
संवाद 24, देहरादून (उत्तराखंड)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने कहा है कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा, आध्यात्मिक विरासत और विश्व कल्याण की भावना है। यदि भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और सुरक्षित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाना है तो समाज को देश विरोधी ताकतों, विदेशी षड्यंत्रों, सीमाई चुनौतियों तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य के प्रति सजग रहना होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। यह विचार उन्होंने देहरादून स्थित हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। संघ की आधिकारिक जानकारी के अनुसार संघ शिक्षा वर्गों का उद्देश्य स्वयंसेवकों में शारीरिक, बौद्धिक और संगठनात्मक क्षमता का विकास करना होता है।
“भारत की सांस्कृतिक चेतना ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति”
प्रदीप जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी सनातन सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और समग्र मानवता के कल्याण की भावना से निर्मित हुई है। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे जीवन मूल्यों का संदेश दिया है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति आज भी विश्व के अनेक देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत विश्व मंच पर तेजी से अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है। ऐसे समय में आवश्यक है कि समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहे और नई पीढ़ी भारतीय जीवन मूल्यों को समझते हुए आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ आगे बढ़े।
संघ की सौ वर्ष की यात्रा को बताया समाज जागरण का अभियान
अपने संबोधन में प्रदीप जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लगभग सौ वर्षों की यात्रा विचार, विश्वास, विकास और समाज जागरण की यात्रा रही है। उन्होंने कहा कि संघ समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने, अनुशासन, सेवा, संगठन और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने का कार्य निरंतर करता रहा है।
उन्होंने कहा कि संघ किसी व्यक्ति, संगठन अथवा समुदाय के विरोध के लिए नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रभाव, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से कार्य करता है। संघ के स्वयंसेवक देशभर में शिक्षा, सेवा, पर्यावरण, ग्राम विकास, सामाजिक समरसता और आपदा राहत जैसे अनेक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। संघ की आधिकारिक जानकारी में भी समाज संगठन, चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा को उसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल बताया गया है।
सीमाई क्षेत्रों और जनसांख्यिकीय बदलावों पर जताई चिंता
प्रदीप जोशी ने कहा कि भारत के सामने केवल बाहरी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां ही नहीं हैं, बल्कि कुछ आंतरिक परिस्थितियों पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे विषयों पर समाज को सजग और संवेदनशील रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतें तथा विदेशी षड्यंत्र भारत को कमजोर करने के प्रयास करते रहे हैं। इसलिए केवल सरकार या सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक जागरूक नागरिक का भी दायित्व है कि वह राष्ट्रहित से जुड़े विषयों के प्रति सतर्क रहे तथा समाज में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में योगदान दे।
बदलते युद्ध के स्वरूप में विज्ञान और तकनीक की बढ़ती भूमिका
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में युद्ध की परिभाषा तेजी से बदल रही है। अब संघर्ष केवल पारंपरिक सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साइबर सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संचार प्रणाली, अनुसंधान और तकनीकी क्षमता भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को विज्ञान, रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी नवाचार को प्राथमिकता देनी होगी। आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तभी पूरी तरह सफल होगा जब देश अनुसंधान, तकनीकी विकास और स्वदेशी उत्पादन के क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दें।
आत्मनिर्भर भारत के लिए सांस्कृतिक आधार भी आवश्यक
प्रदीप जोशी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल आर्थिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्रीय स्वाभिमान से भी जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत रखेगा तो आर्थिक और तकनीकी विकास को भी स्थायी आधार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की विविधता उसकी शक्ति है। विभिन्न भाषाएं, परंपराएं और जीवन पद्धतियां भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का हिस्सा हैं। इन्हें संरक्षित रखते हुए राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है।
सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों पर दिया विशेष बल
अपने उद्बोधन में प्रदीप जोशी ने कहा कि भारत को परम वैभव की ओर ले जाने के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि समाज में पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना, पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाना, सामाजिक भेदभाव समाप्त करना और प्रत्येक नागरिक में राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना आज की प्रमुख आवश्यकता है। इन विषयों पर समाज में व्यापक जनजागरण के प्रयास लगातार किए जाने चाहिए।
लेफ्टिनेंट जनरल जयवीर सिंह नेगी ने स्वयंसेवकों का बढ़ाया उत्साह
समारोह के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जयवीर सिंह नेगी ने अपने संबोधन में कहा कि 15 दिनों के प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों ने अनुशासन, संगठन क्षमता और राष्ट्र सेवा की उत्कृष्ट भावना का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं होती। जागरूक नागरिक, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवक भी राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामाजिक स्थिरता के महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं। उन्होंने युवाओं से समय और ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
306 शिक्षार्थियों ने लिया प्रशिक्षण
वर्ग व्यवस्था प्रमुख संदीप महावर ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 30 मई से प्रारंभ हुए 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग में कुल 306 शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि इनमें 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 144 महाविद्यालयीन छात्र एवं युवा व्यवसायी शामिल थे, जबकि 40 से 65 वर्ष आयु वर्ग के 162 शिक्षक, कर्मचारी, व्यवसायी तथा सेवानिवृत्त शिक्षार्थियों ने भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न आयु वर्गों के प्रतिभागियों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि समाज के विभिन्न वर्गों में संगठनात्मक प्रशिक्षण और राष्ट्र सेवा के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।
दंड युद्ध, नियुद्ध और योग प्रदर्शन ने आकर्षित किया ध्यान
समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन भी किया। इसमें दंड युद्ध, नियुद्ध, योगासन, सूर्य नमस्कार तथा सामूहिक समता जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से शारीरिक दक्षता, अनुशासन और समन्वय का परिचय दिया गया।
प्रदर्शनों को उपस्थित नागरिकों ने उत्साहपूर्वक देखा और स्वयंसेवकों के अनुशासन तथा सामूहिक कार्यशैली की सराहना की। संघ शिक्षा वर्गों में शारीरिक प्रशिक्षण के साथ बौद्धिक और संगठनात्मक गतिविधियों का भी समावेश होता है, जिसका उद्देश्य व्यक्तित्व विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करना माना जाता है।
बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
समापन समारोह में अनेक गणमान्य नागरिक, उद्योगपति, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में मातृशक्ति की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण प्रदर्शन का अवलोकन किया तथा वर्ग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
समारोह का समापन राष्ट्र निर्माण, सामाजिक संगठन और सेवा कार्यों के प्रति निरंतर सक्रिय रहने के आह्वान के साथ हुआ। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण प्राप्त स्वयंसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में समाज जागरण, संगठन सुदृढ़ीकरण और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।






