
संवाद 24 डेस्क। भारतीय मिठाइयों की दुनिया में कुछ मिठाइयां अपने स्वाद के साथ-साथ अपनी खूबसूरत बनावट के कारण भी अलग पहचान बनाती हैं। इमरती ऐसी ही पारंपरिक मिठाई है, जिसका नारंगी या सुनहरा रंग, गोलाकार फूल जैसी आकृति, हल्की कुरकुरी बाहरी परत और भीतर तक समाई चाशनी इसे खास बनाती है। त्योहार, विवाह, धार्मिक आयोजन या घर में किसी विशेष अवसर पर मिठाई परोसनी हो, तो इमरती अपनी आकर्षक उपस्थिति के कारण तुरंत ध्यान खींचती है। हालांकि देखने में इसकी जटिल आकृति देखकर लगता है कि इसे बनाना बेहद कठिन होगा, लेकिन सही अनुपात, उचित घोल और थोड़े अभ्यास के साथ घर पर भी स्वादिष्ट इमरती तैयार की जा सकती है।
इमरती और जलेबी में क्या है खास अंतर?
अक्सर इमरती को जलेबी का ही एक रूप समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों की सामग्री और बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण अंतर होता है। पारंपरिक इमरती मुख्य रूप से धुली हुई उड़द दाल से तैयार की जाती है, जबकि सामान्य जलेबी का घोल प्रायः मैदा आधारित होता है। इमरती की पहचान उसकी फूल जैसी जटिल आकृति से भी होती है। इसके लिए घोल को विशेष तरीके से गर्म तेल या घी में डालकर गोलाकार और पंखुड़ी जैसी संरचना बनाई जाती है। तलने के बाद इसे चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे बाहर की परत हल्की कुरकुरी रहते हुए मिठास से भर जाती है।
स्वादिष्ट इमरती के लिए कैसी होनी चाहिए सामग्री?
इमरती बनाने में सामग्री बहुत अधिक नहीं लगती, लेकिन हर सामग्री की मात्रा और गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। लगभग 8 से 10 लोगों के लिए इमरती तैयार करने हेतु सामग्री इस प्रकार रखी जा सकती है।
इमरती के घोल के लिए सामग्री
- धुली हुई उड़द दाल – 2 कप
- पानी – आवश्यकता के अनुसार
- चावल का आटा – 1 से 2 बड़े चम्मच
- खाने योग्य नारंगी रंग – एक चुटकी, वैकल्पिक
- घी या तेल – तलने के लिए
चाशनी के लिए सामग्री
- चीनी – 3 कप
- पानी – लगभग 1½ से 2 कप
- इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
- केसर – कुछ रेशे, वैकल्पिक
- गुलाब जल – 1 छोटा चम्मच, वैकल्पिक
- नींबू का रस – कुछ बूंदें
चाशनी में नींबू के रस की थोड़ी मात्रा डालने से चीनी के अत्यधिक क्रिस्टल बनने की संभावना कम करने में मदद मिलती है। वहीं इलायची, केसर या गुलाब जल इमरती की खुशबू को अधिक आकर्षक बना सकते हैं।
पहली तैयारी ही तय करती है इमरती की बनावट
इमरती बनाने की शुरुआत उड़द दाल को अच्छी तरह धोने से होती है। दाल को पर्याप्त पानी में लगभग 4 से 6 घंटे के लिए भिगो देना चाहिए। गर्म मौसम में बहुत लंबे समय तक भिगोकर रखने से दाल में अवांछित गंध या खट्टापन आ सकता है, इसलिए मौसम के अनुसार समय पर ध्यान देना जरूरी है। भीगी हुई दाल को पानी से निकालकर अतिरिक्त पानी अलग कर दें।
अब दाल को बहुत कम पानी की सहायता से बारीक पीसें। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घोल बहुत पतला नहीं होना चाहिए। इमरती के लिए ऐसा घोल चाहिए जो गाढ़ा, चिकना और पर्याप्त फेंटने के बाद हल्का तथा फूला हुआ हो। अधिक पानी डालने से घोल ढीला हो सकता है और तलते समय इमरती का आकार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
घोल को फेंटना है तो धैर्य भी रखना होगा
दाल पीसने के बाद घोल को एक गहरे बर्तन में निकालकर अच्छी तरह फेंटना चाहिए। हाथ से या उपयुक्त उपकरण की सहायता से इसे कुछ मिनट तक फेंटने पर घोल में हवा शामिल होती है, जिससे तैयार इमरती की बनावट बेहतर हो सकती है। घोल को बहुत ज्यादा पतला करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
घोल की जांच के लिए थोड़ी मात्रा उंगली या चम्मच पर लेकर देखा जा सकता है। वह आसानी से बहने के बजाय अपना आकार बनाए रखने वाला होना चाहिए। यदि घोल बहुत ढीला लगे तो थोड़ा चावल का आटा मिलाया जा सकता है। चावल का आटा इमरती की बाहरी बनावट को कुछ हद तक कुरकुरा बनाने में भी मदद करता है।
रंग केवल सुंदरता के लिए नहीं, पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण
पारंपरिक इमरती का रंग सामान्यतः गहरा नारंगी या सुनहरा दिखाई देता है। इसके लिए खाद्य-ग्रेड नारंगी रंग की बहुत थोड़ी मात्रा इस्तेमाल की जा सकती है। रंग का प्रयोग पूरी तरह वैकल्पिक है। यदि प्राकृतिक रूप से हल्का सुनहरा रंग पसंद हो, तो रंग को छोड़ भी सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी कृत्रिम रंग का उपयोग करते समय वह खाद्य उपयोग के लिए स्वीकृत होना चाहिए और उसकी मात्रा सीमित रखनी चाहिए।
अब आती है सबसे दिलचस्प कला—इमरती का आकार देना
इमरती की खूबसूरती उसकी आकृति में छिपी होती है। पारंपरिक रूप से घोल को छेद वाले कपड़े, मोटे कपड़े की पोटली या उपयुक्त नोजल वाले उपकरण में भरकर गर्म तेल या घी में डाला जाता है। इसके लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है।
कढ़ाही में तेल या घी को मध्यम तापमान तक गर्म करें। अब घोल को दबाते हुए पहले एक गोल आधार बनाएं और उसके चारों ओर छोटी-छोटी गोलाकार लकीरें तथा पंखुड़ी जैसा डिजाइन बनाएं। इमरती को बहुत बड़ा या बहुत पतला बनाने की कोशिश न करें। मध्यम आकार की इमरती तलने और चाशनी में डुबोने के लिए अधिक सुविधाजनक रहती है।
पहली कुछ इमरती पूरी तरह समान आकार की न बनें तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस मिठाई की आकृति बनाने में हाथ का अभ्यास धीरे-धीरे बेहतर होता है।
तेल का तापमान सही नहीं हुआ तो बिगड़ सकती है पूरी मेहनत
इमरती को तलने के दौरान तेल या घी का तापमान बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि तेल बहुत ठंडा होगा तो घोल फैल सकता है और इमरती अत्यधिक तेल सोख सकती है। दूसरी ओर, तेल बहुत अधिक गर्म होने पर बाहरी हिस्सा जल्दी रंग पकड़ सकता है, जबकि अंदर का हिस्सा अपेक्षित रूप से पक नहीं पाएगा।
इसलिए मध्यम आंच बनाए रखना बेहतर होता है। इमरती को धीरे-धीरे तलते हुए दोनों तरफ से सुनहरा और पर्याप्त कुरकुरा होने दें। जरूरत के अनुसार आंच को थोड़ा कम या अधिक किया जा सकता है, लेकिन लगातार तेज आंच पर तलने से बचना चाहिए।
चाशनी ही इमरती को देती है असली मिठास
जब इमरती तल रही हो, उसी दौरान चाशनी तैयार कर लेना सुविधाजनक रहता है। इसके लिए एक बर्तन में चीनी और पानी डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। चीनी घुलने के बाद चाशनी को कुछ देर तक पकने दें। इसमें इलायची, केसर या गुलाब जल का इस्तेमाल स्वाद और खुशबू के लिए किया जा सकता है।
इमरती के लिए चाशनी बहुत अधिक पानी जैसी नहीं होनी चाहिए। हल्की चिपचिपी और पर्याप्त गाढ़ी चाशनी मिठाई पर बेहतर ढंग से चढ़ती है। चाशनी को अत्यधिक गाढ़ा करने पर ठंडी होने के बाद वह जम सकती है, इसलिए इसे पकाते समय सावधानी जरूरी है।
गरम इमरती और चाशनी का मेल बनाता है असली स्वाद
तली हुई इमरती को तेल से निकालकर अतिरिक्त तेल कुछ क्षण के लिए निकलने दें। इसके बाद उसे गर्म या हल्की गर्म चाशनी में डालें। इमरती को चाशनी में कुछ मिनट रखने से उसकी बाहरी परत के भीतर मिठास पहुंचती है।
हालांकि इमरती को बहुत लंबे समय तक चाशनी में डुबोकर रखना भी उचित नहीं है। इससे उसकी कुरकुरी बनावट कम हो सकती है और मिठाई अत्यधिक नरम हो सकती है। इसलिए चाशनी में रखने का समय इमरती की मोटाई और चाशनी की गाढ़ाई के अनुसार तय करना चाहिए।
कुरकुरापन बचाए रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
इमरती की सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक है उसका बाहरी कुरकुरापन। इसे बनाए रखने के लिए घोल को बहुत पतला नहीं रखना चाहिए। तलते समय तेल का तापमान स्थिर रखना भी आवश्यक है। बहुत अधिक मात्रा में इमरती एक साथ डालने से तेल का तापमान अचानक कम हो सकता है, इसलिए कढ़ाही के आकार के अनुसार सीमित संख्या में इमरती तलें।
चाशनी में भीगी इमरती को तुरंत एक-दूसरे के ऊपर ढेर करने के बजाय कुछ समय अलग-अलग रखने से अतिरिक्त चाशनी व्यवस्थित हो जाती है और आकृति भी बेहतर बनी रहती है।
इमरती को कैसे परोसें?
इमरती को हल्की गर्म, कमरे के तापमान पर या ठंडी अवस्था में भी परोसा जा सकता है। इसे अकेले मिठाई के रूप में परोसना सबसे सामान्य तरीका है। कुछ जगहों पर इमरती के साथ मलाई, रबड़ी या दूध आधारित मिठास परोसी जाती है। हालांकि इमरती स्वयं ही चाशनी से भरपूर होती है, इसलिए उसके साथ परोसी जाने वाली अतिरिक्त मिठास की मात्रा स्वादानुसार रखनी चाहिए।
त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में इमरती को सजाकर परोसने के लिए ऊपर से कुछ केसर के रेशे, बारीक कटे मेवे या चांदी का वर्क लगाया जा सकता है। सजावट करते समय खाद्य उपयोग के लिए सुरक्षित सामग्री का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
घर पर इमरती बनाते समय होने वाली आम गलतियां
इमरती बनाने में सबसे आम गलती घोल को बहुत पतला करना है। ऐसी स्थिति में आकृति बनाना मुश्किल हो जाता है। दूसरी गलती तेल का तापमान बहुत अधिक रखना है, जिससे इमरती जल्दी गहरी रंगत पकड़ सकती है। तीसरी गलती चाशनी को जरूरत से ज्यादा गाढ़ा करना है। इससे इमरती ठंडी होने पर बहुत चिपचिपी या कठोर हो सकती है।
इसके अलावा दाल को पर्याप्त समय तक न भिगोना, घोल को ठीक से न फेंटना और एक साथ बहुत अधिक इमरती तलना भी अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस मिठाई में सामग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण सही तकनीक और धैर्य है।
स्वाद के साथ स्वच्छता भी जरूरी
घर पर मिठाई बनाते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दाल, पानी, तेल, बर्तन और इस्तेमाल होने वाले उपकरण स्वच्छ होने चाहिए। चाशनी तैयार करने के लिए साफ बर्तन का इस्तेमाल करें और तैयार इमरती को ढककर रखें। तलने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल या घी की गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए।
यदि मिठाई को लंबे समय तक रखना हो तो मौसम और भंडारण की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेष रूप से गर्म और नम वातावरण में चाशनी वाली मिठाइयों को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखने के बजाय उचित तरीके से सुरक्षित रखना अधिक उपयुक्त होता है।
पारंपरिक मिठास में छिपा है घरेलू स्वाद
इमरती केवल एक मिठाई नहीं बल्कि भारतीय पाक परंपरा की एक खूबसूरत मिसाल है। उड़द दाल से तैयार घोल को कलात्मक आकृति देना, उसे संतुलित तापमान पर तलना और फिर सुगंधित चाशनी में डुबोना—इन सभी चरणों का अपना महत्व है। यही कारण है कि एक अच्छी इमरती में केवल मिठास नहीं, बल्कि बनावट, खुशबू और रूप का संतुलन भी महसूस होता है।
घर पर इमरती बनाते समय पहली कोशिश में बिल्कुल बाजार जैसी आकृति बनना जरूरी नहीं। सही घोल तैयार करने और तापमान नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाए तो कुछ प्रयासों के बाद हाथ में पर्याप्त अभ्यास आ सकता है। जब सुनहरी, फूल जैसी इमरती चाशनी से निकलकर थाली में सजती है, तो उसकी सुंदरता और स्वाद दोनों ही मेहनत को सार्थक बना देते हैं।
आखिर क्यों खास बनी हुई है इमरती?
समय के साथ मिठाइयों के स्वाद और प्रस्तुतिकरण में कई बदलाव आए हैं, लेकिन इमरती जैसी पारंपरिक मिठाइयों की लोकप्रियता आज भी बनी हुई है। इसकी खासियत किसी एक सामग्री में नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया के संतुलन में है। उड़द दाल का गाढ़ा घोल, सही फेंटाई, सुंदर आकृति, नियंत्रित तापमान पर तलना और संतुलित चाशनी—ये सभी मिलकर इमरती का वह स्वाद तैयार करते हैं जिसे भारतीय मिठाई परंपरा में लंबे समय से पसंद किया जाता रहा है।
यदि घर पर इमरती बनाने की योजना है, तो जल्दबाजी के बजाय प्रक्रिया को समझकर आगे बढ़ना सबसे जरूरी है। सही अनुपात और थोड़े अभ्यास के साथ रसोई में तैयार की गई ताजी इमरती न केवल स्वादिष्ट लगती है, बल्कि पारंपरिक मिठाई बनाने की खुशी भी देती है।






