फोन में रखी इन फाइलों से रहें सावधान: एक छोटी गलती बना सकती है डेटा को हैकर्स का निशाना

संवाद 24 डेस्क। स्मार्टफोन अब सिर्फ बातचीत और इंटरनेट इस्तेमाल करने का साधन नहीं रह गया है। आज मोबाइल फोन में बैंक स्टेटमेंट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ऑफिस के दस्तावेज, निजी तस्वीरें, वीडियो, पासवर्ड से जुड़ी जानकारी और कई महत्वपूर्ण फाइलें मौजूद रहती हैं। ऐसे में फोन में मौजूद किसी संदिग्ध फाइल को खोलना या अज्ञात स्रोत से कोई ऐप इंस्टॉल करना उपयोगकर्ता की निजी जानकारी को जोखिम में डाल सकता है। अमर उजाला की हालिया रिपोर्ट में भी PDF, Word डॉक्यूमेंट, ZIP, APK और इंटरनेट से डाउनलोड की गई फाइलों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।

क्या फोन की हर फाइल हैकर्स के लिए खतरा है?
यह समझना जरूरी है कि PDF, फोटो, Word या ZIP फाइल अपने-आप में हैकिंग का प्रमाण नहीं होतीं। खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि फाइल कहां से आई है, उसमें क्या सामग्री है और उसे खोलने या इस्तेमाल करने के लिए फोन पर कौन-सी गतिविधि करनी पड़ रही है। उदाहरण के लिए किसी विश्वसनीय बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया गया दस्तावेज और किसी अनजान नंबर से भेजी गई संदिग्ध PDF को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
साइबर अपराधी अक्सर भरोसेमंद संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को फंसाने की कोशिश करते हैं। बैंक स्टेटमेंट, बिजली बिल, कुरियर, नौकरी, सरकारी नोटिस, इनाम या किसी जरूरी दस्तावेज के नाम पर भेजी गई फाइल उपयोगकर्ता को जल्दी में कार्रवाई करने के लिए प्रेरित कर सकती है। ऐसी स्थिति में बिना सत्यापन फाइल खोलना या उसके अंदर दिए लिंक पर जाना जोखिम बढ़ा सकता है।

PDF और Word फाइल के साथ क्यों बरतें अतिरिक्त सावधानी?
PDF और Word फाइल सामान्य कामकाज में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले दस्तावेजों में शामिल हैं। इसलिए साइबर अपराधियों के लिए भी इनका नाम इस्तेमाल करके लोगों तक पहुंच बनाना आसान हो सकता है। किसी संदिग्ध संदेश के साथ आई फाइल के अंदर लिंक, फर्जी वेबसाइट का पता या उपयोगकर्ता को अतिरिक्त कार्रवाई के लिए प्रेरित करने वाली सामग्री हो सकती है।
यदि कोई व्यक्ति बैंक, सरकारी विभाग या कंपनी के नाम पर भेजी गई फाइल की सत्यता को लेकर आश्वस्त नहीं है तो उसे सीधे संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक ऐप के माध्यम से जानकारी सत्यापित करनी चाहिए। संदेश में दिए गए लिंक पर निर्भर रहने के बजाय संस्था का आधिकारिक वेब पता स्वयं टाइप करना अधिक सुरक्षित तरीका है।

APK फाइल सबसे ज्यादा क्यों चर्चा में रहती है?
Android फोन में APK किसी ऐप की इंस्टॉलेशन फाइल होती है। सामान्य उपयोगकर्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि WhatsApp, SMS, Telegram या किसी अनजान वेबसाइट से प्राप्त APK को बिना जांचे इंस्टॉल न किया जाए।
भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने मार्च 2026 में RTO और e-Challan के नाम पर फैलाए जा रहे एक Android मैलवेयर अभियान के संबंध में चेतावनी जारी की थी। इसमें अपराधी फर्जी संदेशों के जरिए उपयोगकर्ताओं को APK डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित कर रहे थे। CERT-In के अनुसार ऐसे दुर्भावनापूर्ण ऐप SMS, कॉल और अन्य संवेदनशील अनुमतियां मांग सकते हैं तथा वित्तीय जानकारी और OTP जैसी संवेदनशील जानकारी को निशाना बना सकते हैं।
इसलिए किसी संदेश में यदि लिखा हो कि ‘चालान देखने’, ‘KYC पूरी करने’, ‘बैंक खाता अपडेट करने’, ‘नौकरी का दस्तावेज डाउनलोड करने’ या किसी अन्य काम के लिए APK इंस्टॉल करें, तो तुरंत कार्रवाई करने के बजाय पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।

ZIP फाइल को भी बिना सोचे न खोलें
ZIP जैसी archive फाइलों का इस्तेमाल एक साथ कई फाइलें भेजने के लिए किया जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर ZIP फाइल खतरनाक है। लेकिन यदि ऐसी फाइल किसी अनजान व्यक्ति, संदिग्ध ईमेल या अप्रत्याशित संदेश से आई है तो उसे खोलने से पहले स्रोत की पुष्टि करनी चाहिए।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि दुर्भावनापूर्ण सामग्री कभी-कभी archive के भीतर छिपाई जा सकती है। इसलिए केवल फाइल के नाम या extension को देखकर उसे सुरक्षित मान लेना उचित नहीं है।

आधार, पैन और बैंक दस्तावेज फोन में क्यों संवेदनशील हैं?
मोबाइल में मौजूद हर फाइल समान संवेदनशीलता वाली नहीं होती। आधार, पैन, पासपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, बीमा दस्तावेज, वेतन पर्ची और कार्यालय के गोपनीय दस्तावेजों में व्यक्तिगत जानकारी होती है। यदि ऐसी जानकारी गलत हाथों में पहुंच जाए तो पहचान की चोरी, फर्जी आवेदन या वित्तीय धोखाधड़ी जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं।
इसलिए जरूरी दस्तावेजों को अनावश्यक रूप से कई ऐप में शेयर करने या संदिग्ध वेबसाइट पर अपलोड करने से बचना चाहिए। जहां संभव हो, संवेदनशील दस्तावेजों को सुरक्षित स्टोरेज में रखना और जरूरत न होने पर सार्वजनिक या असुरक्षित प्लेटफॉर्म पर साझा न करना बेहतर है। CISA भी मोबाइल उपकरणों में व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी को सीमित रखने और ऐप्स को केवल आवश्यक अनुमति देने की सलाह देता है।

असली खतरा फाइल से ज्यादा उसके साथ आने वाले लिंक में भी हो सकता है
कई साइबर ठगी में उपयोगकर्ता को फाइल के बजाय उसके साथ मौजूद लिंक के जरिए फर्जी वेबसाइट पर पहुंचाया जाता है। वेबसाइट देखने में बैंक, सरकारी विभाग या किसी लोकप्रिय कंपनी जैसी लग सकती है, लेकिन उसका उद्देश्य लॉगिन विवरण, कार्ड जानकारी, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल करना हो सकता है।
CERT-In ने उपयोगकर्ताओं को अनजान लिंक पर क्लिक न करने, संदिग्ध वेबसाइट से बचने और छोटे या संदिग्ध URL को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

ऐप को दी गई परमिशन पर भी रखें नजर
किसी ऐप को इंस्टॉल करने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कदमों में से एक है उसकी permissions की समीक्षा करना। Google के अनुसार Android में उपयोगकर्ता किसी ऐप के लिए कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट्स, SMS, फोटो और वीडियो, फाइलों तथा अन्य सुविधाओं की अनुमति को अलग-अलग नियंत्रित कर सकता है। जरूरत न होने पर अनुमति को बंद किया जा सकता है।
मसलन, यदि कोई साधारण उपयोगिता वाला ऐप ऐसी अनुमति मांग रहा है जिसकी उसके काम के लिए आवश्यकता स्पष्ट नहीं है, तो उपयोगकर्ता को सावधानी बरतनी चाहिए। CERT-In भी संवेदनशील permissions को केवल जरूरत के अनुसार देने की सलाह देता है।

Google Play Protect को बंद न करें
Android उपयोगकर्ताओं के लिए Google Play Protect एक महत्वपूर्ण सुरक्षा परत है। Google के मुताबिक यह Play Store से इंस्टॉल होने वाले ऐप्स की जांच करता है और दूसरे स्रोतों से इंस्टॉल किए गए ऐप्स को भी संभावित रूप से हानिकारक व्यवहार के लिए स्कैन कर सकता है। खतरा मिलने पर यह चेतावनी दे सकता है और कुछ परिस्थितियों में हानिकारक ऐप को निष्क्रिय या हटाने की कार्रवाई भी कर सकता है।
Google स्वयं Play Protect को चालू रखने की सलाह देता है। इसलिए केवल किसी ऐप को फोन में इंस्टॉल कर लेना पर्याप्त नहीं है; उपयोगकर्ता को अपने फोन की सुरक्षा सुविधाओं को भी सक्रिय रखना चाहिए।

फोन सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
साइबर सुरक्षा के लिए बहुत जटिल तकनीकी जानकारी की जरूरत हमेशा नहीं होती। सबसे पहले फोन और सभी ऐप्स को समय पर अपडेट करना चाहिए। दूसरा, अज्ञात स्रोतों से APK या ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए। तीसरा, ऐप permissions की समय-समय पर समीक्षा करनी चाहिए। चौथा, मजबूत स्क्रीन लॉक और जहां संभव हो वहां दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करना चाहिए।
इसके अलावा संदिग्ध SMS, WhatsApp संदेश और ईमेल के साथ आए लिंक या फाइल पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। CERT-In ने विशेष रूप से अज्ञात स्रोतों से APK इंस्टॉल न करने और ‘Install from unknown sources’ विकल्प को बंद रखने की सलाह दी है।

अगर गलती से संदिग्ध APK इंस्टॉल हो जाए तो क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति ने गलती से संदिग्ध APK इंस्टॉल कर लिया है तो उसे इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। CERT-In की सलाह के अनुसार संदिग्ध ऐप को हटाना, डिवाइस को स्कैन करना और यदि वित्तीय जानकारी प्रभावित होने की आशंका हो तो बैंक से तुरंत संपर्क करना जरूरी है। अनधिकृत वित्तीय लेनदेन दिखाई देने पर भारत में 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन और आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से शिकायत की जा सकती है।
यदि संदिग्ध ऐप को SMS, फोन, Accessibility या अन्य संवेदनशील permissions दी गई हैं, तो उन्हें भी तुरंत जांचना चाहिए। पासवर्ड या PIN के प्रभावित होने की आशंका हो तो संबंधित खातों की सुरक्षा जानकारी बदलना भी आवश्यक हो सकता है।

छोटी सावधानी, बड़ी सुरक्षा
स्मार्टफोन में मौजूद हर PDF, फोटो या दस्तावेज को खतरा मानना सही नहीं है। वास्तविक समस्या तब पैदा होती है जब उपयोगकर्ता किसी अज्ञात स्रोत पर भरोसा करके संदिग्ध फाइल खोलता है, APK इंस्टॉल करता है, अनावश्यक permissions देता है या फर्जी लिंक पर संवेदनशील जानकारी दर्ज करता है।
आज जब बैंकिंग, खरीदारी, पहचान और निजी दस्तावेज तक मोबाइल फोन में मौजूद हैं, तब डिजिटल सावधानी भी रोजमर्रा की सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है। फाइल खोलने से पहले स्रोत जांचना, ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता देखना और permissions पर नजर रखना ऐसी छोटी आदतें हैं जो साइबर जोखिम को काफी कम कर सकती हैं।

Geeta Singh
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