दिवाली-छठ से पहले रोजगार बाजार में बड़ी हलचल, 2.5 लाख तक मौसमी और गिग नौकरियों की उम्मीद

संवाद 24 डेस्क। देश में त्योहारी मौसम शुरू होने के साथ ही रोजगार के मोर्चे पर भी नई गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान खरीदारी, ऑनलाइन ऑर्डर, डिलीवरी, यात्रा और होटल-रेस्तरां सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ कंपनियां अतिरिक्त कर्मचारियों की तैयारी कर रही हैं। इसी बीच NLB Services की एक रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से दिसंबर 2026 के बीच भारत में करीब 2 लाख से 2.5 लाख मौसमी और गिग नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। रिपोर्ट में त्योहारी भर्ती में 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि की संभावना जताई गई है।

सिर्फ दिवाली नहीं, पूरे त्योहारी सीजन से बनेगा रोजगार का माहौल
रिपोर्ट में रोजगार के अवसरों को केवल दिवाली या छठ तक सीमित नहीं किया गया है। जुलाई-दिसंबर की अवधि में आने वाले विभिन्न त्योहारों और इस दौरान बढ़ने वाली उपभोक्ता मांग को ध्यान में रखकर यह अनुमान तैयार किया गया है। ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और कंज्यूमर सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में त्योहारी मांग का सीधा असर कर्मचारियों की जरूरत पर पड़ने की संभावना है। अमर उजाला की रिपोर्ट भी इसी NLB Services अध्ययन के आधार पर त्योहारी मौसम में रोजगार के नए अवसरों की बात करती है।
त्योहारों के दौरान लोग कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान, उपहार, खाद्य सामग्री और अन्य उत्पादों की खरीद बढ़ाते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर बढ़ने से वेयरहाउस, पैकेजिंग, ऑर्डर प्रोसेसिंग और अंतिम चरण की डिलीवरी से जुड़े कामों की जरूरत बढ़ सकती है। वहीं बाजारों और मॉल में ग्राहकों की संख्या बढ़ने से रिटेल सेल्स, ग्राहक सहायता और इन्वेंटरी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी अतिरिक्त मानव संसाधन की आवश्यकता पैदा होती है।

किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा अवसर बनने की उम्मीद?
NLB Services के अनुसार त्योहारी मौसम में लास्ट-माइल डिलीवरी, वेयरहाउसिंग और फुलफिलमेंट, रिटेल सेल्स, कस्टमर एक्सपीरियंस, इन्वेंटरी मैनेजमेंट, फील्ड ऑपरेशंस और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में मौसमी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण मांग रह सकती है।
इसका अर्थ यह है कि रोजगार के अवसर केवल डिलीवरी एजेंट या रिटेल कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेंगे। ऑनलाइन कारोबार के विस्तार के साथ पर्दे के पीछे काम करने वाले कई तकनीकी और संचालन संबंधी पद भी महत्वपूर्ण हो रहे हैं। इनमें ऑर्डर मैनेजमेंट, कैटलॉग मैनेजमेंट, रिटर्न और रिफंड से जुड़े काम, ग्राहक समाधान तथा इन्वेंटरी से जुड़े पद शामिल हैं।

गिग वर्क और मौसमी रोजगार की बढ़ती भूमिका
त्योहारी सीजन में कंपनियों के सामने एक चुनौती यह रहती है कि मांग कुछ महीनों या कुछ हफ्तों में अचानक बढ़ जाती है। ऐसे में स्थायी कर्मचारियों की संख्या तुरंत बढ़ाना हर कंपनी के लिए व्यावहारिक नहीं होता। इसी वजह से सीजनल और गिग वर्कफोर्स की भूमिका बढ़ रही है।
गिग रोजगार में व्यक्ति को पारंपरिक स्थायी नौकरी के बजाय किसी विशेष अवधि, काम या सेवा के आधार पर अवसर मिल सकता है। डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कुछ ग्राहक सेवा क्षेत्रों में इस तरह के काम पहले से मौजूद हैं। त्योहारी मांग बढ़ने पर इन भूमिकाओं की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति के लिए काम की अवधि, भुगतान, शिफ्ट, इंसेंटिव और अन्य शर्तें कंपनी तथा भूमिका के अनुसार अलग-अलग होती हैं।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी बढ़ेंगे अवसर
इस रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू छोटे और मध्यम शहरों से जुड़ा है। अनुमान के मुताबिक टियर-2 और टियर-3 शहर कुल त्योहारी भर्ती मांग का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा दे सकते हैं। इन बाजारों में भर्ती गतिविधि में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और संगठित रिटेल के नेटवर्क के विस्तार से रोजगार का भौगोलिक दायरा भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट में जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों का उल्लेख किया गया है। इसका संकेत यह है कि त्योहारी रोजगार की मांग केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह सकती।

फ्रेशर्स और पहली बार नौकरी तलाशने वालों के लिए क्या मायने?
रिपोर्ट में फ्रेशर्स और पहली बार काम शुरू करने वाले लोगों को भी त्योहारी रोजगार बाजार में महत्वपूर्ण प्रतिभा समूह बताया गया है। लचीली शिफ्ट, नजदीक उपलब्ध काम और निश्चित अवधि के रोजगार मॉडल ऐसे उम्मीदवारों के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं, जिन्हें अभी स्थायी नौकरी नहीं मिली है।
हालांकि उम्मीदवारों को मौसमी नौकरी को स्थायी रोजगार समझने से बचना चाहिए। किसी गिग या सीजनल भूमिका की अवधि सीमित हो सकती है और त्योहार समाप्त होने के बाद काम की उपलब्धता बदल सकती है। इसलिए आवेदन से पहले भुगतान की संरचना, काम के घंटे, अनुबंध की अवधि, इंसेंटिव, छुट्टी और अन्य शर्तों को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है।

महिलाओं के लिए भी खुल रहे रोजगार के नए रास्ते
रिपोर्ट में महिलाओं को भी बढ़ते त्योहारी रोजगार बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। विशेष रूप से गैर-मेट्रो क्षेत्रों की महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की संभावना जताई गई है। कुछ श्रेणियों में नई महिला नियुक्तियों में गैर-मेट्रो क्षेत्रों की महिलाओं की हिस्सेदारी 30 से 35 प्रतिशत तक रहने का अनुमान दिया गया है।
लचीली शिफ्ट और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अवसर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जो लंबी दूरी की नौकरी या महानगरों में स्थानांतरण नहीं कर सकते। हालांकि हर नौकरी में शिफ्ट, कार्यस्थल और पात्रता की शर्तें अलग होंगी, इसलिए उम्मीदवारों को किसी भी अवसर को स्वीकार करने से पहले संबंधित नियोक्ता की शर्तें जांचनी चाहिए।

अब भर्ती पहले से शुरू करने पर जोर
रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष कंपनियों की भर्ती रणनीति में बदलाव से जुड़ा है। पहले जहां कंपनियां त्योहारों के करीब पहुंचने पर तेजी से कर्मचारियों की नियुक्ति करती थीं, वहीं अब कई नियोक्ता त्योहारी पीक से करीब 12 से 14 सप्ताह पहले workforce planning शुरू कर रहे हैं। इसका उद्देश्य अंतिम समय में कर्मचारियों की कमी से बचना और मांग बढ़ने से पहले प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना है।
इस बदलाव का असर नौकरी तलाशने वालों पर भी पड़ता है। अगर कंपनियां पहले से भर्ती शुरू कर रही हैं तो उम्मीदवारों के लिए भी त्योहार आने का इंतजार करने के बजाय संबंधित कंपनियों के करियर पेज और विश्वसनीय रोजगार प्लेटफॉर्म पर पहले से अवसर तलाशना उपयोगी हो सकता है।

नई नौकरियों में डिजिटल कौशल की भूमिका भी बढ़ रही
त्योहारी रोजगार का स्वरूप भी बदल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक नए दौर की ऑपरेशनल भूमिकाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा, ऑटोमेशन और रियल-टाइम निर्णय लेने की क्षमता का महत्व बढ़ रहा है। डार्क-स्टोर इन्वेंटरी कंट्रोल, रिटर्न-रिफंड स्पेशलिस्ट, मार्केटप्लेस ऑपरेशंस, फ्रॉड और ट्रांजैक्शन सपोर्ट, कैटलॉग मैनेजमेंट तथा ऑर्डर मैनेजमेंट जैसे पद इसी बदलाव को दर्शाते हैं।
इसका अर्थ है कि केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित रहने के बजाय डिजिटल टूल, बेसिक डेटा हैंडलिंग, ग्राहक संवाद और ऑनलाइन ऑर्डर सिस्टम की जानकारी रखने वाले उम्मीदवारों के लिए कुछ नई भूमिकाएं खुल सकती हैं।

क्या 2.5 लाख नौकरियां पक्की हैं?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना जरूरी है कि 2 से 2.5 लाख का आंकड़ा अनुमानित रोजगार अवसरों का है, घोषित वैकेंसी की सूची नहीं। NLB Services ने उद्योग के रुझानों, नियोक्ताओं की धारणा और वास्तविक त्योहारी जॉब पोस्टिंग्स के आधार पर मौसमी और गिग रोजगार की संभावित संख्या का अनुमान लगाया है। इसलिए इसे सरकारी भर्ती की तरह निश्चित रिक्तियों की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
नौकरी की तलाश करने वालों के लिए इसका वास्तविक अर्थ यह है कि आने वाले महीनों में कुछ क्षेत्रों में भर्ती गतिविधि बढ़ सकती है, लेकिन उपलब्ध पद, स्थान, वेतन और रोजगार की अवधि अलग-अलग कंपनियों पर निर्भर करेगी।

युवाओं के लिए अवसर, लेकिन सावधानी भी जरूरी
त्योहारी मौसम का बढ़ता कारोबार युवाओं, फ्रेशर्स और अतिरिक्त आय तलाशने वाले लोगों के लिए अस्थायी रोजगार का अवसर दे सकता है। लेकिन नौकरी तलाशते समय फर्जी भर्ती एजेंसियों और ऑनलाइन ठगी से सावधान रहना भी उतना ही जरूरी है। किसी भी नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले कंपनी का नाम, आधिकारिक वेबसाइट, नौकरी की शर्तें और भुगतान संबंधी जानकारी जांचनी चाहिए। बिना सत्यापन के किसी व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी या नौकरी दिलाने के नाम पर पैसा देना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

दिवाली और छठ से जुड़े त्योहारी कारोबार का असर इस बार रोजगार बाजार पर भी दिखाई देने की संभावना है। NLB Services के अनुमान के अनुसार जुलाई-दिसंबर 2026 में 2 से 2.5 लाख मौसमी और गिग अवसर पैदा हो सकते हैं तथा त्योहारी भर्ती 15 से 20 प्रतिशत बढ़ सकती है। ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल जैसे क्षेत्र इसके प्रमुख चालक हो सकते हैं।
टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती भागीदारी, फ्रेशर्स और महिलाओं के लिए नए अवसर तथा डिजिटल कौशल पर बढ़ता जोर इस रोजगार प्रवृत्ति के बदलते स्वरूप की ओर संकेत करता है। हालांकि यह आंकड़ा अनुमान है, इसलिए उम्मीदवारों को इसे निश्चित नौकरी की गारंटी के रूप में नहीं बल्कि आगामी महीनों में संभावित भर्ती गतिविधि के संकेत के रूप में देखना चाहिए।

Geeta Singh
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