानीय नागरिक पहले तमाशबीन बने थे, वे भी सुरेंद्र के साथ कदम से कदम मिलाकर नदी की सफाई में जुट गए। मजरूह सुल्तानपुरी का यह शेर उन पर बिल्कुल सटीक बैठता है – ‘मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।’

प्रशासन की मशीनें उतरीं और मुख्यमंत्री ने बांधे तारीफों के पुल
जनता के साथ आने के बाद स्थानीय प्रशासन और ब्यावरा नगर पालिका भी हरकत में आई। नगर पालिका के सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पालिका की तरफ से नदी से भारी गाद और मलबा हटाने के लिए पोकलेन मशीनें तैनात कर दीं। अधिकारियों ने भी माना कि जो काम सालों में नहीं हो सका, उसकी नींव इस 21 साल के छात्र ने अकेले रख दी। इस अभूतपूर्व पहल की खबर जब राजधानी भोपाल पहुँची, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद बिट्टू (सुरेंद्र सिंह) को आमंत्रित कर उनसे मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरेंद्र ने सिर्फ एक नदी को पुनर्जीवित नहीं किया, बल्कि पूरे समाज को यह सिखाया है कि बड़े परिवर्तन के लिए किसी विशाल संगठन या बजट की नहीं, बल्कि एक नेक और अटूट संकल्प की जरूरत होती है। सीएम ने यह भी जोड़ा कि मध्य प्रदेश सरकार के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का मूल उद्देश्य भी यही है कि आम जनता जल स्रोतों के संरक्षण के लिए आगे आए।

अब 14.77 करोड़ के एसटीपी से होगा स्थाई समाधान
नदी की सतही सफाई तो सुरेंद्र और स्थानीय लोगों ने अपनी मेहनत से कर दी, लेकिन अजनार नदी के सामने अब भी सबसे बड़ी चुनौती शहर के पांच बड़े गंदे नाले हैं, जो सीधे इसमें गिरते हैं। इस समस्या को जड़ से मिटाने के लिए नगर पालिका ने लगभग 14.77 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्लांट के निर्माण के बाद शहर का गंदा पानी शोधित होकर ही आगे जाएगा, जिससे अजनार नदी हमेशा के लिए स्वच्छ और अविरल बनी रहेगी। सुरेंद्र सिंह उर्फ बिट्टू की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि अगर देश का युवा ठान ले, तो वह मृतप्राय नदियों में भी नई ज़िंदगी फूंक सकता है।

Madhvi Singh
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