
संवाद 24 उत्तर प्रदेश। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली, मथुरा, आज एक बार फिर वैचारिक और धार्मिक संघर्ष का केंद्र बिंदु बन गई है। श्री कृष्ण जन्मस्थान की ‘मुक्ति’ के लिए संतों द्वारा घोषित बहुचर्चित ‘कारसेवा’ का आज गोवर्धन क्षेत्र से औपचारिक शंखनाद होने जा रहा है। इस घोषणा ने न केवल धार्मिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, बल्कि राज्य प्रशासन और पुलिस के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
संतों की हुंकार: अयोध्या की तर्ज पर कारसेवा की तैयारी
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोवर्धन के जुल्हैंदी स्थित श्रीचित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर, स्वामी डॉ. सच्चिदानंद महाराज ने पिछले महीने एक बड़ा एलान किया था। उन्होंने कहा था कि वे श्री कृष्ण जन्मस्थान को शाही ईदगाह मस्जिद से ‘मुक्त’ कराने के लिए अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर देशव्यापी कारसेवा शुरू करेंगे। इस आह्वान को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का भी पुरजोर समर्थन मिला, जिससे यह आंदोलन एक बड़ा धार्मिक रूप ले चुका है। डॉ. सच्चिदानंद महाराज ने न केवल कारसेवा की घोषणा की, बल्कि इसके लिए राजस्थान के बंशी पहाड़पुर से गुलाबी पत्थर भी मंगाए हैं, जो मंदिर निर्माण के लिए तराशे जाने हैं। उनकी घोषणा में एक विवादास्पद हिस्सा यह भी था कि वे ईदगाह के ‘विवादित गुंबद’ को गिराने का प्रयास करेंगे, जिसने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
आज की रणनीति: शिलापूजन या सिर्फ हवन?
शुरुआती योजना के अनुसार, आज यानी 9 अगस्त को, श्री कृष्ण जन्मस्थान पर ही कारसेवा शुरू करने का कार्यक्रम था। लेकिन, पुलिस प्रशासन की कड़ी आपत्ति और राज्य में चल रही कांवड़ यात्रा के मद्देनजर, संतों ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है। ताजा जानकारी के अनुसार, आज संतों की कारसेवा का ‘शंखनाद’ जन्मस्थान के बजाय गोवर्धन स्थित श्रीचित्रगुप्त पीठ पर होगा। सुबह 9 बजे से देश भर से आए प्रमुख संत-महांतों की मौजूदगी में एक भव्य हवन-पूजन और वैदिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य भगवान से जन्मस्थान को ‘जल्द मुक्त कराने’ और जारी न्यायिक प्रक्रिया में सकारात्मक और शीघ्र निर्णय आने की प्रार्थना करना है। हालांकि, शिलापूजन (पत्थरों की पूजा) का कार्यक्रम अभी स्थगित कर दिया गया है। संतों का कहना है कि वे आज केवल हवन के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को केंद्रित करेंगे और कारसेवा की अगली आधिकारिक तिथि की घोषणा भविष्य में अन्य संतों की सहमति से की जाएगी।
पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर
संतों की इस हुंकार के बाद मथुरा प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले ही स्वामी सच्चिदानंद महाराज से मुलाकात कर उनसे कारसेवा का कार्यक्रम रोकने का अनुरोध किया था, यह तर्क देते हुए कि इससे जिले में शांति और कानून-व्यवस्था का माहौल बिगड़ सकता है। पीठाधीश्वर ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उन्हें धमकी भी दी थी। बावजूद इसके, आज के कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों और संतों के एकत्र होने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने श्री कृष्ण जन्मस्थान परिसर और गोवर्धन क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन किसी भी सूरत में माहौल को खराब नहीं होने देना चाहता है।
आस्था और कानून के बीच गहराता गतिरोध
मथुरा का श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद सालों से अदालतों में लंबित है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण भगवान कृष्ण की जन्मस्थली पर बने प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया था, जबकि मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज करता है। सुप्रीम कोर्ट की सुलह की कोशिशें भी अभी तक नाकाम रही हैं। आज का संतों का यह ‘शंखनाद’ यह स्पष्ट करता है कि आस्था का पक्ष कानूनी लड़ाई के साथ-साथ अब सड़क पर भी अपनी आवाज बुलंद करने के लिए तैयार है। यह घटनाक्रम आगामी दिनों में मथुरा की राजनीति और धार्मिक सौहार्द को किस दिशा में ले जाएगा, यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है। संतों का अगला कदम क्या होगा और क्या प्रशासन इस बढ़ते दबाव को झेल पाएगा, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।






