
संवाद 24 डेस्क। दक्षिण भारतीय व्यंजनों की पहचान केवल उनके स्वाद में ही नहीं, बल्कि उनकी सादगी, प्राकृतिक सामग्री और पारंपरिक पकाने की तकनीक में भी छिपी है। इन्हीं लोकप्रिय व्यंजनों में अप्पम एक विशेष स्थान रखता है। बाहर से हल्का कुरकुरा और किनारों पर पतला, जबकि बीच से नरम, मुलायम और स्पंजी अप्पम खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है। यह मुख्य रूप से चावल और नारियल से तैयार किया जाता है और दक्षिण भारत, विशेषकर केरल के पारंपरिक भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
अप्पम को आमतौर पर सब्जियों या नारियल आधारित स्ट्यू, चना करी, अंडा करी तथा अन्य मसालेदार व्यंजनों के साथ परोसा जाता है। इसकी सबसे खास बात इसका कटोरे जैसा आकार और किनारों की महीन, जालीदार बनावट है। पारंपरिक रूप से इसके लिए चावल के घोल को किण्वित किया जाता है, जिससे अप्पम में हल्की खटास, विशिष्ट सुगंध और प्राकृतिक फुलाव आता है।
घर पर अप्पम बनाना मुश्किल नहीं है, लेकिन इसके लिए चावल भिगोने, घोल की सही स्थिरता और किण्वन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। सही विधि अपनाई जाए तो बिना किसी विशेष पाक-कौशल के भी स्वादिष्ट और मुलायम अप्पम तैयार किए जा सकते हैं।
अप्पम के लिए आवश्यक सामग्री
लगभग 10 से 12 मध्यम आकार के अप्पम बनाने के लिए निम्न सामग्री की आवश्यकता होगी—
मुख्य सामग्री
- कच्चा चावल – 2 कप
- उबले हुए चावल – ½ कप
- ताजा कसा हुआ नारियल – 1 कप
- चीनी – 1 से 1½ चम्मच
- नमक – स्वादानुसार
- सूखा इंस्टेंट यीस्ट – ½ से 1 चम्मच
- गुनगुना पानी – आवश्यकता के अनुसार
- पकाने के लिए थोड़ा तेल
वैकल्पिक सामग्री
यदि आप पारंपरिक स्वाद के थोड़ा और करीब जाना चाहते हैं, तो यीस्ट के स्थान पर प्राकृतिक किण्वन की विधि अपनाई जा सकती है। कुछ पारंपरिक व्यंजनों में किण्वन के लिए थोड़ी मात्रा में पिछली बनी हुई अप्पम की खमीरयुक्त सामग्री या प्राकृतिक स्टार्टर का भी प्रयोग किया जाता है।
चावल तैयार करने की विधि
अप्पम की सफलता काफी हद तक चावल की तैयारी पर निर्भर करती है। सबसे पहले कच्चे चावल को साफ करके 2 से 4 घंटे के लिए पर्याप्त पानी में भिगो दें। गर्म मौसम में सामान्यतः कुछ घंटे पर्याप्त होते हैं, जबकि ठंडे मौसम में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
उबले हुए चावल को अलग से तैयार रखें। यहां उबले चावल का प्रयोग घोल को बेहतर बनावट देने और तैयार अप्पम को नरम रखने में सहायता करता है।
भीगे हुए चावल को पानी से निकालकर अच्छी तरह धो लें। इसके बाद कच्चे चावल, उबले चावल और कसे हुए नारियल को मिक्सर में डालें। थोड़े-थोड़े पानी की सहायता से इसे बारीक पीस लें।
घोल बहुत गाढ़ा या बहुत पतला नहीं होना चाहिए। इसकी स्थिरता सामान्य डोसे के घोल की तुलना में थोड़ी पतली रखी जा सकती है, ताकि तवे या अप्पम पैन में घुमाने पर घोल आसानी से फैल सके।
अप्पम के घोल में किण्वन क्यों जरूरी है?
अप्पम की पारंपरिक विशेषताओं में उसका हल्का खट्टापन, मुलायम मध्य भाग और फूले हुए किनारे प्रमुख हैं। इन गुणों के लिए किण्वन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यीस्ट का प्रयोग करने पर पहले गुनगुने पानी में यीस्ट और थोड़ी चीनी मिलाकर कुछ मिनट के लिए रखा जा सकता है। जब मिश्रण में हल्की सक्रियता दिखाई देने लगे, तब इसे तैयार चावल के घोल में मिला दें।
अब घोल को अच्छी तरह मिलाकर ढक दें और किसी अपेक्षाकृत गर्म स्थान पर 6 से 10 घंटे के लिए रख दें। किण्वन का समय मौसम और कमरे के तापमान पर निर्भर करता है। गर्म मौसम में घोल अपेक्षाकृत जल्दी तैयार हो सकता है, जबकि ठंडे मौसम में अधिक समय लग सकता है।
किण्वित घोल का आकार थोड़ा बढ़ सकता है और उसमें हल्की खट्टी सुगंध दिखाई दे सकती है। यह संकेत है कि घोल पकाने के लिए तैयार है।
घोल की अंतिम तैयारी
किण्वन के बाद घोल को धीरे से मिलाएं। इसमें स्वादानुसार नमक डालें। यदि घोल बहुत गाढ़ा हो गया हो तो थोड़ा पानी मिलाकर इसकी स्थिरता ठीक करें।
ध्यान रखें कि घोल इतना पतला हो कि अप्पम पैन में आसानी से घूम सके, लेकिन इतना भी पतला न हो कि किनारों पर पकड़ ही न बनाए। सही घोल वह है जो पैन को घुमाने पर किनारों तक फैल जाए और बीच में पर्याप्त मात्रा में जमा रहे।
यदि आप पहली बार अप्पम बना रहे हैं, तो पहले एक अप्पम बनाकर उसकी बनावट जांचना बेहतर है। आवश्यकता पड़ने पर घोल में थोड़ा पानी मिलाकर या थोड़ा गाढ़ा करके उसकी स्थिरता समायोजित की जा सकती है।
अप्पम बनाने की विधि
अप्पम बनाने के लिए पारंपरिक अप्पम पैन या छोटा गहरा नॉन-स्टिक पैन इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे पहले पैन को मध्यम आंच पर गर्म करें।
पैन बहुत अधिक गर्म नहीं होना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक गर्म सतह पर घोल डालते ही किनारे तेजी से पक सकते हैं और अप्पम का आकार ठीक से नहीं बनेगा।
अब एक करछी भर घोल पैन के बीच में डालें। पैन के हैंडल को पकड़कर उसे गोलाकार दिशा में धीरे-धीरे घुमाएं। ऐसा करने से घोल किनारों की ओर फैल जाएगा और बीच में अपेक्षाकृत मोटा हिस्सा रह जाएगा।
पैन को वापस गैस पर रखें और उसे ढक दें। मध्यम से धीमी आंच पर अप्पम को पकने दें।
लगभग 2 से 3 मिनट में किनारे हल्के सुनहरे और कुरकुरे दिखाई देने लगेंगे, जबकि बीच का हिस्सा सफेद, नरम और स्पंजी रहेगा। सामान्यतः अप्पम को दूसरी तरफ पलटने की आवश्यकता नहीं होती।
जब बीच का भाग पूरी तरह पक जाए और किनारे पैन से आसानी से अलग होने लगें, तब इसे सावधानी से निकाल लें।
इसी प्रकार बाकी घोल से अप्पम तैयार करें।
स्वादिष्ट अप्पम की पहचान
एक अच्छे अप्पम की सबसे महत्वपूर्ण पहचान उसकी बनावट है। इसके किनारे पतले, हल्के कुरकुरे और महीन जालीदार हो सकते हैं, जबकि मध्य भाग नरम और स्पंजी होना चाहिए।
अप्पम का रंग सामान्यतः हल्का सफेद या क्रीम जैसा होता है। अत्यधिक भूरा या जला हुआ अप्पम इस बात का संकेत हो सकता है कि पैन बहुत गर्म था या उसे आवश्यकता से अधिक समय तक पकाया गया।
अप्पम में हल्की प्राकृतिक खटास और नारियल की सौम्य सुगंध इसके पारंपरिक स्वाद को बेहतर बनाती है।
अप्पम के साथ क्या परोसें?
अप्पम का स्वाद विभिन्न प्रकार की करी और स्ट्यू के साथ और भी बेहतर हो जाता है। केरल शैली के वेजिटेबल स्ट्यू के साथ इसका संयोजन विशेष रूप से लोकप्रिय है। नारियल के दूध और हल्के मसालों से बनी स्ट्यू की मलाईदार बनावट नरम अप्पम के साथ अच्छी तरह मेल खाती है।
इसके अलावा अप्पम को—
- अंडा करी
- चिकन स्ट्यू
- वेजिटेबल स्ट्यू
- चना करी
- नारियल आधारित सब्जी
- मसालेदार दाल
- नारियल की चटनी
के साथ भी परोसा जा सकता है।
नाश्ते से लेकर रात के भोजन तक, अप्पम एक ऐसा व्यंजन है जिसे अलग-अलग प्रकार की करी के साथ आसानी से शामिल किया जा सकता है।
अप्पम बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- चावल को पर्याप्त समय दें:
चावल ठीक से न भिगोने पर उसे बारीक पीसना कठिन हो सकता है और अप्पम की बनावट प्रभावित हो सकती है। - घोल बहुत गाढ़ा न रखें:
बहुत गाढ़े घोल से किनारे पतले और जालीदार नहीं बनेंगे। - किण्वन की उपेक्षा न करें:
किण्वन अप्पम के स्वाद और बनावट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। - पैन का तापमान नियंत्रित रखें:
बहुत तेज आंच पर किनारे जल सकते हैं और बीच का हिस्सा ठीक से पकने से पहले अप्पम का बाहरी भाग अधिक भूरा हो सकता है। - हर अप्पम के बीच घोल मिलाएं:
चावल और नारियल के महीन कण नीचे बैठ सकते हैं, इसलिए आवश्यकता के अनुसार घोल को हल्के हाथ से मिलाते रहें। - पहली बार में घबराएं नहीं:
पहला अप्पम अक्सर घोल की स्थिरता और पैन के तापमान को समझने में मदद करता है। उसके बाद आकार और बनावट बेहतर होती जाती है।
बिना यीस्ट के अप्पम
यदि आप यीस्ट का प्रयोग नहीं करना चाहते, तो प्राकृतिक किण्वन की विधि अपनाई जा सकती है। इसके लिए चावल और नारियल से तैयार घोल को ढककर उचित तापमान पर अधिक समय तक रखा जाता है। प्राकृतिक किण्वन में समय मौसम और वातावरण के अनुसार बदल सकता है।
यह विधि पारंपरिक स्वाद के अधिक करीब हो सकती है, लेकिन इसमें तापमान और किण्वन की स्थिति पर अधिक ध्यान देना पड़ता है। यदि घोल में असामान्य गंध, रंग या खराब होने के स्पष्ट संकेत दिखाई दें, तो उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
अप्पम का पोषण संबंधी पक्ष
अप्पम मुख्य रूप से चावल और नारियल से तैयार होता है। चावल कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्रोत है, जबकि नारियल इसमें वसा और कुछ मात्रा में फाइबर सहित अन्य पोषक तत्व जोड़ता है। इसकी वास्तविक पोषण मात्रा इस्तेमाल की गई सामग्री, मात्रा और परोसने के तरीके पर निर्भर करती है।
यदि भोजन को अधिक संतुलित बनाना हो तो अप्पम के साथ सब्जियों से भरपूर स्ट्यू, दाल या अन्य प्रोटीन स्रोत परोसे जा सकते हैं। इस तरह भोजन में कार्बोहाइड्रेट के साथ सब्जियां और प्रोटीन भी शामिल किए जा सकते हैं।
अप्पम दक्षिण भारतीय पाक परंपरा का एक सुंदर उदाहरण है, जिसमें साधारण सामग्री से विशिष्ट स्वाद और बनावट वाला व्यंजन तैयार किया जाता है। चावल, नारियल, पानी, नमक और किण्वन जैसी मूल प्रक्रियाएं मिलकर इसे इसकी खास पहचान देती हैं।
घर पर उत्तम अप्पम बनाने की कुंजी है—सही तरीके से भिगोया और पीसा हुआ चावल, संतुलित घोल, उचित किण्वन और नियंत्रित तापमान पर पकाना। जब इन चार बातों का ध्यान रखा जाता है, तो अप्पम के किनारे पतले और हल्के कुरकुरे तथा बीच का हिस्सा मुलायम और स्पंजी बनाया जा सकता है।
गरमा-गरम अप्पम को नारियल आधारित वेजिटेबल स्ट्यू या अपनी पसंदीदा करी के साथ परोसें। इसकी हल्की बनावट और सौम्य स्वाद मसालेदार करी के साथ एक बेहतरीन संतुलन बनाते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक दक्षिण भारतीय भोजन में अप्पम आज भी अपनी अलग और खास जगह बनाए हुए है।






