प्राइवेट फोटो लीक की धमकी मिले, ब्लैकमेलर मांग रहा है पैसे, तो बिल्कुल न घबराएं, ऐसे करें साइबर क्राइम की शिकायत

संवाद 24 डेस्क। डिजिटल दौर में निजी तस्वीरें और वीडियो किसी व्यक्ति की सबसे संवेदनशील डिजिटल संपत्ति बन चुके हैं। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और वीडियो कॉल के बढ़ते इस्तेमाल के साथ निजी तस्वीरों के दुरुपयोग, मॉर्फ्ड इमेज, डीपफेक और ब्लैकमेल जैसी घटनाओं का खतरा भी सामने आया है। कई मामलों में आरोपी पहले निजी फोटो या वीडियो हासिल करता है और फिर उसे परिवार, दोस्तों या सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे या किसी दूसरी मांग को पूरा करने का दबाव बनाता है। इसे आम तौर पर सेक्सटॉर्शन या डिजिटल ब्लैकमेल के रूप में देखा जाता है। ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात है कि पीड़ित व्यक्ति डरकर आरोपी की मांग पूरी करने के बजाय सबूत सुरक्षित करे और तत्काल शिकायत दर्ज कराए। भारत सरकार का National Cyber Crime Reporting Portal साइबर अपराधों की ऑनलाइन शिकायत के लिए आधिकारिक व्यवस्था उपलब्ध कराता है।

फोटो लीक की धमकी को हल्के में लेना क्यों खतरनाक है?
अक्सर पीड़ित को लगता है कि यदि पैसे दे दिए जाएं तो मामला खत्म हो जाएगा। लेकिन साइबर ब्लैकमेल में ऐसा जरूरी नहीं है। एक बार भुगतान करने के बाद आरोपी और अधिक पैसे मांग सकता है या नई तस्वीरें, वीडियो अथवा अन्य निजी जानकारी की मांग कर सकता है। इसलिए धमकी मिलने के बाद बातचीत को लंबा खींचने या आरोपी को मनाने की कोशिश करने के बजाय डिजिटल सबूत सुरक्षित रखना अधिक महत्वपूर्ण है।
भारत में ऐसे मामलों की कानूनी प्रकृति घटना के तथ्यों पर निर्भर करती है। यदि कोई व्यक्ति निजी जानकारी, तस्वीर या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर किसी को कोई काम करने के लिए मजबूर करता है, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351 के तहत आपराधिक धमकी का पहलू बन सकता है। वहीं डर पैदा करके संपत्ति या मूल्यवान वस्तु हासिल करने की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 में जबरन वसूली यानी extortion का प्रावधान है।

सबसे पहले क्या करें? सबूत मिटाने की गलती न करें
यदि किसी व्यक्ति को निजी फोटो या वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी मिल रही है तो सबसे पहले चैट, ई-मेल, फोन नंबर, सोशल मीडिया प्रोफाइल, यूजरनेम, URL, भुगतान संबंधी जानकारी और धमकी वाले संदेशों को सुरक्षित करना चाहिए। स्क्रीनशॉट लेने के साथ संभव हो तो मूल चैट और संबंधित डिजिटल फाइलें भी सुरक्षित रखें।
आरोपी के संदेशों को तुरंत डिलीट कर देना या फोन को रीसेट कर देना शिकायत और जांच के दौरान उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य को प्रभावित कर सकता है। National Cyber Crime Reporting Portal भी शिकायत दर्ज करते समय घटना से संबंधित सही और पूरी जानकारी देने पर जोर देता है।
यदि पैसे भेजे जा चुके हैं तो बैंक ट्रांजैक्शन, UPI ID, खाते का विवरण, लेनदेन का समय और संबंधित स्क्रीनशॉट भी सुरक्षित रखें। वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल रिपोर्ट करना महत्वपूर्ण है।

साइबर क्राइम पोर्टल पर कैसे दर्ज करें शिकायत?
भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला National Cyber Crime Reporting Portal साइबर अपराधों की शिकायत के लिए प्रमुख ऑनलाइन माध्यम है। पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों से संबंधित साइबर अपराधों के लिए अलग विकल्प उपलब्ध है। कुछ श्रेणियों में शिकायतकर्ता को गुमनाम रूप से शिकायत करने की सुविधा भी दी गई है।
शिकायत दर्ज करते समय घटना की तारीख, समय, आरोपी से हुई बातचीत, मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट, वेबसाइट लिंक, ई-मेल और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य जैसी जानकारी देना उपयोगी होता है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की पुलिस/कानून प्रवर्तन एजेंसी मामले पर कार्रवाई करती है। पोर्टल स्वयं FIR के समान नहीं है; आगे की कार्रवाई संबंधित पुलिस प्राधिकरण द्वारा की जाती है।

निजी तस्वीर वायरल हो जाए तो क्या करें?
यदि निजी तस्वीर या वीडियो किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट या मैसेजिंग सेवा पर पोस्ट कर दिया गया है तो केवल आरोपी से सामग्री हटाने की मांग करने तक सीमित न रहें। संबंधित प्लेटफॉर्म के रिपोर्टिंग सिस्टम के माध्यम से भी कंटेंट की शिकायत करें और पोस्ट या प्रोफाइल का URL सुरक्षित रखें।
सरकार ने Non-Consensual Intimate Imagery यानी बिना सहमति निजी या अंतरंग तस्वीर/वीडियो के प्रसार से निपटने के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की है। 2025 में MeitY ने NCII कंटेंट के लिए Standard Operating Procedure जारी किया था। इसके बाद फरवरी 2026 में IT Rules में संशोधन के तहत ऐसे मामलों में संबंधित शिकायत मिलने पर मध्यस्थ प्लेटफॉर्म के लिए हटाने या एक्सेस निष्क्रिय करने की समयसीमा को 24 घंटे से घटाकर दो घंटे किया गया। यह व्यवस्था निजी क्षेत्र को दिखाने वाली सामग्री, नग्नता या यौन कृत्य वाली सामग्री और कुछ प्रकार की मॉर्फ्ड या impersonation सामग्री पर भी लागू होती है।
इसलिए पीड़ित को पोस्ट का लिंक, अकाउंट विवरण और शिकायत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखते हुए प्लेटफॉर्म पर तत्काल रिपोर्ट करना चाहिए।

कानून में निजी तस्वीरों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान हैं?
Information Technology Act की धारा 66E निजता के उल्लंघन से संबंधित है। इसके तहत किसी व्यक्ति के निजी क्षेत्र की तस्वीर को उसकी सहमति के बिना ऐसे तरीके से कैप्चर, प्रकाशित या प्रसारित करना, जिससे उसकी निजता का उल्लंघन हो, दंडनीय है। कानून में इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा, दो लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
इसके अलावा परिस्थितियों के आधार पर IT Act की धारा 67 और 67A जैसे प्रावधान इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से संबंधित हो सकते हैं। कौन-सी धारा लागू होगी, यह घटना के वास्तविक तथ्यों और जांच पर निर्भर करता है।
महिलाओं से संबंधित मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 77 भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसमें महिला के निजी कृत्य को देखना, उसकी तस्वीर लेना या उसे प्रसारित करना अपराध के दायरे में आता है। कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी महिला ने तस्वीर लेने के लिए सहमति दी थी, लेकिन उसे तीसरे व्यक्ति तक प्रसारित करने की सहमति नहीं दी थी, तो उस तस्वीर का प्रसार भी अपराध माना जा सकता है।

अगर तस्वीर असली नहीं, AI से बनाई गई हो तो भी शिकायत करें
आज साइबर अपराध का एक नया पहलू AI-generated और deepfake सामग्री है। किसी व्यक्ति की वास्तविक तस्वीर को लेकर उसे आपत्तिजनक या अंतरंग रूप में मॉर्फ करके सोशल मीडिया पर फैलाना भी गंभीर डिजिटल उत्पीड़न का रूप हो सकता है। सरकार ने 2026 में deepfakes और गैर-सहमति वाली अंतरंग तस्वीरों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों को मजबूत किया है।
इसलिए पीड़ित को यह सोचकर चुप नहीं रहना चाहिए कि तस्वीर ‘असली नहीं’ है। यदि उसमें उसकी पहचान का दुरुपयोग हुआ है, तो डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करके शिकायत की जा सकती है।

आरोपी को पैसे देना या नई तस्वीर भेजना कितना सही?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सामान्य सलाह यही है कि ब्लैकमेलर की मांग पूरी करने के बजाय शिकायत और साक्ष्य संरक्षण पर ध्यान दिया जाए। आरोपी को नई निजी तस्वीर, OTP, पासवर्ड, बैंक जानकारी या अन्य संवेदनशील दस्तावेज बिल्कुल न भेजें।
यदि आरोपी ने कोई लिंक भेजा है तो उसे खोलने से भी बचना चाहिए। संभव है कि लिंक के जरिए अकाउंट, डिवाइस या अन्य निजी जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाए। भारत सरकार के साइबर सुरक्षा संसाधन भी नागरिकों को निजी जानकारी और अनुचित तस्वीरें साझा न करने तथा साइबर उत्पीड़न की स्थिति में रिकॉर्ड सुरक्षित रखकर रिपोर्ट करने की सलाह देते हैं।

परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति को बताना कमजोरी नहीं
प्राइवेट फोटो लीक की धमकी मिलने पर पीड़ित अक्सर सामाजिक बदनामी के डर से अकेले समस्या का सामना करता है। यही डर आरोपी की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। ऐसे समय में किसी भरोसेमंद परिवारजन, मित्र, वकील या साइबर अपराध विशेषज्ञ को जानकारी देना मददगार हो सकता है।
यदि मामला गंभीर है या आरोपी लगातार धमकी दे रहा है तो स्थानीय पुलिस से भी संपर्क किया जा सकता है। National Cyber Crime Reporting Portal के अलावा आपात स्थिति में स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए। सरकारी पोर्टल के अनुसार राष्ट्रीय पुलिस हेल्पलाइन 112 और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 उपलब्ध हैं।

डिजिटल सुरक्षा की छोटी-सी सावधानी बचा सकती है बड़ा नुकसान
निजी तस्वीरों को अनजान लोगों के साथ साझा न करना, सोशल मीडिया की privacy settings की समीक्षा करना, मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड इस्तेमाल करना तथा two-factor authentication सक्रिय रखना डिजिटल सुरक्षा की बुनियादी सावधानियां हैं। वीडियो कॉल या ऑनलाइन बातचीत में सामने वाले की पहचान को लेकर सावधान रहना भी जरूरी है।
साइबर अपराधी अक्सर विश्वास, डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। इसलिए कोई व्यक्ति जितनी जल्दी घबराहट से बाहर निकलकर व्यवस्थित तरीके से साक्ष्य सुरक्षित करता है और शिकायत करता है, उतनी ही बेहतर स्थिति में वह कानूनी और तकनीकी मदद हासिल कर सकता है।

डर नहीं, तुरंत कार्रवाई सबसे बड़ा हथियार
प्राइवेट फोटो लीक करने की धमकी केवल सोशल मीडिया की परेशानी नहीं, बल्कि गंभीर साइबर अपराध का रूप ले सकती है। पीड़ित की पहली जिम्मेदारी खुद को दोषी मानना नहीं, बल्कि स्थिति को नियंत्रित करना है। धमकी के स्क्रीनशॉट और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें, आरोपी को अतिरिक्त जानकारी या तस्वीरें न दें, पैसे देने से पहले कानूनी सलाह और शिकायत के विकल्प पर विचार करें तथा National Cyber Crime Reporting Portal पर रिपोर्ट करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निजी तस्वीर साझा करने की सहमति का अर्थ उसे सार्वजनिक करने की सहमति नहीं है। भारतीय कानून और 2026 में मजबूत किए गए डिजिटल कंटेंट नियम पीड़ितों की निजता और गरिमा की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण रास्ते उपलब्ध कराते हैं। ऐसी स्थिति में चुप्पी आरोपी का रास्ता आसान कर सकती है, जबकि समय पर शिकायत और सही डिजिटल साक्ष्य कार्रवाई की दिशा में सबसे मजबूत कदम बन सकते हैं।

Geeta Singh
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